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“मन की बात (101 एपिसोड)” यह पुस्तक तैयार करने की प्रेरणा मुझे मेरे अंतर्मन से मिली है-डॉ.निशा नंदिनी भारतीय।

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गुवाहाटी। “भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात (101 एपिसोड)” यह पुस्तक तैयार करने की प्रेरणा मुझे मेरे अंतर्मन से मिली है। मैं स्वामी विवेकानंद जी के विचारों से बहुत प्रभावित हूँ। लगभग 33 वर्षो से में स्वामी जी की संस्था से जुड़ी हूं। उन्हीं के स्कूल में 30 वर्ष अध्यापन कार्य करके संस्कृति-संस्कारों को आत्मसात किया है। मैं स्वामी जी के बताए रास्ते पर चलकर जीवन को सार्थक करना चाहती हूँ।मुझे माननीय नरेंद्र मोदी जी और स्वामी जी के विचारों में काफी समानता दिखाई देती है। अगर मैं यह कहूं तो कोई अतिशयोक्ति होगी कि स्वामी विवेकानंद का पुनर्जन्म ही नरेंद्र मोदी जी हैं।नरेंद्र मोदी जी में वे सभी विशेषताएं दृष्टिगोचर होती है। जो कि (नरेंद्र दत्त) स्वामी विवेकानंद जी में थीं।मुझे ऐसा लगता है कि स्वामी जी का भारत को विश्व गुरू बनाने का जो सपना था। उसको पूरा करने के लिए ही नरेंद्र मोदी जी ने राजनीति में पदार्पण किया है।माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी मेरी दृष्टि में मानव नहीं महामानव है। उनके द्वारा कहा गया एक-एक शब्द अति सारगर्भित होता है मैंने उनके “मन की बात” के सभी एपिसोड को बड़े ध्यान से सुना है। एक बार उन्होंने बच्चों से कहा था कि हमें प्रतिस्पर्धा नहीं अनुस्पर्धा करनी चाहिए। एक अध्यापिका होने के नाते मैंने यह बात अपने विद्यार्थियों को कई बार समझायी है।इस पुस्तक में माननीय मोदी जी के 101 एपिसोड को हूबहू वैसा ही रखा गया है, जैसा मोदी जी ने बोला है। यह पुस्तक बनाने की इच्छा मेरे मन में इसलिए उठी कि आगे आने वाले बच्चे अपने पुस्तकालय में इस पुस्तक को पढ़कर लाभान्वित हो सकें। इस पुस्तक से पहले भी मैंने “भारत के प्रधान सेवक नरेंद्र मोदी की गौरवमयी गाथा” नाम से एक पुस्तक लिखी है।नरेंद्र मोदी जी अंदर से जैसे है, वैसे ही बाहर से हैं। उनके व्यक्तित्व- कृतित्व और विचारों से कोई भी व्यक्ति प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता है।वे बहुत ही आशावादी दृष्टिकोण और सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति हैं। उनका उद्बोधन सम्पूर्ण विश्व के हृदय को छू जाता है क्योंकि उसमें सच्चाई की सुगंध और हौसलों की उड़ान होती है। माननीय मोदी जी हम सभी भारतीयों के लिए जी जान से काम करने का उद्देश्य लेकर राजनीति में आए हैं।वे बहुत ही कर्मठ व निष्ठावान व्यक्ति हैं। उनका जीवन पूरी तरह भारत माता को समर्पित है। कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है जिसके लिए वह कर्मरत न हो। मोदी जी का जन्म एक महामानव के रूप में दिशा और दशा को सुधारने के लिए हुआ है।अब भारत गति से सुगति की ओर बढ़ रहा है वे बच्चों से कहते हैं “अपनापन चिरंजीवी होता है जब आप जैसे बच्चों से बात करता हूं तो सारी थकान दूर हो जाती है।”वे कहते हैं देश के सभा सौ करोड़ लोग मेरा परिवार हैं। वे बच्चों को गूगल की जगह पुस्तक पढ़ने की सलाह देते हैं। उनके अनुसार गूगल से ज्ञान प्राप्त नहीं होता। ज्ञान तो पुस्तकों और शिक्षकों से मिलता है। हमें अच्छे शिक्षकों की आवश्यकता है क्योंकि शिक्षक कभी रिटायर्ड नहीं होता है। खेलकूद के बिना जीवन खिलता नहीं है। महापुरुषों का जीवन चरित्र अवश्य पढ़ें। यह सभी संदेश वे बच्चों को देते हैं।उन्होंने अपना पारिवारिक जीवन त्याग कर स्वयं को देश सेवा में समर्पित कर दिया है। ब्रह्मचर्य में एक असीम शक्ति होती है तभी तो वे बिना थके लगातार काम करने के आदि हैं। उनमें आंतरिक ऊर्जा ऐसी है कि उनके चेहरे पर कभी भी थकान की शिकन तक दिखाई नहीं देती है।उन्होंने हिमालय पर बरसों तपस्या की है। बच्चों के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था कि 2024 के चुनाव की तैयारी करो, तभी मेरा सपना पूरा हो सकेगा। इसका तात्पर्य यह है की 10 साल तक वे अपना राम राज्य का सपना पूरा करने के लिए जी-तोड़ मेहनत करेंगे।मेरी इतनी क्षमता नहीं है कि मैं माननीय नरेंद्र मोदी जी के विषय में कुछ लिख सकूं। अंतर आत्मा की आवाज पर मैंने कुछ लिखने का प्रयास किया है। हृदय में जो उदगार थे, उन्हें प्रस्तुत कर करने का प्रयास किया है। अगर कहीं कुछ त्रुटि रह गई हो तो, मैं करबद्ध क्षमा प्रार्थी हूं। बिना किसी फेर बदल के माननीय मोदी जी के “मन की बात” के सभी एपिसोड को इस पुस्तक में दिया गया है। एक बार पुनः त्रुटियों के लिए क्षमा प्रार्थी हूं।अपनी एक रचना मोदी जी को सादर समर्पित कर रही हूं।

अति अल्प है जीवन अपना
इसकी क्या चिंता करना।
समर्पित कर मातृभूमि को
कफन ओढ़ निकल पड़ना।

मत सोचो जीवन पथ पर
सुकोमल पुष्प मार्ग मिलेगा।
साथी बना शूल को अपना
कभी न कंटक पग लगेगा।

जीवन की जीत-हार पर
तुम क्यों हंसते-रोते हो।
क्षणिकाओं में उलझकर
क्यों तुम लक्ष्य खोते हो।

प्रभु मूरत रख अंतर्मन में
निर्भय हो कर्म करते जा।
चिंतन अपने रिपु का छोड़
सुकर्म पथ पर बढ़ता जा।

जीवन जीते सम रहकर
अंत समय मुस्कुराते हैं।
धरती का कर्ज चुका कर
युग- पुरुष बन जाते हैं।

डॉ.निशा नंदिनी भारतीय

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