नमस्कार हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 97826 56423 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , लोक चिकित्सा के पास हजारों वर्षों से मानवता को स्वस्थ रखने की एक समृद्ध विरासत है-श्री सर्बानंद सोनोवाल – Raj News Live

Raj News Live

Latest Online Breaking News

लोक चिकित्सा के पास हजारों वर्षों से मानवता को स्वस्थ रखने की एक समृद्ध विरासत है-श्री सर्बानंद सोनोवाल

😊 Please Share This News 😊

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग तथा आयुष मंत्री, श्री सर्बानंद सोनोवाल और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री, श्री पेमा खांडू ने अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में आज पूर्वोत्तर आयुर्वेद और लोक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (एनईआईएएफएमआर) में क्षमता विस्तार परियोजना का शिलान्यास किय। संस्थान में कुल 53 करोड़ रुपये के निवेश से अतिरिक्त बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा।इस कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष पसांग दोरजी; स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास और जनजातीय कार्य मंत्री, अरुणाचल प्रदेश सरकार, अलो लिबांग; अरुणाचल पूर्व के सांसद (लोकसभा), तापिर गाओ; 38 पासीघाट पूर्व के विधायक, कलिंग मोयोंग; पासीघाट पश्चिम के विधायक, निन्नॉग एरिंग; अरुणाचल प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त, गुमझुम हैदर भी उपस्थित थे।इस अवसर पर अन्य गणमान्य व्यक्तियों में अरुणाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर टोमो रीबा भी उपस्थित थे।

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग तथा आयुष मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा, लोक चिकित्सा के पास हजारों वर्षों से मानवता को स्वस्थ रखने की एक समृद्ध विरासत है। यह हमारे समुदायों के बीच बना हुआ है और पीढ़ियों को उनके जीवन को समृद्ध बनाने में मदद कर रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व के अंतर्गतहमारी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को मजबूत करने और लोगों को समृद्ध जीवन का अनुभव प्रदान करने के लिए लोक चिकित्सा सहित पारंपरिक चिकित्सा को फिर से जीवंत करने का एक ईमानदार प्रयास किया गया हैमोदी सरकार ने इस प्रयास को आगे बढ़ाते हुएपूर्वोत्तर आयुर्वेद और लोक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (एनईआईएएफएमआरमें अतिरिक्त बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए निवेश की प्रतिबद्धता व्यक्त की हैजो आयुर्वेद और लोक चिकित्सा क्षेत्र में अपने अनुसंधान और विकास को मजबूत करने के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य करने की क्षमता का निर्माण करेगा। मुझे आप सभी को यह बताते हुए भी प्रसन्नता हो रही है कि सोवा रिग्पा पर एक नया केंद्र जल्द ही अरुणाचल प्रदेश में स्थापित किया जाएगा।संस्थान वैज्ञानिक रूप से दस्तावेज़, रिकॉर्ड, अनुसंधान के साथ-साथ पूर्वोत्तर की लोक चिकित्सा को मान्यता प्रदान करने की दिशा में भी काम कर रहा है। संस्थान में क्षमता विस्तार में एक शैक्षणिक भवन, लड़कों और लड़कियों के लिए छात्रावास, स्टाफ क्वार्टर के साथ-साथ निदेशक का बंगला भी शामिल है। छात्रावास में संस्थान के 70 छात्र और 70 छात्राएं रह सकेंगी यह निवेश आने वाले समय में आयुर्वेद में स्नातक पाठ्यक्रम, बैचलर ऑफ आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएएमएस) के साथ-साथ स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में गुणवत्ता प्रदान करने के लिए आयुर्वेद कॉलेज खोलने के लिए अतिरिक्त बुनियादी ढांचे के विकास को पूरा करेगा। पूर्वोत्तर आयुर्वेद और लोक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (एनईआईएएफएमआर), पासीघाट में नया आयुर्वेद महाविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार सेवाओं के माध्यम से आयुर्वेद को प्रोत्साहित और विकसित करेगा। इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स (इंडिया) लिमिटेड, भारत सरकार का उद्यम, इस परियोजना के लिए निष्पादन एजेंसी है।

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री, पेमा खांडू ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा, हमें बहुत प्रसन्नता हो रही है कि अरुणाचल प्रदेश की एक संस्था – पूर्वोत्तर आयुर्वेद और लोक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (एनईआईएएफएमआर)पूर्वोत्तर की लोक चिकित्सा की समृद्धि का उपयोग करने की दिशा में काम कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रेरक नेतृत्व मेंसंस्थान की क्षमता का विस्तार किया जा रहा हैजो  केवल क्षेत्र की पारंपरिक चिकित्सा में सहायता करेगाबल्कि रोगी देखभाल में व्यापक अनुप्रयोग के लिए हमारी सदियों पुरानी लोक चिकित्सा को अपनी पारंपरिक भौगोलिक पहुंच से अलग वैज्ञानिक तरीके से प्रलेखित करने का भी अवसर है,मोदी जी ने सदैव भारत की पारंपरिक चिकित्सा के कायाकल्प पर बल दिया है क्योंकि इसने विभिन्न बीमारियों के उपचार और बेहतर जीवन अनुभव को सक्षम करने में अपनी प्रभावशीलता सिद्ध की है,इस क्षेत्र में औषधीय पौधों की समृद्ध विविधता हैजिसमें फार्मास्युटिकलआयुर्वेदिक और सुगंधित क्षेत्रों के लिए बड़ी व्यावसायिक संभावनाएं हैंजो राज्य के साथसाथ पूर्वोत्तर के लिए भी व्यावसायिक मार्ग खोल रही हैं।

श्री सर्बानंद सोनोवाल ने पूर्वोत्तर आयुर्वेद और लोक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (एनईआईएएफएमआर) की भूमिका के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के अंतर्गतसरकार आयुर्वेदयोगयूनानीसिद्धहोम्योपैथीसोवा रिग्पा और प्राकृतिक चिकित्सा जैसी दवाओं के पारंपरिक रूप को फिर से जीवंत करने की दिशा में काम कर रही  जैसे-जैसे देश आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रहा हैआयुष मंत्रालय हमारी समृद्ध पारंपरिक औषधीय प्रणाली को चिकित्सा विज्ञान के फार्मास्युटिकल और रोगी देखभाल क्षेत्रों में व्यापक उपयोग के लिए वैज्ञानिक मान्यता के साथ सक्षम करने की दिशा में लगातार काम कर रहा हैइससे  केवल हमारे पारंपरिक चिकित्सक समुदाय को लाभ होगा बल्कि लोक चिकित्सा के दायरे का भी विस्तार होगाजिससे यह अधिक संख्या में लोगों तक पहुंच कर उन्हें स्वस्थ कर सकेगा और उनके जीवन को समृद्ध बना सकेगपूर्वोत्तर आयुर्वेद और लोक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (एनईआईएएफएमआरभारत का एक अग्रणी संस्थान है जो इस क्षेत्र की लोक चिकित्सा का कायाकल्प करने की दिशा में समर्पित रूप से काम कर रहा आयुर्वेद की हमारी समृद्ध विरासत स्थानीय समृद्ध पारंपरिक औषधीय पद्धतियों से भी विकसित हो सकती है। इस विचार के साथसंस्थान ने रोगी देखभाल समाधानों की एक विस्तृत श्रृंखला के साथ और अधिक कायाकल्प करने के लिए आयुर्वेद को सम्मिलित किया। इसके प्रयासों को और प्रोत्साहन देने के लिएहम इस संस्थान को लोक चिकित्सा के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।पूर्वोत्तर आयुर्वेद और लोक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (एनईआईएएफएमआर), पासीघाट की स्थापना पूर्वोत्तर पर विशेष ध्यान देने के साथ पारंपरिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को मजबूत करने और विकसित करने के लिए की गई थी। यह स्थानीय स्वास्थ्य परंपराओं (एलएचटी) और जातीय औषधीय प्रथाओं (ईएमपी) के सभी पहलुओं के लिए शीर्ष अनुसंधान केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है। संस्थान मानव जीवन को समृद्ध बनाने की दिशा में पारंपरिक चिकित्सा की प्रभावशीलता को वैज्ञानिक रूप से साबित करने और मान्यता प्रदान करने के लिए पारंपरिक चिकित्सकों, आयुर्वेदिक शोधकर्ताओं के साथ-साथ वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक साझा आधार के रूप में भी काम कर रहा है।सरकार का लक्ष्य पूर्वोत्तर आयुर्वेद और लोक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (एनईआईएएफएमआर), पासीघाट में क्षेत्रीय कच्ची औषधि भंडार (आरआरडीआर) और संग्रहालय, परिष्कृत विश्लेषणात्मक उपकरण सुविधा (एसएआईएफ), अत्याधुनिक पंचकर्म उपचार और अनुसंधान केंद्र, पैरामेडिकल शिक्षण केंद्र आदि जैसे बुनियादी ढांचे के साथ भविष्य में पूर्वोत्तर आयुर्वेद और लोक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (एनईआईएएफएमआर) को और मजबूत करना है।

 

 

व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें 

स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे

Donate Now

[responsive-slider id=1466]
error: Content is protected !!