विकसित भारत एक नारा नहीं,भारत की अगले 25 वर्षों की यात्रा है : विदेश मंत्री एस.जयशंकर।
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अंतरराष्ट्रीय दबावों में नहीं झुकना बन गया है भारत का स्वभाव ,आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति : विदेश मंत्री एस. जयशंकर। हंसराज कॉलेज के 75 वर्ष पूर्ण होने पर हंसराज कॉलेज की प्राचार्य प्रो. रमा ने विदेश मंत्री को किया “ महात्मा हंसराज गौरव सम्मान” से सम्मानित। नई दिल्ली-दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हंसराज कॉलेज में विकसित भारत 2047 की संकल्पना विषय पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 600 चयनित युवाओं से संवाद किया . यह कार्यक्रम हंसराज कॉलेज की सिविल सेवा समिति निष्ठा द्वारा आयोजित किया गया . विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि “विकसित भारत” सिर्फ एक नारा नहीं ,भारत के भविष्य के प्रति एक गंभीर प्रतिबद्धता है.जयशंकर ने अपने संबोधन की शुरुआत दर्शकों से “विकसित भारत” की गंभीरता को समझने का आग्रह करते हुए की, “कृपया यह न सोचें कि यह एक नारा है.यह बहुत गंभीर बात है जिसके बारे में हम बात कर रहे हैं.”भविष्य पर ध्यान केंद्रित करते हुए, जयशंकर ने स्पष्ट किया, “फिलहाल जिस मुद्दे पर हम सभी ध्यान दे रहे हैं वह भविष्य है.मैं आज आपसे अगले 25वर्षों के बारे में बात करना चाहता हूं
जो आपका भविष्य है, हमारा अमृत काल है.विकसित भारत की हमारी यात्रा अगले 25 वर्षों की वास्तविकता है .जयशंकर ने टिप्पणी की, “मैं आज महसूस कर सकता हूं कि हम कुछ बहुत बड़े बिंदु पर हैं.
दुनिया भी हमें देख रही है.मैं इन 25वर्षों को नए अवसरों, नई प्रौद्योगिकियों और नई चुनौतियों की अवधि के रूप में देखता हूं.”प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी क्षमता पर चर्चा करते हुए, जयशंकर ने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारे जीवन को बदल देगी।
हम आज वास्तव में स्व-चालित कारों के बारे में बात कर रहे हैं.हम ड्रोन पर विचार कर रहे हैं, जो अब एक वास्तविकता बन गई है.”भारत की महत्वाकांक्षा पर जोर देते हुए, जयशंकर ने घोषणा की, “भारतीयों को नंबर 2बनना पसंद नहीं है,
लेकिन हम दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होंगे.”कोविड-19महामारी पर भारत की प्रतिक्रिया पर विचार करते हुए, जयशंकर ने याद किया, “जनवरी 2020 में कोविड के दौरान, जी20की एक बैठक हुई जहां उन्होंने कहा कि एक देश जो इससे बच नहीं सकता वह भारत होगा।
कार्यक्रम में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, भारत की छवि मित्रतापूर्ण लेकिन निष्पक्ष है। अगर आप आतंकवाद जैसी चुनौती को देखें, तो दुनिया मानती है कि आज का भारत आतंकवाद से बहुत अलग तरीके से निपटता है।
इसकी तुलना बहुत सरल है, मुंबई हमलों के बाद क्या हुआ और उरी तथा बालाकोट हमले के बाद में क्या हुआ। विदेश मंत्री एस. जयशंकर बोले, हम पर रूस से तेल न खरीदने का अंतरराष्ट्रीय दबाव था। भारत ने कहा कि हमारे हितों के लिए यह आवश्यक है
कि हम तेल खरीदें और हमने इसे छिपाया नहीं।
इसके बारे में हम बहुत खुलकर और ईमानदारी के साथ बहुत ही साहसी तरीके से निर्णय लिया। आज विश्व में भावना यह है कि भारत एक दृढ़ देश है लेकिन यह एक निष्पक्ष देश भी है।वहीं भारत में डिजिटल ट्रांजेक्शन को लेकर विदेश मंत्री ने कहा,
आज भारत कितना डिजिटल हो गया है। आज आप में से कितने लोग नकदी का उपयोग करते हैं? आप में से कितने लोग अपने फोन-आधारित कैशलेस भुगतान का उपयोग करते हैं? उन्होंने कहा कि भारत में,
हम प्रति माह 10-11 बिलियन कैशलेस लेनदेन करते हैं। अमेरिका एक वर्ष में 4 बिलियन कैशलेश लेन देने करता है। चीन एक वर्ष में अधिकतम 20 बिलियन डिजिटल ट्रांजेक्शन करता है।
आज लोग हर चीज के लिए डिजिटल माध्यम से पेमेंट कर रहे हैं चाहे वो ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना हो, पासपोर्ट की फीस जमा करनी हो या कुछ और सभी जगह डिजिटल माध्यम से लेन देन के कारण भ्रष्टाचार बहुत हद तक कम हो गया है
क्योंकि अब सब कुछ डिजिटल रूप से रिकॉर्ड किया जाता है, इससे पारदर्शिता के साथ ईमानदारी भी आती है। कार्यक्रम की अध्यक्ष और हंसराज कॉलेज की प्राचार्य प्रो. रमा द्वारा महात्मा हंसराज के जीवन पर लिखित पुस्तक का विमोचन भी इस अवसर पर उन्होंने किया।
प्रो. रमा ने कहा की हम विदेश मंत्री को देखकर यह समझ सकते हैं कि भारत ने हर बात पर झुकना अब छोड़ दिया है . कार्यक्रम के संयोजक डॉ. प्रभांशु ओझा , निष्ठा समिति के अध्यक्ष अश्वमेघ सिंह ,
कार्यक्रम की संचालिका डॉ. श्रेया मलिक, वरिष्ठ प्राध्यापक एवं कॉलेज एलुम्नाई भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
भारत की वैश्विक छवि अनवरत सशक्त करने हेतु विदेश मंत्री को कॉलेज प्राचार्य
एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. प्रभांशु ओझा द्वारा “महात्मा हंसराज गौरव सम्मान ” से सम्मानित किया गया।
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