राष्ट्रपति ने शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए।
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राष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी समाज में महिलाओं की स्थिति उसके विकास का एक महत्वपूर्ण मानदंड है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों और अभिभावकों की यह जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को इस तरह से शिक्षित करें कि वे हमेशा महिलाओं की गरिमा के अनुरूप व्यवहार करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं का सम्मान केवल ‘शब्दों’ में नहीं बल्कि ‘व्यवहार’ में भी होना चाहिए।
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के विचारों के अनुसार, यदि कोई शिक्षक स्वयं निरंतर ज्ञान अर्जित नहीं करता है, तो वह सही मायने में बच्चों का शिक्षण नहीं कर सकता है। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी शिक्षक ज्ञान अर्जित करने की प्रक्रिया को जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से उनका शिक्षण अधिक प्रासंगिक और रोचक बना रहेगा।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने समारोह में मौजूद शिक्षकों से कहा कि उनके छात्रों की पीढ़ी एक विकसित भारत का निर्माण करेगी। उन्होंने शिक्षकों और छात्रों को वैश्विक मानसिकता और विश्व स्तरीय कौशल हासिल करने की सलाह दी। राष्ट्रपति ने कहा कि महान शिक्षक ही महान राष्ट्र का निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा कि केवल विकसित मानसिकता वाले शिक्षक ही ऐसे नागरिक बना सकते हैं जो एक विकसित राष्ट्र का निर्माण करेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छात्रों को प्रेरित करके हमारे शिक्षक भारत को दुनिया का ज्ञान केंद्र बनाएंगे।
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