इससे मेडिकल और नर्सिंग कॉलेज की संख्या और नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर उपलब्धता में असमानताएं दूर हुई हैं। नतीजतन, भारत एक सक्षम स्वास्थ्य कार्यबल तैयार करने के लिए तैयार है जो राष्ट्रीय और वैश्विक दोनों जरूरतों को पूरा करता है।श्रीमती पुण्य ने जोर देकर कहा कि सरकारी प्रयासों से भारत में स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता, पैमाने और लागत-प्रभावशीलता में उत्तरोत्तर सुधार हुआ है। उन्होंने कहा, “यह हमारी विस्तारित स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमाण है कि आउट-ऑफ-पॉकेट व्यय (ओओपीई), जो पूरी तरह से परिवारों द्वारा वहन किया जाता है, 2013-2014 और 2021-22 के बीच कुल स्वास्थ्य व्यय के हिस्से के रूप में 25 प्रतिशत अंकों की गिरावट आई है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में मजबूत भारत-अमेरिका साझेदारी पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि “निगरानी, महामारी से निपटने की तैयारी और रोगाणुरोधी प्रतिरोध के क्षेत्र में हमारी पारस्परिक और साझा प्राथमिकताएं राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) और यूएस रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के बीच गहरी साझेदारी में रेखांकित की गई हैं।” उन्होंने कहा, “भारत यूएस सीडीसी के सहयोग से आयोजित एनसीडीसी और आईसीएमआर फील्ड महामारी विज्ञान प्रशिक्षण कार्यक्रम (एफईटीपी) की सराहना करता है। हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अब तक 200 से अधिक एपिडेमिक इंटेलिजेंस सर्विसेस (ईआईएस) के अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है और वर्तमान में 50 अन्य विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।”भारत और अमेरिका ने बायो-5 गठबंधन के माध्यम से बायोफार्मास्युटिकल आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को अनुकूलतम बनाने और मजबूत बनाने तथा एकल-स्रोत आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने के लिए एक संयुक्त रणनीतिक रूपरेखा आरंभ करने पर भी सहमति व्यक्त की है।2023 में, भारत के प्रधानमंत्री और अमेरिका के राष्ट्रपति ने कैंसर के खिलाफ लड़ाई को तेज करने के लिए प्रतिबद्धता जताई, जिसके परिणामस्वरूप अगस्त में अमेरिका-भारत कैंसर मूनशॉट वार्ता का उद्घाटन हुआ। श्रीमती पुण्य ने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस पहल का उद्देश्य अमेरिका-भारत जैव चिकित्सा अनुसंधान सहयोग को बढ़ाना है, विशेष रूप से सर्वाइकल कैंसर पर ध्यान केंद्रित करना। इसमें एम्स और टाटा मेमोरियल अस्पताल जैसे संस्थानों के साथ भागीदारी शामिल है और यह क्वाड कैंसर मूनशॉट पहल के रूप में विकसित हुई है। उन्होंने कहा कि “भारत के ‘एक विश्व, एक स्वास्थ्य’ के दृष्टिकोण को दर्शाते हुए, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कैंसर परीक्षण और निदान के लिए 7.5 मिलियन डॉलर का अनुदान समर्पित किया गया है। भारत इस क्षेत्र में रेडियोथेरेपी और कैंसर की रोकथाम के प्रयासों का भी समर्थन करेगा, इन सेवाओं की ज़रूरत वाले कई देशों की सहायता के लिए GAVI और क्वाड कार्यक्रमों के तहत 40 मिलियन वैक्सीन खुराक का योगदान देगा।”श्रीमती पुण्य ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा में भारत-अमेरिका साझेदारी साझा स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोगात्मक प्रयासों का उदाहरण है। भारत-अमेरिका स्वास्थ्य वार्ता जैसी पहलों ने रोग निगरानी, महामारी की तैयारी और रोगाणुरोधी प्रतिरोध में ठोस परिणाम दिए हैं। हाल ही में अमेरिका-भारत कैंसर वार्ता जैसे संयुक्त प्रयास भारत-प्रशांत क्षेत्र में जैव चिकित्सा अनुसंधान और कैंसर की रोकथाम को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
उन्होंने अपने संबोधन का समापन यह कहते हुए किया कि “भविष्य की ओर देखते हुए, भारत और अमेरिका अनुसंधान, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण को प्राथमिकता देकर वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को और मजबूत कर सकते हैं। सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देकर और सहयोगी वैक्सीन पहलों का विस्तार करके, दोनों देश स्वास्थ्य परिणामों में सुधार कर सकते हैं”। उन्होंने आगे कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के दर्शन से प्रेरित होकर, भारत इस बात पर जोर देता है कि वैश्विक सुरक्षा सामूहिक प्रयासों पर निर्भर करती है, जिसका लक्ष्य समावेशी विकास और साझा कल्याण है।