गीता ज्ञान मानव जीवन को सफलता की सीढ़ी पर अग्रसर करता है।
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भीनमाल– “मानव जीवन में भोजन, दिनचर्या, वाणी, व्यवहार, संबंधों को निभाने की कला,योग साधना सब कुछ जिसमें समय हुआ है वो है श्रीमद भागवत गीता” यह बात स्थानीय वाराह श्याम मंदिर सत्संग हॉल में गीता जयंती उत्सव कार्यक्रम में मुख्य उद्बोधन देते हुए राजयोगिनी डॉ गीता बहन ने सुनाई। आपने 18 अध्याय और 700 श्लोकों की भागवत गीता को सर्व उपनिषदों का सार बताया। मनुष्य को कर्म करते समय फल की अपेक्षा से उपराम रहकर निष्ठा से कर्म करना चाहिए। अपने मन को नियंत्रित कर, योग साधना में रात रहने से ही कम क्रोध आदि मनोविकार को शांत कर सकते है। कार्यक्रम का आगाज दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। आदर्श विद्या मंदिर के छात्रों द्वारा गीता के समस्त अध्यायों के सार का संस्कृत में पाठ किया गया। ब्रह्माकुमारी राजयोग केंद्र भीनमाल के तत्वावधान में भागवत गीता जयंती का आयोजन वाराह श्याम मंदिर ट्रस्ट के सौजन्य से 11 दिसंबर, मार्गशीर्ष शक्ल पक्ष एकादशी को कल किया गया। जिसमें श्री कृष्ण के द्वारा अर्जुन को गीता ज्ञान की सुंदर चैतन्य झांकी भी रखी गई। अंत में गुमानसिंह जी राव, श्याम जी खेतावत ने भी सबको संबोधित कर गीता जान को आत्मसात करने की बात कही। गीता आरती और प्रसाद वितरण में सबने उत्साह पूर्वक भाग लिया।
आयोजन में नैनाराम चौहान, अशोक कुमार,
सोनतमत परमार, नवरत्न अग्रवाल, शानू बहन, उगम बहन, लीला बहन, कमला सोनी,
बी के कीर्ति , बीके अंजलि, बीके मुकेश ,टीना अग्रवाल समेत 150 जितने लोगों ने शिरकत की।
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