“ऑपरेशन नर-नारायण”-सुरा-सुन्दरी-शादी-सम्पति-सत्ता-संघर्ष सनक के सतरंगी सरगम का सरताज, 50 हजार रूपये का ईनामी कुख्यात अपराधी सलाखों के साये में।
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साइक्लोनर सेल का एक ओर धमाका ऑपरेशन “नर नारायण” को सफलतापूर्वक दिया अंजाम।
जोधपुर-श्री विकास कुमार, महानिरीक्षक पुलिस, जोधपुर रेंज, जोधपुर ने बताया कि साईक्लोनर सेल टीम की ताबडतोड सफलताओं की श्रृखला की अगली कडी में एक ओर कुख्यात वांछित ईनामी अपराधी बद्रीराम पुत्र गंगाराम, निवासी सुरपुरा खुर्द, थाना भोपालगढ को लम्बी जद्दोजहद के उपरान्त गिरफ्तार करने में सफलता अर्जित की हैं।
कार्यवाही का विवरणः
कुख्यात बद्रीराम के गिरफ्तारी हेतु 50 हजार रूपये का ईनाम घोषित था।अपराध की दुनिया में सिल्वर जुबली मना कर 25 वर्षों तक जरायम करता रहा अपराधी 25 महिनों से पुलिस की गिरफ्त से बच घूम रहा था।
➤ वर्ष 1998 से अपराध की दुनिया में कदम रखकर 2023 तक ताबडतोड अपराध करता रहा बद्रीराम।कुल 6 जिले में बद्रीराम के अपराधों की जद में रहे हैं।चोरी, नकबजनी, वाहन चोरी, शराब तस्करी, मारपीट, हत्या का प्रयास, पुलिस पर हमला, बलात्कार जैसे संगीन अपराधों में लिप्त रहा है बद्रीराम।मंदिरों में चोरी करने का विशेष शौकीन था बद्रीराम।खिन्दाकौर मंदिर, बापिणी मंदिर, पूनासर मंदिर, कई-कई बार शिकार हुए बद्रीराम की चोरी की सनक के।अपराध की गोल्डन जुबली मनाने के करीब पहुंच चुका बद्रीराम 44 अपराध कारित कर चुका है अब तक।
जीवनवृतः बडी मुश्किल से 10वीं पास करके भाईयों के साथ आवारागर्दी की संगत में पड गया बद्रीराम।
➤ चचेर भाई की शादी के लिये चार भाईयों ने मिलकर कॉपरेटिव सोसायटी में पहली बार चोरी की।एक बार सफल होने के बाद चोरी का ऐसा चस्का लगा कि कई जिलों में कहर बरपाना शुरू कर दिया बद्रीराम व उसके भाईयों की गैंग ने।
➤ विशेष रूप से मंदिरों पर धावा बोलकर ज्यादा भाता था बद्रीराम को।साइक्लोनर की योजना रंग लायी एवं कल दिन में वर्कशॉप में गाडी घुलवाने आया बद्रीराम साइक्लोनर के हत्थे चढ़ गया।
ऑपरेशन का नामः बद्रीराम के नाम के अनुरूप ऑपरेशन का नाम नर नारायण रखा गया। नर और नारायण दो पहाडियों के मध्य अवस्थित है बद्रीनाथ का पवित्र मंदिर। नर की विषय वासना ओर नारायण की साधना शोध के मध्य झूलता रहा बद्रीराम का जीवन । अतः नर व नारायण को मिलाकर ऑपरेशन का नाम नर-नारायण रखा गया।
कार्यवाही टीम का विवरणः रेंज स्तरीय साईक्लोनर टीम के उपनिरीक्षक पुलिस श्री कन्हैयालाल, श्री प्रमीत चौहान, श्री नेमाराम, श्री देवाराम, हैड कानि श्री गजराज, कानि. श्री अशोक परिहार, श्री झूमर, श्री मुकनसिंह शामिल रहे।ऑपरेशन में श्री अशोक परिहार कानि साईक्लोनर सेल की तकनीकी एवं मानवीय आसूचना में मुख्य भूमिका रही है।
शाबाशी : श्री विकास कुमार, महानिरीक्षक पुलिस, जोधपुर रेंज, जोधपुर ने बताया कि उक्त कार्रवाई में शामिल समस्त टीमों को विशेष कार्यक्रम के दौरान जोधपुर रेंज कार्यालय में सम्मानित किया जाएगा।Press Note Ops Nar-Narayan 05.03.2025
अपील –महानिरीक्षक पुलिस श्री कुमार द्वारा बताया कि किसी भी आमजन को किसी भी अपराधी या अन्य सूचना जो कि अपराधी से संबंधित है, उसे रेंज पुलिस नियंत्रण कक्ष (संजय) नम्बर 0291-2650811 एवं वाट्सएप नंबर 9530441828 पर सूचना दी जा सकती है। उक्त सूचना देने वाले व्यक्ति की गोपनीयता का पूर्ण रूप से ख्याल रखा जाएगा। > कई बार पकडा जाता रहा, कुछ महीने जेल की हवा खाता रहा और फिर आकर उसी धंधे में लगा रहा बद्रीराम।छोटे-छोटे पैसों से मन भरा बद्रीराम का। बड़े-बडे शौक विशेषकर लड़कीबाजी एवं वैश्यावृति की लत के लिए पैसे कम पड़ने लगे। बीसियों चोरियों करने के बाद मन उब गया तो बड़ा हाथ आजमाने की सूझी।बड़े पैसे कमाने के लिए अवैध शराब के धंधे में कूद पडा बद्रीराम हरियाणा से शराब लाकर गुजरात आपूर्ति के धंधे में गुजरात हरियाणा राजस्थान में गहरी पैठ जमा ली।
> यहां भी पकड़ में आकर जेल की हवा खानी पड़ी। जेल में ही कई कुख्यात अपराधियों के सम्पर्क में आकर सपने हिलोरे भरने लगे तो जेल तोड़कर भाग निकला बद्रीराम।
➤ पिता का पुत्र के प्रति अतिशय प्रेम भी बद्रीराम के लिए कहर का कोप साबित होता रहा।जब तक पिता जिन्दा रहे, हर बार जमानत कराते रहे, बद्रीराम हमेशा अपराध की दुनिया से तोबा करने के वादे करते रहा पर रंगीन मिजाजी और लड़कियों का शौक वापस अपराध की दुनिया में खींचता रहा उसे।
➤ पिता की मृत्यु के बाद बड़ा सहारा टूट गया बद्रीराम का। भाईयों ने मुंह मोड़ा तो ससुराल वालों की शरण में जाकर खनन के धंधे में लग गया ब्रदीराम।खनन के धंधे में तेजी से पैसे आने लगे तो सता सुख की चाह जगी। माँ को सरपंच के चुनाव में उम्मीदवार बनाकर सता के अखाडे में दाव आजमाने लगा बद्री। सफलता तो कम ही हासिल हो पायी, दुश्मनियों बढ़ती गयी।इधर इश्कबाजी व रंगीन मिजाजी का खेल परवान चढ़ता रहा। ऐसे ही किसी शौक के चक्कर में बलात्कार व पोक्सो एक्ट का प्रकरण दर्ज हुआ तो फरार होने का विकल्प चुना बद्रीराम ने।
पकड़े जाने की कथाः रंगीन मिजाजी ने फरार किया तो शरीर, सत्ता व सम्पति के प्रति विरक्ति जगी तो सात्विकता और साधना की खोज करने लगा बद्रीराम।विडम्बना देखिये कि जिन मंदिरों में कल तक अपराध करता था बद्रीराम अब उन्हीं मन्दिरों-मठों में शांति सुकून की तलाश करने लगा।फरारी अवधि में महीनों बागेश्वर धाम में 100 रूपये बेड की दर से समागम में बैठकर पर्ची का इतंजार किया तो कभी महीने भर बृन्दावन के मदिरों में धोक देता रहा। पिछले एक महीने में कुंभ में धूनी जमाकर बैठा रहा बद्रीराम। साधना व सात्विकता के शोध पर बहुधा शरीर की भूख व विषय वासना भारी पड़ती रही।महिला मित्रों का मोह नहीं छूट पाया बद्रीराम से। महीने दो महीने पर अपनी कई सारी महिला मित्रों से मिलने आता रहता था बद्रीराम।दो दिन पहले भी साधना के सत्संग से शरीर सुख के चक्कर में उटाम्बर इलाके में बद्रीराम पहुंचा।एक महिला मित्र बीमार मिली तो दूसरे की टोह में घूमता रहा वो।साइक्लोनर टीम महिला मित्रों पर नजर गड़ाये इंतजार में थी बद्रीराम। चालाक बद्रीराम फिर भी गच्चा देने में सफल होता रहा। बद्रीराम की एक सनक ले डूबी उसे महिला मित्र के पास जाने से पहले बढ़िया कपड़े पहनने व धुली धुलाई लक्जरी गाडी में जाकर प्रभावित करने की सनक से ग्रस्त था बद्रीराम।उटाम्बर जाने से पहले ओसियां के एक वर्कशॉप में अपनी ब्रेजा गाड़ी अच्छे से धुलाई उसने। साइक्लोनर सेल को अंदाजा था कि ग्रामीण कच्चे पक्के सड़क पर चलने के कारण गाडी गंदी होने पर वापस गाडी धुलवाकर ही नयी महिला मित्र के पास जायेगा बद्रीराम। उसी अनुसार वर्कशॉप के आसपास घेरा डाला गया।
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