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कल्पसूत्र का विधि पूर्वक श्रवण करने से मोक्ष प्राप्त होता है वीर प्रभु का जन्मोत्सव मनाया जायेगा आज

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भीनमाल। पर्वाधिराज पर्युषण पर्व में कल्पसूत्र का विधि पूर्वक श्रवण करने से सात भवों के बाद मोक्ष प्राप्त होता है। जैन साध्वी नयन पद्म म. सा. ने स्थानीय महावीर स्वामी जैन मंदिर स्थित आराधना भवन जैन धर्मशाला प्रांगण में पर्युषण महा पर्व के चौथे दिन  शनिवार को कल्पसूत्र का वांचन प्रारम्भ किया।                   इससे पहले कल्पसूत्र ग्रंथ की पूजा-आराधना की गई तथा जैन साध्वी को चढावे के लाभार्थी विमला सुरेश बोहरा परिवार द्वारा व्योराया गया। इसका वांचन करते हुए जैन साध्वी ने श्रद्धालुओं को साधु-साध्वी तथा श्रावक-श्राविकाओं के आचार-विचार कैसे होने चाहिये, उस पर भगवान महावीर सहित सभी 24 तीर्थंकरों की संक्षिप्त जीवनी से अवगत कराया ।               इसके मनन पूर्वक श्रवण करने से श्रद्धालुओं के जीवन में अनेक निखार आता है । उनका जीवन निर्मल बनता है । पर्युषण महापर्व जैनों का एक सर्व मान्य धार्मिक पर्व है । इसे प्रायः सभी जैन सम्प्रदाय बडी श्रद्धा-भक्ति पूर्वक मनाते है ।              कल्पसूत्र के आठ वांचन होते है । लगातार चार दिन तक दोनों समय सुबह तथा दोपहर को सैकडों श्रद्धालुओं के समक्ष इसका वांचन होता है । ऋषि पंचमी का सम्बन्ध तथा ऋषि पंचमी की मान्यता का भी विशेष उल्लेख किया गया । महावीर प्रभु के सत्ताईस भव तथा वीर प्रभु के पांच कल्याणक का भी वर्णन इसमें किया गया है । कल्पसूत्र में पुरूषों तथा स्त्रियों के सभी कलाओं का भी वर्णन किया गया है ।
स्थानीय महावीर स्वामी जैन मंदिर स्थित आराधना भवन में आयोजित चातुर्मास के प्रवक्ता माणकमल भण्डारी ने बताया कि रविवार को दोपहर में धर्मशाला परिसर में वीर प्रभु का जन्मोत्सव धुम-धाम से मनाया जायेगा। इसके बाद में धर्मशाला प्रांगण से ही एक भव्य शोभा-यात्रा निकाली जायेगी। जो शहर के प्रमुख मार्गो से होकर पुनः धर्मशाला प्रांगण में आकर समाप्त होगी । प्रतिदिन की भांति रात्रि को प्रभु अंग रचना में मनमोहक आंगी की गई, जिसका सैकडों लोगों ने दर्शन-वंदन का लाभ लिया ।                            साभार :- श्री माणकमल भण्डारी (वरिष्ठ पत्रकार)

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