डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने सत्य स्वाभिमान एवं राष्ट्र के लिए जीवन का बलिदान दिया – के के विश्नोई।
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भीनमाल-भारतीय जनता पार्टी जिला जालोर की डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी बलिदान दिवस एवं आपातकाल (काला दिवस ) पर जिला संगोष्ठी का आयोजन प्रभारी मंत्री के के विश्नोई, प्रदेश मंत्री आईदान भाटी, मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग एवम् भाजपा जिलाध्यक्ष जसराज राजपुरोहित के मुख्य आतिथ्य में भीनमाल के माली धर्मशाला में आयोजित हुई ।प्रभारी मंत्री के के विश्नोई ने कहा कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने सत्य, स्वाभिमान एवं राष्ट्र हित के लिए जीवन का बलिदान दिया ।डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी एक महान देशभक्त शिक्षाविद, एवं राजनेता थे जिन्होंने भारत की एकता और अखंडता के लिए अपना जीवन समर्पित किया ।डॉ. मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कलकत्ता में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा कोलकाता विश्वविद्यालय से प्राप्त की और 33 वर्ष की आयु में कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति बने।डॉ. मुखर्जी ने राजनीति में प्रवेश किया और भारतीय जनसंघ की स्थापना की। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाने के लिए काम किया।प्रदेश मंत्री आईदान सिंह भाटी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने 23 जून 1953 को जम्मू-कश्मीर में बिना परमिट के प्रवेश करने के कारण गिरफ्तारी दी और रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई।मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने डॉ. मुखर्जी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण भारत माता के चरणों में अर्पित किया। 20वीं सदी में जब सत्ता मौन थी, तब डॉ. मुखर्जी ने बलिदान की गूंज से राष्ट्र को एकसूत्र में बांधने का कार्य किया।भारतीय संस्कृति की पुनर्स्थापना के लिए अपने जीवन को समर्पित कर दिया।भाजपा जिलाध्यक्ष जसराज राजपुरोहित ने कहा कि डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी के बलिदान को संपूर्ण देश नमन करता है एवं हम सभी आज इनके बलिदान दिवस पर श्रद्धासुमन अर्पित करते है ।25 जून 1975 को भारत में आपातकाल की घोषणा की गई थी, जिसे काला दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को लोकतंत्र के लिए काला दिन माना जाता है क्योंकि इस दौरान नागरिकों के अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था और प्रेस की स्वतंत्रता पर रोक लगा दी गई थी। आपतकाल दिवस देश के लिए शर्मनाक है तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राष्ट्रपति से आपातकाल की घोषणा करवाई थी। आपातकाल के दौरान नागरिकों के अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था और प्रेस की स्वतंत्रता पर रोक लगा दी गई थी।
विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को बड़े पैमाने पर गिरफ्तार किया गया था। आपातकाल ने भारतीय लोकतंत्र की परीक्षा ली और इसके दूरगामी प्रभाव हुए।आपातकाल के दौरान नागरिकों की आजादी छीन ली गई थी और उन्हें अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ा। आज भी आपातकाल की यादें ताजा हैं और यह दिन लोकतंत्र के लिए काला दिन माना जाता है।बलिदान दिवस एवं आपतकाल दिवस संगोष्ठी में प्रभारी मंत्री के के विश्नोई, मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग,प्रदेश मंत्री आईदानसिंह भाटी सांसद लुंबाराम चौधरी,
प्रदेश मंत्री सांवलाराम देवासी, जिलाध्यक्ष जसराज राजपुरोहित, विधायक जीवाराम चौधरी पूर्व विधायक नारायण सिंह देवल, पूर्व विधायक पूराराम चौधरी, पूर्व विधायक रामलाल मेघवाल,भूपेंद्र देवासी,जिलासंयोजक पुखराज राजपुरोहित,
सहसंयोजक भरतसिंह भोजानी, महामंत्री प्रकाश छाजेड़, हरीश राणावत, पूर्व जिला प्रमुख बन्नेसिंह गोहिल, मंगलसिंह सिराणा, मुकेश खंडेलवाल,
शेखर व्यास, जालोर विधानसभा संयोजक महेंद्रसिंह आहोर विधानसभा संयोजक बिशनसिंह, भीनमाल विधानसभा संयोजक महेंद्र सोलंकी,
रानीवाड़ा विधानसभा संयोजक सांचौर विधानसभा संयोजक हनुमान प्रसाद भादू सहित जिला पदाधिकारी , मंडल अध्यक्ष , पदाधिकारी भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे ।
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