स्पोर्ट्स सिटी भूमि आवंटन एवं द एरीना प्रोजेक्ट – गृह खरीदारों का न्याय हेतु लंबा संघर्ष।
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नोएडा -प्राधिकरण द्वारा 24 अक्टूबर 2011 को सेक्टर-79 स्थित स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट संख्या SC-01/A को 90 वर्ष की लीज़ पर आवंटित किया गया। 19 अक्टूबर 2012 को इसका एक हिस्सा एरीना सुपरस्ट्रक्चर्स प्रा. लि. को ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट और स्पोर्ट्स सिटी इन्फ्रास्ट्रक्चर हेतु सब-लीज़ किया गया। तत्पश्चात 29 अप्रैल 2014 को प्राधिकरण द्वारा लेआउट मैप को स्वीकृति दी गई।
खरीदारों के साथ धोखाधड़ी
एरीना ने वर्ष 2014 से इस परियोजना की बुकिंग प्रारंभ कर लगभग 1,300 से अधिक परिवारों से धन एकत्र किया। कब्ज़ा 42+6 माह में देने का वादा किया गया, किंतु निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ा। खरीदारों से प्राप्त ₹349 करोड़ में से ₹113.45 करोड़ अन्य पक्षों को डायवर्ट कर दिए गए तथा मात्र ₹1 लाख की हिस्सेदारी होने के बावजूद पूरे प्रोजेक्ट को ₹235 करोड़ के ऋण हेतु गिरवी रख दिया गया।
कानूनी व नियामकीय कार्रवाइयाँ
खरीदारों द्वारा लगातार शिकायतों के परिणामस्वरूप 2019 से आपराधिक मामले दर्ज हुए तथा 2022 में ईओडब्ल्यू द्वारा चार्जशीट दाखिल की गई। परियोजना के अधूरे रहने पर 29 अक्टूबर 2020 को यह आईबीसी के अंतर्गत सीआईआरपी में भेजी गई। विभिन्न योजनाओं के परीक्षण के बाद खरीदारों ने पुरवंचल प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. की रेज़ोल्यूशन योजना को समर्थन दिया। 9 जुलाई 2023 को माननीय एनसीएलटी ने इस योजना को स्वीकृत किया, जिसे एनसीएलएटी ने भी बरकरार रखा।
नई बाधा – नोएडा प्राधिकरण
यद्यपि 19 जुलाई 2023 को परियोजना आईबीसी ढांचे से बाहर आ चुकी है, फिर भी नोएडा प्राधिकरण ने 2021 की सीएजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए लेआउट मैप का पुनः प्रमाणीकरण रोक दिया। 30 अक्टूबर 2023 को आवेदन प्रस्तुत किया गया, किंतु 1 नवम्बर 2023 को इसे अस्वीकार कर दिया गया। मामला वर्तमान में माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
रिपोर्टों में निष्कर्ष
- सीएजी रिपोर्ट (2021): नोएडा और बिल्डरों की मिलीभगत को उजागर किया, जिससे राजकोष को भारी नुकसान हुआ।
- अमिताभ कांत समिति रिपोर्ट (जुलाई 2023): सीआईआरपी परियोजनाओं के लिए सिफारिश की कि सभी हितधारक आईबीसी नियमों का पालन करें तथा बिना बकाया निपटान के भी योजना अनुमोदन व विस्तार की अनुमति दी जाए।
प्रभावित परिवारों की स्थिति
पिछले 11 वर्षों से अधिक समय से खरीदार अपने घरों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अधिकांश परिवार ईएमआई और किराए के दोहरे बोझ से जूझ रहे हैं। कई खरीदार इस विलंब के दौरान नौकरी, स्वास्थ्य या जीवन तक खो चुके हैं।
LABA की अपील
लोटस एरीना बायर्स एसोसिएशन (LABA) निम्न मांगों के साथ उत्तर प्रदेश सरकार, माननीय उच्च न्यायालय एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय से निवेदन करती है:
- पहले से स्वीकृत लेआउट मैप का पुनः प्रमाणीकरण कराया जाए।
- स्वीकृत रेज़ोल्यूशन योजना के तहत तुरंत निर्माण कार्य प्रारंभ करने की अनुमति दी जाए।
- न्यायालय के आदेशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित हो तथा हजारों मध्यमवर्गीय परिवारों के अधिकारों की रक्षा की जाए।

अध्यक्ष का वक्तव्य
“हमने परियोजना को दिवालियापन से बाहर निकालने हेतु लंबा कानूनी संघर्ष किया। अब जब नया डेवलपर और न्यायालय द्वारा स्वीकृत योजना उपलब्ध है, तब भी लेआउट मैप रीवैलिडेशन को रोकना सरासर अन्याय है।
हमारी केवल एक मांग है – निर्माण कार्य तुरंत प्रारंभ किया जाए।”श्री विश्वनाथ शर्मा-अध्यक्ष ,श्री आलोक जैन- सचिव ,सुश्री कविता चावला, श्री रवि गुप्ता ,श्री अरिंदम पत्रनाभिष, श्री रमन सूद,श्री जे.पी.झा इत्यादि लोग मौजूद रहे।
— विश्वनाथ शर्मा, अध्यक्ष, लोटस एरीना बायर्स एसोसिएशन (LABA)
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