अनुशासन व जिम्मेदारी का परिचायक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वच्छ वातावरण स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और आंतरिक शांति को बढ़ावा देता है, जबकि अस्वच्छता बीमारियों
तथा नकारात्मकता का कारण बनती है। श्री सिंह ने भारत की परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वच्छता को सदैव सभ्य और सुसंस्कृत समाज की पहचान माना गया है।
रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला, जिसके अंतर्गत स्वच्छता को एक जन आंदोलन का स्वरूप दिया गया है, जहां पर प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी निभाता है। उन्होंने बताया कि रक्षा मंत्रालय सामूहिक अभियानों, अपशिष्ट से धन सृजन की पहल और शिविरों एवं कार्यालयों को स्वच्छता के आदर्श केंद्रों में बदलने के माध्यम से इस प्रयास में सक्रिय योगदान दे रहा है।
रक्षा मंत्री ने इस बात पर भी गर्व व्यक्त किया कि सभी सैन्य शिविर अब खुले में शौच से मुक्त हैं, जो सशस्त्र बलों के अनुशासन और नागरिक कार्यबल की निष्ठा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ, स्वच्छ और जागरूक समाज राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार स्तंभ है। इस अवसर पर उन्होंने सभी नागरिकों से स्वच्छता को राष्ट्रीय कर्तव्य के रूप में अपनाने का आह्वान किया और दूसरों को भी स्वच्छ, स्वस्थ एवं विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
इस अभियान में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह, सचिव (ईएसडब्ल्यू) डॉ. नितेन चंद्रा, सचिव डीडीआरएंडडी एवं डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत, वित्तीय सलाहकार (रक्षा सेवा) डॉ. मयंक शर्मा सहित रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में जवान शामिल हुए।