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कस्तूरबां गांधी आवासीय विद्यालय आहोर में बाल अधिकारों व बाल विवाह रोकथाम पर जागरूकता सत्र का हुआ आयोजन।

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जालोर 26 नवम्बर। महिला अधिकारिता विभाग एवं यूएनएफपीए के संयुक्त तत्वावधान में अंतराष्ट्रीय महिला हिंसा रोकथाम दिवस के तहत किशोरी बालिकाओं के लिए कस्तूरबां गांधी आवासीय विद्यालय आहोर में बाल अधिकारों व बाल विवाह रोकथाम पर जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। महिला अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक लक्ष्मणसिंह राजपुरोहित ने बताया कि भारत सरकार एवं महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 25 नवम्बर से 10 दिसम्बर तक (16 दिवसीय) अंतरराष्ट्रीय महिला हिंसा रोकथाम दिवस के तहत विभाग द्वारा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है जिसके अंतर्गत बुधवार को कस्तूरबा गांधी आवासीय छात्रावास आहोर टाइप-4 में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में जेंडर स्पेशलिस्ट द्रौपदी भण्डारी ने बालिकाओं को बाल विवाह के दुष्परिणामों के विषय में जानकारी देते हुए कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है। विवाह कि सही उम्र लड़की की आयु 18 वर्ष एवं लड़के की आयु 21 वर्ष निर्धारित है एवं बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अतर्गत बाल विवाह अपराध है जिसका दण्ड का प्रावधान 2 साल का कठोर कारावास एक लाख रुपए जुर्माना हैं। महिला हिंसा रोकथाम के लिए विभाग द्वारा संचालित केंद्र महिला सुरक्षा एवं सलाह केंद्र, सखी वन स्टॉप सेंटर एवं पन्नाधाय सुरक्षा एवं सम्मान केंद्र के विषय में जानकारी दी।कार्यक्रम में केंद्र प्रबंधक तरुणा दवे ने बालिकाओं को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) 2012 के विषय में जानकारी देते हुए कहा कि यह अधिनियम बच्चों को यौन शोषण, यौन उत्पीड़न और बाल पोनोग्राफी जैसे अपराधों से बचाता है। यह कानून केवल बालिकाओं को ही नहीं, नाबालिग लड़कों के लिए भी सुरक्षा प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि बाल अपराधों के संरक्षण सहित कानून के तहत अपराधों के लिए दी जाने वाली सजा आदि के बारे में जानकारी दी। उन्होंने महिलाओं एवं बालिकाओं को महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा के खिलाफ उचित कार्यवाही एवं घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के विषय में विस्तृत जानकारी दी।
यूएनएफपीए द्वारा नियुक्त काउंसलर मीनाक्षी पंवार ने किशोरियों को उनके अधिकारों और कानूनी सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। उन्होंने बताया कि यह पहल यूएनएफपीए का उद्देश्य राज्य के समस्त केजीबीवी विद्यालयों में किशोरियों को उनके स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़े मुद्दों पर सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाना है। कार्यक्रम में 95 किशोरी बालिकाए उपस्थित रही।

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