भारत अब प्रौद्योगिकी आधारित विकास में वैश्विक रुझानों को आकार दे रहा है-डॉ. जितेंद्र सिंह 4 months ago 😊 Please Share This News 😊 Lalit Kumar(Raju) Editor-in-chief(lalit.space10@gmail.com)91+9782656423 पंचकूला-केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री, तथा परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने चार दिवसीय भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आईआईएसएफ) में कहा कि भारत एक पारंपरिक अर्थव्यवस्था से नवाचार-संचालित राष्ट्र बनने के निर्णायक चरण में पहुंच चुका है और अब प्रौद्योगिकी-संचालित विकास में वैश्विक रुझानों का अनुसरण करने के बजाय उन्हें आकार दे रहा है।आईआईएसएफ में एक विशेष फायरसाइड चैट के दौरान उन्होंने ने कहा कि पिछले दशक में भारत के वैज्ञानिक सोच, नीतिगत दिशा और शासन के दृष्टिकोण में एक मौलिक बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि भारत का आर्थिक विकास अब पूर्ण रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार द्वारा संचालित है और वैश्विक समुदाय भारत को शासन, सार्वजनिक सेवा वितरण और प्रौद्योगिकी-आधारित विकास के नए प्रतिरूप के स्रोत के रूप में देख रहा है।डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत में प्रतिभा, क्षमता या प्रतिबद्धता की कमी नहीं है, लेकिन जो बदलाव हुआ है वह राजनीतिक समर्थन की गुणवत्ता और राष्ट्रीय उद्देश्य की स्पष्टता है। उन्होंने कहा कि भारत अब वैश्विक तकनीकी बदलावों में पीछे नहीं है और जैव प्रौद्योगिकी, परमाणु नवाचार, पुनर्योजी विज्ञान और अगली पीढ़ी की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों सहित कई उभरते क्षेत्रों में भारत अब एक निर्णायक नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है।इस समारोह में डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि नए राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास कोष के शुभारंभ के बारे में विस्तार से बात की और इसे उच्च-जोखिम, उच्च-प्रभाव वाले नवाचारों को बढ़ावा देने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह कोष उन क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देगा जो पहले अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा में निजी क्षेत्र के लिए मुश्किल था । उन्होंने इस पहल को एक “उत्प्रेरक प्रोत्साहन” बताया जिसका उद्देश्य कम ब्याज दर पर दीर्घकालिक वित्तीय सहायता के माध्यम से भारतीय उद्योग को दीर्घकालिक क्षमताएँ विकसित करने में मदद करना है जिससे कंपनियाँ भारत के तकनीकी विकास में एक मज़बूत और स्वतंत्र योगदानकर्ता के रूप में उभरने से पहले आत्मविश्वास के साथ अपना विस्तार कर सकें।अंतरिक्ष क्षेत्र में नए अवसरों की बात करते हुए, डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब रॉकेट प्रक्षेपण के दौरान पत्रकारों को भी श्रीहरिकोटा के द्वार के अंदर जाने की अनुमति नहीं थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आए बदलाव के परिणामस्वरूप मुट्ठी भर कंपनियों से लेकर लगभग 400 अंतरिक्ष स्टार्टअप तक विस्तार हुआ है जिनमें से कई अब वैश्विक स्तर पर पहचाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों केवल रॉकेट प्रक्षेपण तक सीमित सीमित नहीं हैं, बल्कि उसने कृषि, स्वास्थ्य सेवा, पेयजल समाधान और आपदा प्रबंधन में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के उपयोग के लिए वैश्विक मॉडल तैयार किए हैं।उन्होंने कहा कि यही बदलाव परमाणु क्षेत्र में भी दिखाई दे रहा है जहाँ नवाचार अब कैंसर देखभाल नेटवर्क, सामुदायिक जल शोधन प्रणालियों और अन्य अनुप्रयोगों के माध्यम से नागरिकों को सीधे लाभान्वित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की परमाणु और अंतरिक्ष सफलता की कहानियाँ दर्शाती हैं कि कैसे रणनीतिक प्रौद्योगिकियाँ जीवन को और अधिक सुगम बना सकती हैं।भारत के बढ़ते वैश्विक कद पर चर्चा करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज युवा भारतीयों को विदेशों में पिछली पीढ़ियों की तुलना में कहीं अधिक सम्मान प्राप्त है। उन्होंने कहा कि जब कोई भारतीय पेशेवर विदेश में अपना परिचय देता है तो रोज़गार बाजार में उसकी विश्वसनीयता तुरंत बढ़ जाती है जिसे उन्होंने दो दशक पहले की स्थिति से पूरी तरह से विपरीत बताया। उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में विभिन्न क्षेत्रों से कई देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने भारत की शिकायत निवारण प्रणालियों, वरिष्ठ नागरिकों के लिए डिजिटल प्रमाणन तंत्र और अन्य सार्वजनिक सेवा नवाचारों को समझने के लिए भारत का दौरा किया जो दर्शाता है कि तरह भारत, वैश्विक रूप से प्रासंगिक सर्वोत्तम प्रथाओं का निर्माता बन गया है।डॉ जितेंद्र सिंह ने देश के नए आत्मविश्वास का श्रेय पिछले एक दशक में आई बदलती कार्य संस्कृति को दिया। उन्होंने कहा कि सरकार अब अधिक उद्देश्यपूर्ण, जवाबदेही और संवेदनशीलता के साथ काम करती ह, और प्रधानमंत्री आवास योजना और उज्ज्वला योजना जैसी योजनाएँ समावेशी लोकतंत्र की एक नई भावना का प्रतिनिधित्व करती हैं जहाँ जाति, धर्म या राजनीतिक पसंद के भेदभाव के बिना नागरिकों को लाभ पहुँचता है। उनके अनुसार, इस बदलाव ने नागरिक और राज्य के बीच विश्वास को फिर से स्थापित किया है।डॉ जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि भारत की तकनीकी प्रगति देश भर में हो रहे अवसरों के लोकतंत्रीकरण से अविभाज्य है। डिजिटल कनेक्टिविटी और किफायती सूचना पाने के साथ, छोटे शहरों और ग्रामीण ज़िलों के युवा अब बड़े शहरों के युवाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुंछ जैसे ज़िलों, पंजाब-हरियाणा क्षेत्र के आस-पास के इलाकों और अन्य गैर-महानगरीय क्षेत्रों के यूपीएससी टॉपर्स की बदलती प्रोफ़ाइल इस बदलाव को दर्शाती है। उन्होंने “भारत” से बढ़ती आकांक्षाओं को भारत की सबसे बड़ी ताकतों में से एक बताया।भारत को अपनी नवाचार प्रगति को कैसे मापना चाहिए, इस सवाल पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि असली पैमाना स्थिरता है। विचारों को मज़बूत उद्योग और बाज़ार संबंधों वाले व्यवहार्य उद्यमों में बदलना होगा। उन्होंने कहा कि नवाचार आदर्शवाद तक सीमित नहीं रह सकता; इसे समाज में सम्मान, वित्तीय सुरक्षा और समानता की भावना भी प्रदान करनी चाहिए। उन्होंने लैवेंडर-आधारित उद्यमों सहित लाभदायक कृषि-स्टार्ट-अप के उदय का उल्लेख किया, जिनकी स्थापना ऐसे पेशेवरों ने की है जिन्होंने उच्च दबाव वाली कॉर्पोरेट नौकरियाँ छोड़कर ऐसे उद्यम स्थापित किए हैं जो सार्थक और आर्थिक रूप से सफल दोनों हैं।भविष्य की ओर देखते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी प्रतिभा है, जो पीढ़ियों से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष उन क्षेत्रों में से एक होगा जहाँ भारत दुनिया को आश्चर्यचकित करेगा, और भविष्यवाणी की कि अगले 15 से 20 वर्षों में कोई भारतीय चंद्रमा पर कदम रखेगा। उन्होंने कहा कि अगर कृत्रिम बुद्धिमत्ता को ज़िम्मेदारी और परिपक्वता के साथ संभाला जाए तो यह भारत में रोज़मर्रा की ज़िंदगी को तेज़ी से बदल देगी। युवा नवप्रवर्तकों के लिए उनका संदेश स्पष्ट था: जोखिम उठाएँ, उद्योग के साथ मज़बूत साझेदारी की तलाश करें, और सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सहायता और समर्थन का पूरा लाभ उठाएँ। पंचकूला आयोजित आईआईएसएफ के आयोजन के अवसर पर, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ऐसे मंचों का उद्देश्य आत्मविश्वास जगाना, जिज्ञासा जगाना और वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय का नेतृत्व करने के लिए भारत की तत्परता को प्रदर्शित करना है। उन्होंने कहा कि भारत आज अपने हाल के इतिहास की तुलना में कहीं अधिक मज़बूत और सम्मानित स्थिति में है और आने वाला दशक उन लोगों का होगा जो वैज्ञानिक कल्पना को राष्ट्रीय उद्देश्य के साथ जोड़ेंगे। व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे Donate Now More Stories नेपाल में नई सरकार के गठन पर श्री बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनने पर इण्डो-नेपाल समरसता ऑर्गेनाइजेशन ने दी शुभकामनाएँ 12 hours ago केंद्रीय विद्युत अभियांत्रिकी सेवा और भारतीय आर्थिक सेवा के अधिकारियों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की 20 hours ago जिले में यातायात एवं सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत और प्रभावी बनाएँ-ज़िला कलक्टर 1 day ago [responsive-slider id=1466] You may have missed नेपाल में नई सरकार के गठन पर श्री बालेन शाह 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