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सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के कार्यान्वयन की समीक्षा हेतु 29वीं समीक्षा बैठक संपन्न

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नई दिल्ली-केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार और केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम ने आज नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के कार्यान्वयन की समीक्षा और अनुसूचित जातियों व जनजातियों के विरुद्ध अस्पृश्यता व अत्याचारों को रोकने के उपायों पर विचार हेतु गठित समिति की 29वीं बैठक की सह-अध्यक्षता की।इस बैठक में जनजातीय कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री दुर्गा दास उइके, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव श्री सुधांश पंत, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग(एनसीएससी) के सचिव श्री गुडेय श्रीनिवास, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग(एनसीएसटी) के सचिव श्री प्रशांत कुमार सिंह, गैर-सरकारी सदस्य डॉ. के. मुनियप्पा ओबडेनाहल्ली और सुश्री सुकेशी ओराम तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण(एनएएलएसए) के सदस्य सचिव श्री संजीव पांडेय उपस्थित रहे। इसके अलावा 20 राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों से अपर मुख्य सचिव, एससी/एसटी विकास/कल्याण विभाग, गृह विभाग के प्रधान सचिव/सचिव और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।बैठक के दौरान आरोप पत्र दाखिल करने की दर, मामलों की लंबित स्थिति, विशेष न्यायालयों एवं विशेष पुलिस थानों की स्थापना की स्थिति, सतर्कता एवं निगरानी समितियों की बैठकों का आयोजन, राष्ट्रीय अत्याचार विरोधी हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों की लंबित स्थिति तथा जागरूकता कार्यक्रमों जैसे प्रमुख विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

पीसीआर और पीओए अधिनियमों के कार्यान्वयन की समग्र समीक्षा की गई और चिन्हित कमियों को दूर करने हेतु कार्ययोजनाएँ तैयार की गईं। समिति ने समाज के सभी संवेदनशील वर्गों के लिए गरिमा, न्याय और संरक्षण सुनिश्चित करने के सरकार के दृढ़ संकल्प को दोहराया।केन्द्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने अपने समापन भाषण में, राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में अधिनियम के प्रावधानों की प्रभावी समीक्षा हेतु राज्य और जिला स्तर पर सतर्कता एवं निगरानी समितियों की नियमित बैठकों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठाएं कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों का शोषण न हो। इसके अलावा, उन्होंने अत्याचार और अस्पृश्यता की घटनाओं को कम करने के लिए प्रभावी निवारक उपायों को अपनाने पर जोर दिया, जिससे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में समानता, गरिमा और सामाजिक सद्भाव की भावना को बढ़ावा मिले।उन्होंने जवाबदेही को मजबूत करने और पीओए अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, कर्तव्य में लापरवाही के मामलों में गलती करने वाले अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए स्पेशल पुलिस थानों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया।

केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम ने हितधारकों को जागरूक करने और लाभार्थियों के अधिकारों और कानून के प्रावधानों के बारे में व्यापक जन जागरूकता पैदा करने के लिए देश भर में कई जगहों पर बैठकें आयोजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने मजबूत डेटा विश्लेषण को सक्षम करने और निगरानी एवं कार्यान्वयन तंत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए आईटी-आधारित प्लेटफॉर्म के विकास के माध्यम से, प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के महत्व पर भी बल दिया।केन्द्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गा दास उइके ने बैठक को संबोधित किया और नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने वैधानिक निर्देशों के अनुपालन में कमी और संबंधित अधिनियमों और योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जागरूकता पहलों को बढ़ाने की आवश्यकता जैसी महत्वपूर्ण चिंताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया।

बैठक का समापन सभी प्रतिभागियों की इस प्रतिबद्धता के साथ हुआ कि वे इन महत्वपूर्ण अधिनियमों की भावना और उद्देश्य को बनाए रखते हुए जाति-आधारित भेदभाव और अत्याचारों के पीड़ितों को समय पर और प्रभावी न्याय सुनिश्चित करेंगे।

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