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भारत का ऊर्जा रूपांतरण ‘वसुधैव कुटुंबकम- एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ के सिद्धांत पर आधारित है: केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी

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अबू धाबी-केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने आज  संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (आईआरईएनए) की 16वीं असेंबली में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य दिया, जिसमें एक न्यायसंगत, समान, किफायती और टिकाऊ वैश्विक ऊर्जा रूपांतरण के प्रति भारत की मज़बूत प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।असेंबली को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऊर्जा रूपांतरण को लेकर भारत का दृष्टिकोण वसुधैव कुटुंबकम- एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य के सिद्धांत और समानता, समावेशिता व नीतिगत स्थिरता पर आधारित एक दीर्घकालिक विज़न के बारे में बताता है। उन्होंने 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ईंधन स्थापित विद्युत क्षमता हासिल करने और 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।एक बड़ी उपलब्धि पर ज़ोर देते हुए, श्री जोशी ने बताया कि भारत ने पेरिस समझौते के तहत अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) लक्ष्य से पांच साल पहले ही 2025 में गैर-जीवाश्म ईंधन स्त्रोतों से अपनी स्थापित विद्युत क्षमता का 50 प्रतिशत हासिल कर लिया है। भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 266 गीगावॉट से अधिक हो गई है, जिससे देश नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो गया है।केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते प्रमुख ऊर्जा बाजारों में से एक के रूप में, भारत ऊर्जा भंडारण समाधानों को तेज़ी से लागू करके, ग्रिड आधुनिकीकरण, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के विकास और हाइब्रिड व चौबीसों घंटे चलने वाली नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं  जैसे अभिनव बिडिंग तरीकों के ज़रिए भरोसेमंद और मज़बूत पावर सिस्टम को प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को मज़बूत करने और सौर, पवन, बैटरी और इलेक्ट्रोलाइज़र के क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को बढ़ाने के भारत के प्रयासों पर भी ज़ोर दिया, जो राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता और विभिन्न वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं दोनों में योगदान दे रहा है।भारत के ऊर्जा रूपांतरण के लोगों पर केंद्रित होने पर ज़ोर देते हुए, केंद्रीय मंत्री ने घरों और किसानों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे प्रमुख कार्यक्रमों का उल्लेख किया। पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत, दो साल से भी कम समय में लगभग 2.5 मिलियन घरों को रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन से फायदा हुआ है, जिसका लक्ष्य मार्च 2027 तक 10 मिलियन घरों को कवर करना है। पीएम-कुसुम योजना के तहत, लगभग 2.17 मिलियन किसानों को डीज़ल पंपों को बदलने और कृषि फीडरों के सौरकरण से लाभ हुआ है।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा रूपांतरण के लिए बहुत अधिक निवेश और सहयोग की आवश्यकता होगी। अकेले भारत को 2030 तक लगभग 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता होने की उम्मीद है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन, भंडारण, ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रिड और विनिर्माण के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि मजबूत नीतियों और पारदर्शी बाजारों के साथ, भारत स्वच्छ ऊर्जा निवेश के लिए सबसे आकर्षक देशों में से एक बना हुआ है।अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने का आह्वान करते हुए, श्री जोशी ने विशेष रूप से विकासशील देशों को विकास की आकांक्षाओं से समझौता किए बिना नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ाने में मदद करने के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, लो कॉस्ट फाइनेंस तक पहुंच, क्षमता निर्माण और मानकों के सामंजस्य के महत्व पर ज़ोर दिया।आईआरईएनए के लिए भारत के मज़बूत समर्थन को दोहराते हुए, उन्होंने कहा कि भारत अपने अनुभव, संस्थानों व तकनीकी विशेषज्ञता को साझा करने और सभी सदस्य देशों, खासकर सबसे अल्प विकसित देशों और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है, ताकि वैश्विक स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा रूपांतरण को गति दी जा सके। केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत का ऊर्जा रूपांतरण सिर्फ़ क्षमता बढ़ाने के बारे में नहीं है, बल्कि लोगों, अवसरों और एक साझे टिकाऊ भविष्य के बारे में भी है।इससे पहले, केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने भी असेंबली के दौरान “ऊर्जा भविष्य की पुनर्कल्पनाः   साझी समृद्धि के लिए साहसिक दृष्टिकोण” पर उच्च-स्तरीय संवाद में भाग लिया। उन्होंने सभी के लिए साझी समृद्धि के उद्देश्य से, वित्त, तकनीक और शासन पर मज़बूत अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से प्रेरित, जन-केंद्रित ऊर्जा रूपांतरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। इस बात पर ज़ोर देते हुए कि ऊर्जा रूपांतरण को समानता और समावेशन से प्रेरित एक जन आंदोलन बनना चाहिए, मंत्री महोदय ने कहा कि भारत ने 2025 में लगभग 50 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी है।केंद्रीय मंत्री ने डोमिनिकन रिपब्लिक को अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (आईआरईएनए) की अध्यक्षता के लिए बधाई दी तथा वाइस प्रेसिडेंट केन्या, सोलोमन आइलैंड्स, स्पेन और एंटीगुआ और बारबुडा को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनका नेतृत्व बहुपक्षीय सहयोग को और मजबूत करेगा तथा एक टिकाऊ और समावेशी वैश्विक ऊर्जा रूपांतरण को आगे बढ़ाएगा।केंद्रीय मंत्री ने जलवायु कार्रवाई, स्वच्छ ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर भारत-यूएई सहयोग को और मज़बूत करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात की जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण मंत्री डॉ. आमना  बिन्त अब्दुल्ला अल दहक के साथ भी बैठक की। बातचीत के दौरान, दोनों पक्षों ने नवीकरणीय ऊर्जा, निवेश और नवाचार में बढ़ती साझेदारी की समीक्षा की, जो 2014 और 2024 के बीच हस्ताक्षरित विभिन्न समझौता ज्ञापनों पर आधारित है और यूएई के नेट ज़ीरो 2050 लक्ष्य के साथ जुड़ी हुई है। चर्चा में नवीकरणीय ऊर्जा, विकेन्द्रीकृत ऊर्जा समाधान, विनिर्माण, ऊर्जा भंडारण, प्रौद्योगिकी सहयोग और ब्लेन्डेड फाइनेंस में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा, सुदृढ़ता और दीर्घकालिक स्थिरता बढ़ाने के लिए जन-केंद्रित, बड़े पैमाने पर लागू होने वाली पहलों पर ज़ोर दिया गया।

आईआरईएनए के बारे में

अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (आईआरईएनए) एक अंतर-सरकारी संगठन है जो देशों को संधारणीय ऊर्जा भविष्य की ओर बढ़ने में मदद करती है, और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए प्रमुख मंच, एक उत्कृष्टता केंद्र, और नवीकरणीय ऊर्जा पर नीति, प्रौद्योगिकी, संसाधन और वित्तीय जानकारी का भंडार है। अभी, आईआरईएनए के 170 सदस्य हैं (169 देश और यूरोपियन यूनियन) और 14 देश इसमें शामिल होने की प्रक्रिया में हैं। भारत भी आईआरईएनए के संस्थापक सदस्यों में से एक है।आईआरईएनए असेंबली का 16वां सत्र और उससे जुड़ी बैठकें 10 से 12 जनवरी 2026 तक संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में हो रही हैं। असेंबली के सत्र का मुख्य विषय “मानवता को सशक्त बनाना: साझी समृद्धि के लिए नवीकरणीय ऊर्जा” होगा। असेंबली के सत्र में वैश्विक नेता और ऊर्जा के क्षेत्र में फैसले लेने वाले लोग एकत्रित होंगे, जो देशों, क्षेत्रों और पूरी दुनिया में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए रणनीतियों पर चर्चा करेंगे और आवश्यक कदमों पर ज़ोर देंगे, जिससे आर्थिक समावेशन, समानता और मानव कल्याण को बढ़ावा मिलेगा।

 

 

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