जोधपुर में शनिवार से शुरू होगा राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2026, देश विदेश की 78 फिल्मों का होगा प्रदर्शन
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जोधपुर। राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी सूर्य नगरी जोधपुर में शनिवार से पांच दिवसीय राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (RIFF) 2026 का भव्य आगाज होने जा रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में 78 फिल्मों के प्रदर्शन के साथ देश-विदेश से फिल्मी हस्तियां, फिल्ममेकर, एम्बेसी ऑफिशियल और बड़ी संख्या में फिल्म प्रेमी हिस्सा लेंगे। साथ ही यह फेस्टिवल राजस्थानी भाषा, लोक कला और समृद्ध संस्कृति को आगे बढ़ाने का भी एक सशक्त मंच बनेगा। आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।फेस्टिवल के आयोजक सोमेंद्र हर्ष ने संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि RIFF 2026 में भारत के अलावा अमेरिका, यूके, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, इटली, सिंगापुर और वेनेजुएला जैसे देशों के फिल्ममेकर्स की फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही विभिन्न देशों से आए फिल्ममेकर और एम्बेसी ऑफिशल्स भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष RIFF 2026 के लिए पोलैंड – पोलिश इंस्टिट्यूट को फोकस कंट्री बनाया गया है। पोलिश इंस्टिट्यूट के एम्बेसी ऑफिशल्स उद्घाटन और समापन समारोह में विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। आयोजकों के अनुसार यह पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 31 जनवरी से 4 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर भारत सरकार के केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल, जोराराम कुमावत, राज्य मंत्री, के के बिश्नोई विधायक देवेंद्र जोशी और अतुल भंसाली को भी आमंत्रित किया गया है।राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2026 न केवल सिनेमा के विविध रंगों को दर्शाएगा, बल्कि राजस्थानी लोक कला, संस्कृति और भाषा के वैश्विक प्रचार का भी सशक्त माध्यम बनेगा।इसके अतिरिक्त, महोत्सव के अंतर्गत विभिन्न मास्टर क्लासेस का भी आयोजन होगा
अभिनय की कला को खोजना मास्टर क्लास मुकेश छाबड़ा
मुकेश छाबड़ा राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में शिरकत करने आ रहे हैं। इस अवसर पर वे 3 फरवरी को मिराज सिनेमा, ब्लूसिटी मॉल में एक विशेष मास्टर क्लास” “अभिनय की कला को खोजना” (Discovering the Craft of Acting) लेंगे, जहाँ वे फिल्म उद्योग में अभिनय की बारीकियों, ऑडिशन प्रक्रिया, किरदार की समझ और एक अभिनेता के रूप में खुद को तैयार करने के व्यावहारिक अनुभव साझा करेंगे। यह सत्र विशेष रूप से नए और भावी कलाकारों, अभिनेताओं, फिल्म विद्यार्थियों और युवा कलाकारों के लिए आयोजित किया जा रहा है, जो इंडस्ट्री की वास्तविक समझ और प्रोफेशनल गाइडेंस प्राप्त करना चाहते हैं।मुकेश छाबड़ा भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित कास्टिंग डायरेक्टर, अभिनेता और फिल्म निर्देशक हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत सहायक कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में की और जल्द ही इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई। चिल्लर पाटी, रॉकस्टार, गैंग्स ऑफ वासेपुर, क्वीन, दिल्ली क्राइम। सेक्रेड गेम्स और धुंधर जैसी 300 से अधिक फिल्मों और वेब सीरीज़ के लिए उन्होंने कास्टिंग की है। वे नए और सच्चे टैलेंट को मंच देने के लिए जाने जाते हैं। 2020 में उन्होंने दिल बेचारा से निर्देशन में कदम रखा। मुकेश छाबड़ा का योगदान भारतीय सिनेमा की नई पीढी को गढ़ने में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
फ्रॉम स्टेज तो स्क्रीन अनूप सोनी
अनूप सोनी 4 फरवरी को विशेष मास्टर क्लास लेंगे जो आत्मविश्वास विकसित करने, कैमरे के सामने पकड़ मजबूत करने और विभिन्न माध्यमों में अभिनय की बारीकियों को समझने पर केंद्रित रहेगी। अभिनेताओं, थिएटर कलाकारों और सिनेमा प्रेमियों के लिए डिज़ाइन की गई यह मास्टर क्लास वर्षों के पेशेवर अनुभव से निकली व्यावहारिक समझ और उपयोगी जानकारियों प्रदान करेगी।अनूप सोनी एक प्रतिष्ठित भारतीय अभिनेता और टेलीविजन एंकर हैं, जिन्हें उनकी प्रभावशाली स्क्रीन प्रेजेंस और बहमुखी प्रतिभा के लिए व्यापक रूप से सम्मानित किया जाता है। थिएटर, टेलीविजन और सिनेमा में फैले अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने अनेक सशक्त और यादगार किरदार निभाए हैं। उनकी प्रमुख फ़िल्मों में गंगाजल और फ़िजा शामिल हैं। टेलीविजन पर वे लोकप्रिय क्राइम शो क्राइम पेट्रोल के होस्ट के रूप में विशेष रूप से पहचाने जाते हैं, साथ ही बालिका वधू और सी हॉक्स जैसे धारावाहिकों में उनके किरदार भी दर्शकों को याद हैं। अपने शांत लेकिन प्रभावशाली व्यक्तित्व और भावनात्मक गहराई के लिए जाने जाने वाले अनूप सोनी आज भी दर्शकों और उभरते कलाकारों दोनों को प्रेरित करते हैं। थिएटर, टेलीविजन और सिनेमा में वर्षों के अनुभव के साथ, अनूप सोनी अभिनय, तैयारी और कैमरे के सामने प्रामाणिकता से जुडी व्यावहारिक समझ साझा करते हैं।
विचार और अभिनय के बीचः बनने की कला रजित कपूर
विचार और अभिनय के बीचः बनने की कला शीर्षक से आयोजित यह मास्टरक्लास अभिनय की उस सूक्ष्म प्रक्रिया पर केंद्रित होगी, जहाँ विचार, भावनाएँ और प्रस्तुति एक-दूसरे से जुड़कर एक सशक्त अभिनय का निर्माण करती हैं। रजित कपूर अपने दशकों लंबे अनुभव के आधार पर अभिनय की तैयारी, चरित्र निर्माण, संवादों की समझ, मंच और कैमरे के लिए अभिनय के अंतर, तथा अभिनेता के आंतरिक संसार पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे। यह मास्टरक्लास विशेष रूप से उभरते कलाकारों, थिएटर विद्यार्थियों, फिल्म छात्रों और सिनेमा में रुचि रखने वाले युवाओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। सत्र के दौरान प्रतिभागियों को रजित कपूर के साथ संवाद करने, प्रश्न पूछने और अभिनय की बारीकियों को सीधे समझने का अवसर भी प्राप्त होगा।अभिनेता रजित कपूर भारतीय रंगमंच, सिनेमा और टेलीविजन के एक अत्यंत प्रतिष्ठित और अनुभवी कलाकार हैं। वे वर्ष 1996 में बनी फ़िल्म द मेकिंग ऑफ द महात्मा में महात्मा गांधी की भूमिका के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त हुआ। उनकी अन्य उल्लेखनीय भूमिकाओं में मलयालम फिल्म अग्निसाक्षी में उन्नी का किरदार तथा दूरदर्शन पर प्रसारित, बसु चटर्जी द्वारा निर्देशित लोकप्रिय टेलीविजन शृंखला ब्योमकेश बख्शी में काल्पनिक जासूस व्योमकेश बख्शी की भूमिका शामिल है। उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत श्याम बेनेगल द्वारा निर्देशित फिल्म सूरज का सातवाँ घोड़ा (1992) से की।
सीमा कपूर की आत्मकथा पर चर्चा
सीमा कपूर की आत्मकथा यूँ गुजरी है अब तलक पर बात की जायगी
सीमा कपूर का बचपन पारम्परिक पारसी रंगमंच के वातावरण में बीता, जिसने उनके रचनात्मक व्यक्तित्व की नींव रखी। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से बी.ए. की शिक्षा प्राप्त की। अपने रंगमंचीय जीवन में उन्होंने विख्यात नाट्य-निर्देशक हबीब तनवीर, राजेन्द्र नाथ, दादी पद्मजी, अस्ताद देबू और रंजील कपूर जैसे दिग्गजों के साथ अनेक नाटकों में कार्य किया। पपेट थिएटर के माध्यम से उन्होंने कई वर्षों तक विदेशों में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया। इसके साथ-साथ वे फिल्म और टेलीविजन के क्षेत्र में लेखन, निर्देशन और निर्माण के कार्य में निरंतर सक्रिय रहीं। वे अभिनेता अन्नू कपूर की बहन और स्वर्गीय ओम पुरी की पत्नी है।
उनके प्रमुख रचनात्मक कार्यों में फीचर फिल्में- हाट द वीकली बाजार, मिस्टर कबाड़ी; धारावाहिक- किले का रहस्य, ज़िन्दगीनामा, पलछिन, रिश्ते, विजय ज्योति, आवाज दिल से दिल तक, एकलव्य, मेरा गाँव मेरा देश और अवंतिका शामिल हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने कई उल्लेखनीय डॉक्यूमेंटरी फिल्में भी बनाई हैं. जिनमें महानदी के किनारे, ओरछाः एक अंतरयात्रा, नौटंकी एंड पारसी थिएटरः अ जनी तथा सॉन्ग ऑफ द सॉइल प्रमुख हैं। उनकी लिखी बाल फीचर फ़िल्म अभय को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें थर्ड आई एशियन फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट क्रिटिक अवार्ड’ तथा जागरण इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में ‘बेस्ट स्टोरी स्क्रीनप्ले पुरस्कार भी प्राप्त हुए इसके अतिरिक्त, महोत्सव के अंतर्गत विभिन्न विषयों पर ओपन फोरम टॉक शोज का आयोजन भी किया जाएगा, जिनमें सिनेमा से जुड़े समकालीन और महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा।
1 फरवरी को अपराह्न 3:00 से 4:00 बजे तक “OTT Raga: Crafting Stories in the Streaming Era” विषय पर चर्चा आयोजित की जाएगी, जिसमें डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर कहानी कहने की नई प्रवृत्तिर्यो और संभावनाओं पर संवाद होगा।
2 फरवरी को सिनेमा में क्षेत्रीय भाषाओं की भूमिका पर केंद्रित सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें विशेष रूप से राजस्थानी भाषा की मान्यता, उसके भविष्य और उससे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
3 फरवरी को “सिनेमा के माध्यम से पर्यटन, निवेश और संस्कृति का संवर्धन विषय पर संवाद होगा, जिसमें यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि फिल्में किस प्रकार किसी राज्य की सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित कर सकती हैं।
4 फरवरी को दो महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए जाएंगे।
दोपहर 12:15 बजे ‘महिला, संस्कृति और सिनेमा” विषय पर चर्चा होगी, जिसमें सिनेमा में महिलाओं की भूमिका, अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक प्रभावों पर संवाद किया जाएगा।
इसके पश्चात दोपहर 2:00 बजे “Cinemasthan: Panorama of Cinema in Rajasthan” विषय पर सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें राजस्थान में सिनेमा की यात्रा, वर्तमान परिदृश्य और भविष्य की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
राजस्थानी मधु है कल्चरल ब्रांड एम्बेसडर
राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (रिफ) 2026 के लिए मायूमी उर्फ राजस्थानी मधु को कल्चरल ब्रांड एंबेसेडर बनाया गया है। “राजस्थानी मधु” के नाम से प्रसिद्ध मायूमी, टोक्यो (जापान) की रहने वाली एक जापानी महिला हैं, जिन्हें वर्ष 2009 में पहली बार राजस्थानी लोक संस्कृति से परिचय हुआ। उसी दौरान उन्होंने घूमर और कालबेलिया नृत्यों को देखा और उनसे गहरा लगाव हो गया। इस कला से प्रेरित होकर उन्होंने विख्यात कलाकारों, विशेष रूप से आशा सपेरा, से प्रशिक्षण प्राप्त किया।”आज राजस्थानी मधु जापान में घूमर और कालबेलिया नृत्यों का शिक्षण देती हैं और भारतीय एवं जापानी संस्कृतियों के बीच एक सशक्त सांस्कृतिक सेतु के रूप में कार्य कर रही हैं। वे मंचीय प्रस्तुतियों, सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी यात्रा साझा करने और यहाँ तक कि हिंदी भाषा सिखाने के जरिए भी दोनों देशों को जोडने का कार्य कर रही हैं। राजस्थानी कला के प्रति उनके गहरे समर्पण, पारंपरिक राजस्थानी परिधान पहनने की पहचान और विश्व स्तर पर इसकी सुंदरता के प्रचार के कारण वे एक लोकप्रिय सांस्कृतिक प्रतिनिधि के रूप में जानी जाती हैं।
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