खेजड़ी बचाओ आंदोलन: भीनमाल से हजारों समाज बंधु बीकानेर महासम्मेलन के लिए रवाना
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भीनमाल-राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण को लेकर चल रहे खेजड़ी बचाओ आंदोलन के तहत सोमवार को भीनमाल क्षेत्र से हजारों की संख्या में समाज बंधु बसों व निजी वाहनों द्वारा बीकानेर के लिए रवाना हुए। यह महासम्मेलन 2 फरवरी को बीकानेर शहर के पास डूंगर कॉलेज मैदान में आयोजित होने जा रहा है, जिसे विश्व का सबसे बड़ा पर्यावरण प्रेमियों का महासम्मेलन बताया जा रहा है।
इस आंदोलन का उद्देश्य खेजड़ी के संरक्षण हेतु कठोर कानून बनाने की मांग तथा मरुस्थल की जीवनरेखा माने जाने वाले इस वृक्ष को बचाने के लिए जनजागरण करना है।भीनमाल, बागोड़ा, पुनासा, विरार नाड़ी, भालनी, कुकावास, जैलातरा, दांतीवास, सेवड़ी, वाड़ा भाडवी, नया वाड़ा, जोगाऊ, थोबाऊ, बासड़ा धनजी ,हापु की ढाणी भालनी ,डुगरवा, सहित अनेक गांवों से समाज बंधु इस महासम्मेलन में भाग लेने के लिए रवाना हुए।इस अवसर पर एडवोकेट श्रवण ढाका ने बताया कि मां अमृता देवी विश्नोई के बलिदान को स्मरण करते हुए कहा कि
“सिर साटे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण”
यह केवल इतिहास नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का जीवंत संदेश है।कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष, विश्नोई युवा संगठन जालोर एडवोकेट श्रवण ढाका, महासभा युवा अध्यक्ष डॉ. दिनेश जाभाणी, बाबूलाल जी भालनी, श्री रामकिशन खिलेरी (वाड़ा भाडवी), पूनमचंद सियाग,भिखाराम ,
राजपाल माजु,गोपी साऊ , सहित अनेक सामाजिक व पर्यावरण कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी रही।
समाजजनों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक एवं पर्यावरण हित में है और सरकार से आग्रह किया गया कि खेजड़ी के संरक्षण हेतु ठोस और प्रभावी कानून बनाए जाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित पर्यावरण मिल सके।
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