श्रीलंका में ऐतिहासिक प्रदर्शनी के बाद भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष भारत वापस लाए गए 2 months ago 😊 Please Share This News 😊 Lalit Kumar(Raju) Editor-in-chief(lalit.space10@gmail.com)91+9782656423 नई दिल्ली-भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष आज श्रीलंका से भारत वापस लाए गए। ये अवशेष कोलंबो के गंगारामया मंदिर में एक सप्ताह तक सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए रखे गए थे।मध्य प्रदेश के राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल और अरुणाचल प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री चोवना मीन के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल, वरिष्ठ बौद्ध भिक्षुओं और अधिकारियों के साथ, इन पवित्र अवशेषों को वापस ला रहा है, जिन्हें पहली बार अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी के लिए विदेश भेजा गया था। इस अवसर पर श्रीलंका के मंत्रियों और भारत के श्रीलंका में उच्चायुक्त की उपस्थिति में भंडारनायके अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर औपचारिक प्रस्थान समारोह आयोजित किया गया।सात दिवसीय प्रदर्शनी के दौरान श्रीलंका भर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगारामया मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे। इस दौरान दस लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने सार्वजनिक दर्शन में भाग लिया, जिससे यह यह आयोजन एक अहम आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उपलब्धि के रूप में स्थापित हुआ। प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री, कैबिनेट मंत्री, संसद सदस्य, पूर्व राष्ट्रपति और अन्य गणमान्य व्यक्तियों सहित कई वरिष्ठ श्रीलंकाई नेताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रदर्शनी का उद्घाटन राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने किया। श्रीलंका सरकार ने इस ऐतिहासिक आध्यात्मिक आयोजन को संभव बनाने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और भारत की जनता के प्रति आभार व्यक्त किया। भारत की ओर से उद्घाटन समारोह में गुजरात के राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत और गुजरात के उपमुख्यमंत्री श्री हर्ष संघवी उपस्थित थे। जिसमें भारत और श्रीलंका के बीच साझा बौद्ध विरासत और सभ्यतागत संबंधों को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी के विस्तार के रूप में, “पवित्र पिपरावा का अनावरण” और “समकालीन भारत के पवित्र अवशेष और सांस्कृतिक जुड़ाव” नामक विशेष प्रदर्शनियों का आयोजन किया गया। इन प्रदर्शनियों में भारत और श्रीलंका के बीच साझा बौद्ध विरासत और सभ्यतागत संबंधों को प्रदर्शित किया गया। अप्रैल 2025 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की श्रीलंका यात्रा के दौरान घोषित इस ऐतिहासिक प्रदर्शनी ने भारत और श्रीलंका के प्राचीन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को और गहरा किया है। इसने वैश्विक बौद्ध विरासत के संरक्षक के रूप में भारत की भूमिका और श्रीलंका के साथ जन-जन और सांस्कृतिक संबंधों को गहरा करने की भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को भी बल दिया है। भारत से आया विशेष प्रतिनिधिमंडल भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेषों को श्रद्धा और सम्मान के साथ लेकर स्वदेश के लिए रवाना हुआ। इस पावन अवसर के साथ, भारत और श्रीलंका के बीच साझा बौद्ध विरासत का एक ऐतिहासिक और भावनात्मक अध्याय पूर्ण हुआ। व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे Donate Now More Stories राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में सम्मिलित हुईं 2 hours ago नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम: सीए मेघा धानुका 11 hours ago जेसीबी से हुई पुष्प वर्षा, बाबा साहेब की 135वीं जयंती पर उमड़ा जीनगर समाज का जनसैलाब 11 hours ago [responsive-slider id=1466] You may have missed राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में सम्मिलित हुईं 2 hours ago नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम: सीए मेघा धानुका 11 hours ago जेसीबी से हुई पुष्प वर्षा, बाबा साहेब की 135वीं जयंती पर उमड़ा जीनगर समाज का जनसैलाब 11 hours ago PRESIDENT OF INDIA GRACES CONVOCATION CEREMONY OF AIIMS RAJKOT 1 day ago