राजस्थानी भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल किया जाये: जिलाअध्यक्ष ढाका
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भीनमाल-अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर राजस्थानी भाषा को भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर राजस्थानी भाषा संघर्ष समिति, शाखा-भीनमाल द्वारा उपखंड अधिकारी भीनमाल को राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।जिलाअध्यक्ष एडवोकेट ढाका ने बताया कि राजस्थानी केवल एक बोली नहीं, बल्कि समृद्ध साहित्य, व्याकरण, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध भाषा है। यह न केवल राजस्थान बल्कि देश-विदेश में बसे करोड़ों लोगों की मातृभाषा है। इसके बावजूद आज तक इसे संवैधानिक मान्यता नहीं मिल पाई है, जो अत्यंत चिंताजनक विषय है।समिति ने उल्लेख किया कि राजस्थान विधानसभा द्वारा पूर्व में सर्वसम्मति से राजस्थानी भाषा को मान्यता देने का प्रस्ताव पारित किया जा चुका है तथा केंद्र सरकार की विभिन्न समितियों ने भी सकारात्मक अनुशंसा की है। इसके बावजूद अभी तक इसे संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है।समिति के प्रतिनिधियों ने मांग की कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए राजस्थानी भाषा को शीघ्र ही 8वीं अनुसूची में शामिल किया जाए, ताकि मातृभाषा में शिक्षा, संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा मिल सके।ज्ञापन सौंपते समय समिति के कांग्रेस विधि विभाग जिला अध्यक्ष एडवोकेट श्रवण ढाका,अल्पसंख्या विभाग कांग्रेस प्रदेश सचिव इकबाल खान, राजस्थानी भाषा संघर्ष समिति के सदस्य ओमप्रकाश साऊ,एनएसयुआई छात्रनेता पुखराज मांजू ,राजपाल मांजू ,गोपी बिश्नोई,हरचंद मेघवाल, प्रवीण बेनिवाल,
सादिक खान, अभिषेक बिश्नोई, विष्णु बिश्नोई एवं पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे और उन्होंने इस मांग को लेकर संघर्ष जारी रखने की बात
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