राष्ट्रीय आरोग्य मेले 2026 की एक विशेष बात किसानों के साथ इसका विशेष जुड़ाव था। ‘‘आयुर्वेदिक खेती: उत्पादन, मूल्यवर्धन और विपणन’’ पर आयोजित विशेष सत्रों में औषधीय पौधों की
खेती, फसल कटाई के बाद के प्रबंधन और सुनिश्चित बाजार संपर्कों पर तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कृषि संस्थानों और विशेषज्ञों के समन्वय से आयोजित इस कार्यशाला में लगभग 2000
किसानों ने भाग लिया। हल्दी की खरीद के लिए एक महत्वपूर्ण वापिस खरीद समझौते सहित कई आशय पत्रों पर हस्ताक्षर, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने और किसानों को लाभकारी प्रतिफल सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस कदम था।
विदर्भ क्षेत्र के किसानों और प्रतिभागियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि औषधीय पौधों की खेती में विविधता लाना पारंपरिक कृषि के साथ-साथ एक सतत और लाभदायक विकल्प
प्रदान करता है। कई लोगों ने इस मेले को एक समयोचित पहल बताया जो स्वास्थ्य सेवा में सुधार को आय वृद्धि और पर्यावरणीय स्थिरता से जोड़ती है।
चार दिनों तक चले इस मेले ने ज्ञान के आदान-प्रदान, जन जागरूकता और प्रत्यक्ष सेवा वितरण के लिए एक गतिशील मंच के रूप में कार्य किया। विशेषज्ञों के व्याख्यान, चिकित्सा पद्धतियों का प्रदर्शन, उद्योग प्रदर्शनियों और नीति निर्माताओं तथा जमीनी स्तर के हितधारकों के बीच संवाद ने स्वास्थ्य और आजीविका के एकीकृत दृष्टिकोण को सुदृढ़ किया।
शेगांव में राष्ट्रीय आरोग्य मेले 2026 का सफल समापन आयुष मंत्रालय की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को लोगों के करीब लाने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है, साथ ही साथ आयुष मूल्य श्रृंखला में अनुसंधान, गुणवत्ता मानकों और किसानों की भागीदारी को मजबूत करता है।
मेले ने नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाओं, वैज्ञानिक सहभागिता, योग प्रतियोगिताओं के माध्यम से युवाओं की भागीदारी और औषधीय पौधों की खेती के लिए संरचित समर्थन को मिलाकर यह प्रदर्शित किया है कि आयुष प्रणालियां एक साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और समग्र कल्याण के लिए वैश्विक केंद्र के रूप में भारत के उभरने में कैसे योगदान दे सकती हैं।