उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन के कार्यो का “यू.एस.एम. पत्रिका” द्वारा हुआ लोकार्पण
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लखनऊ-लखनऊ में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं वैचारिक पत्रिका “यू.एस.एम. पत्रिका” द्वारा उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजनजी के जीवन और कार्यों पर केन्द्रित विशेषांक का लोकार्पण किया गया।यह आयोजन उनके 70वें जन्मदिवस के अवसर पर हुआ और उनके लिए यह क्षण अत्यंत भावुक और विनम्रता से भर देने वाला रहा।इस अवसर पर वक्ताओं ने उनके प्रशासनिक जीवन की यात्रा पर अपने विचार रखे—एक युवा सिविल सेवक से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव के रूप में कार्य करने तक के अनुभवों को याद किया गया। चर्चा का केंद्र यह रहा कि सार्वजनिक जीवन में व्यक्ति को किन मूल्यों के साथ काम करना चाहिए।उनके लिए प्रशासनिक सेवा का अर्थ हमेशा यही रहा है कि सरकार की नीतियाँ आम लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकें। चाहे वह बुनियादी ढाँचे के बड़े प्रकल्प हों, शासन व्यवस्था में सुधार हो, या जनहित से जुड़े निर्णय—हर प्रयास का उद्देश्य यही रहा कि लोगों के जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो। कार्यक्रम में यह भी उल्लेख हुआ कि सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, संवेदनशीलता, कर्तव्यनिष्ठा और लोककल्याण की भावना ही किसी भी प्रशासक की सबसे बड़ी पूँजी होती है।इस अवसर पर पत्रिका के संपादक श्री उमाशंकर मिश्र ने ‘आलोक रंजन’ नाम के भावार्थ को बड़े सुंदर ढंग से प्रस्तुत करते हुए कहा कि “आलोक रंजन” नाम अपने आप में सकारात्मकता और लोकसेवा की भावना का प्रतीक है—जिसमें आत्मीयता, संवेदनशीलता, लोककल्याण, कर्तव्यनिष्ठा और जनसहभागिता से विकास की भावना निहित है।कार्यक्रम में डॉ. प्रदीप दीक्षित ने उनके प्रशासनिक जीवन और विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके चिंतन का केंद्र हमेशा मानव कल्याण और समाज में सकारात्मक परिवर्तन रहा है। उन्होंने आलोकजी की पुस्तकों—“Making a Difference”, “Happiness and Well-being” तथा “The Collector’s Diary”—का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पुस्तकें विशेष रूप से सिविल सेवा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए प्रेरणादायक और मार्गदर्शक हैं।इस अवसर पर वक्ताओं ने उनके प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान हुए कुछ महत्वपूर्ण प्रयासों का भी उल्लेख किया,
जिनमें इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन, ट्रांस गंगा सिटी की परिकल्पना, उत्तर प्रदेश को औद्योगिक राज्य बनाने की दिशा में पहल, लखनऊ मेट्रो तथा लखनऊ–आगरा एक्सप्रेसवे जैसे प्रकल्प शामिल हैं। कार्यक्रम के अंत में आलोक रंजन जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस अवसर पर यू.एस.एम. पत्रिका के प्रकाशकों,
संपादक मंडल—श्री उमाशंकर मिश्र, डॉ. प्रदीप दीक्षित, श्री विकास मिश्र—तथा सभी अतिथियों और शुभचिंतकों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने इस विशेषांक के माध्यम से मेरे प्रशासनिक अनुभवों और विचारों को इतने स्नेह और सम्मान के साथ प्रस्तुत किया।
मैं इस विशेषांक के संपादकों, लेखकों तथा सभी आयोजकों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ,
जिन्होंने मेरे प्रशासनिक अनुभवों और विचारों को इतने सम्मान के साथ प्रस्तुत किया।सभी मित्रों, सहयोगियों और शुभचिंतकों का स्नेह और विश्वास मेरे लिए निरंतर प्रेरणा का स्रोत रहा है।
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