एफओसी-इन-सी (वेस्ट) ने वेस्टर्न फ्लीट की तैयारियों की समीक्षा की।
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नेटवर्क केंद्रित क्षमताओं के माध्यम से डब्ल्यूएनसी के उत्तरदायित्व के पूरे क्षेत्र (एओआर) की निगरानी के लिए पश्चिमी बेड़े की क्षमता भी प्रभावी ढंग से साबित हुई।पनडुब्बी रोधी अभियानों में जहाजों, एएसडब्ल्यू सक्षम पी 8 आईविमान और शिपबोर्न हेलीकॉप्टरों द्वारा पनडुब्बियों का पता लगाने के लिए सक्रिय और निष्क्रिय एरेज़ की तैनाती शामिल थी, जिसका समापन टारपीडो फायरिंग में हुआ।
इस अभ्यास ने भारतीय नौसेना के सबसे बड़े एयर स्टेशन आईएनएस हंसा की बेड़े के लिए 24×7 परिचालन करने की अभियानगत क्षमता और तैयारी भी प्रदर्शित हुई। समुद्री गश्ती विमान पी8आई, डोर्नियर और आईएल-38, हेल यूएवी सी-गार्डियन, इंटीग्रल हेलीकॉप्टर सी किंग, कामोव 31, एएलएच व चेतक, और भारतीय नौसेना के लड़ाकू विमान मिग 29 के और भारतीय वायु सेना के सुखोई 30 ने प्रभावी ढंग से निगरानी और कॉम्बैट ऑपरेशन्स में योगदान दिया।
गन, मिसाइल और टारपीडो फायरिंग पूरी तरह से भारतीय नौसेना के “ऑर्डनेन्स ऑन टारगेट” के उद्देश्य पर केंद्रित थी। जहाजों द्वारा मिसाइल, टारपीडो और गन फायरिंग एक यथार्थवादी सामरिक परिदृश्य में उच्च गति एयर/सरफेस/ सब सरफेस लक्ष्यों के विरुद्ध नौसेना की एरिया एवं पॉइंट डिफेंस क्षमताओं को स्थापित करने के लिए थे। इसके अलावा पनडुब्बियों ने टारपीडो फायरिंग की। इन फायरिंग की सटीक सटीकता, निर्बाध और सुरक्षित निष्पादन नेभारतीय नौसेना के शस्त्रागार एवं हथियार प्रणालियों की घातकता और प्रभावशीलता को प्रदर्शित किया जो युद्ध की तैयारी के उच्च मानक को दर्शाता है।
सीएनसी ने भारतीय नौसेना द्वारा परिकल्पित ऑपरेशन्स कीअवधारणा को पूरा करने और राष्ट्र की समुद्री सुरक्षा में योगदान करने हेतु तैयार होने के लिए वेस्टर्न फ्लीट, आईएनएस हंसा और भारतीय वायु सेना के समुद्री पक्ष की सराहना की।
समुद्र में यह जहाज रियर एडमिरल समीर सक्सेना, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग वेस्टर्न फ्लीट की सामरिक कमान के अधीन थे।
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