चिप क्रान्ति: सुनहरे भविष्य का द्वार Made in India चिप्स, संभावनाएँ अपार
|
😊 Please Share This News 😊
|

नई दिल्ली-क्रान्तियाँ अति आवश्यक हैं। इतिहास गवाह है कि विश्व के हर देश को आत्मनिर्भर बनने के लिए अनेकों क्रान्तियों से गुजरना पड़ा है। जिन देशों ने औद्योगिक क्रांति के समय पुरुषार्थ दिखाया, वे आज भी विश्व के राजनीतिक व आर्थिक परिदृश्य में महती भूमिका निभा रहे हैं। भारत की बात करें तो स्वतंत्रता के बाद हरित क्रांति की बदौलत हमने खाद्य सुरक्षा पाई। श्वेत क्रांति न होती तो आज क्या हाल होता?
विश्व का कोई भी देश तीव्र गति से तभी अग्रसर होता है जब उसके नागरिकों में उद्यम की भावना हो, क्रांति का ज़ज्बा हो। उद्यमी बाजार समझे, सरकार आधुनिक तकनीक समझे, दोनों वैश्विक बाजार समझें और बाजार के अनुरूप साहस भरे क्रान्तिकारी निर्णय लें। तभी वह देश किसी एक क्षेत्र में अग्रणी गिना जाता है। ऐसी ही एक उद्यम गाथा आज भारत में लिखी जा रही है। नाम है चिप क्रान्ति।
GenZ और आने वाली GenAlpha+ पीढ़ियों के लिए यह चिप क्रांति मील का पत्थर साबित होगी। क्योंकि आज भारत वैश्विक चिप बाजार में सिर्फ उपभोक्ता नहीं रहा। AI युग में हम न सिर्फ सटीक तथा अतित्वरित गणना करने वाले आधुनिक सुपरकंप्यूटर बना रहे हैं, बल्कि सस्ती दरों पर Made in India चिप्स भी। ये चिप्स घरेलू खपत और वैश्विक बाजार में बढ़ती माँग को देखते हुए बनाई जा रही हैं। किसी भी मशीन के लिए चिप उसका दिमाग होती है। जहाँ भारतीय उद्यमी दुनिया भर के बाजार को ध्यान में रख सभी जरूरी चिप्स बनाने में जुटे हैं, वहीं सरकार व उसके शोध संस्थान सुपर चिप बनाने में लगे हैं ताकि कम दरों पर अति त्वरित व सटीक गणना करने वाले सुपरकंप्यूटर पूरी तरह देश में ही बन सकें।
सितंबर माह की 17 से 19 तारीख के बीच Semicon 2026 प्रदर्शनी में मैंने इस क्रांति के प्रमाण देखे। दिल्ली में लगी इस प्रदर्शनी के कई स्टॉल्स में बेहद सस्ती चिप्स थीं। मैं कई उद्यमियों से मिला। एक भारतीय कंपनी के स्टॉल पर मात्र 100 रुपये की Made in India चिप थी। हमारे घर और दफ्तर को WiFi स्मार्ट बनाने में यह बेहद कारगर है। किसी रिहाइशी सोसाइटी में एक ब्रॉडबैंड कनेक्शन से कई लोगों को WiFi देना हो तो जो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लगती है, उसकी यह मदर चिप है। ऐसी चिप्स अब तक हम आयात करते थे। अब भारत में ही कई मदर चिप्स बनने लगी हैं। अहीसा नाम की यह चिप अब कई देशों में निर्यात भी हो रही है।आज के युवा वैज्ञानिकों को नए इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद सोचने व उन्हें मूर्त रूप देने के लिए कई अद्वितीय चिप्स चाहिए। मोबाइल तथा लैपटॉप कुछ ऐसे ही उत्पाद हैं जो मदर चिप्स की बदौलत ही काम करते हैं। सर्किट में जुड़े अन्य पुर्जों की सहायता से हर चिप उपलब्ध विकल्पों के आधार पर कार्य निष्पादन के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेती है। निर्णय लेने का यही गुण किसी भी चिप को उस डिवाइस का समझदार दिमाग बनाता है। इन्सानों के दिए किसी भी काम को आसानी से व तुरन्त करने में यह एक महत्वपूर्ण कड़ी होती है।
पिछले कई दशकों तक भारत रोजमर्रा के इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में लगने वाली चिप्स देश में नहीं बनाता था। ये विदेशों से आती थीं। कुछ बहुत जरूरी व शोध से जुड़ी चिप्स ही देश में बनती थीं जो राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरिक्ष उपयोग में काम आती थीं। हम मुख्यतः उपभोक्ता थे। किंतु पिछले दो-तीन दशकों में इलेक्ट्रॉनिक बाजार बदला है। तेजी से हर उत्पाद का इलेक्ट्रॉनिकीकरण हुआ है। कारें व बसें अब सिर्फ गाड़ी नहीं हैं। इसके कई भाग इलेक्ट्रॉनिक हैं। यात्रियों को आरामदायक अनुभव देने के लिए कई डिजिटल सुविधाएँ उपलब्ध हैं। चिप इसी डिजिटल क्रांति की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है जो AI युग में किसी भी उत्पाद को स्मार्ट बनाती है। आज चिप अति सटीक गणना कर कम समय में बड़ा काम समझदारी से कर रही है। AI युग में ये बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि कई जटिल प्रश्नों के उत्तर के लिए इन्हें सटीक व त्वरित दोनों होना होता है।
अपने इसी गुण के कारण वैश्विक बाजार में अत्याधुनिक चिप्स की भारी माँग है। मौजूदा AI युग में कोई भी देश नहीं चाहेगा कि रसोई से लेकर सेहत तक, मनोरंजन से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा तक, लगभग सभी क्षेत्रों में प्रयोग हो रही यह चिप वह आयात करे। इसीलिए भारत सरकार ने सेमीकन्डक्टर मिशन चलाया ताकि उद्यमियों को आत्मनिर्भरता की क्रांति करने का मौका मिल सके। परिणाम Semicon 2026 में प्रत्यक्ष दिखे। प्रदर्शनी में देश भर से हजारों युवाओं का पहुँचना एक बेहद सुखद अनुभूति थी। सरकारी उपक्रम भी पीछे नहीं थे। चिप क्रांति के पीछे की उत्कृष्ट शोध करने वाले C-DAC व C-MET के स्टाल आत्मनिर्भरता की क्रान्ति बयां कर रहे थे।
अत्याधुनिक सुपरकंप्यूटर परम विद्या प्रदर्शनी में C-DAC के स्टाल में दिखाया गया था। वहाँ वैज्ञानिकों ने भारतीय सर्वर “रुद्र” भी दिखाया और समझाया कि कैसे भारत लगातार सटीक तथा अति त्वरित होती सुपरकम्प्यूटिंग की बदौलत स्वयं को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के काफी करीब है। ओम नामक माइक्रो प्रोसेसर के बनते ही रुद्र जैसे सर्वर जो देश के शोध छात्रों तक देश-दुनिया के प्रतिष्ठित संस्थानों की जानकारियाँ पहुँचाते हैं, शत प्रतिशत भारतीय हो जाएंगे।
प्रदर्शनी में सूचना प्रौद्योगिकी व इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी अमितेश सिन्हा मिले। उन्होंने बताया कि पिछले करीब पाँच वर्षों में Semiconductor मिशन के तहत काफी काम हुआ है। आज हम एक इन्फ्लेक्शन पॉइंट पर हैं। चिप क्रांति हमारे युवाओं के लिए असीमित द्वार खोलती है। यह सुनहरा अवसर है कि देश के अनेकों क्षेत्रों से विद्वान किसी न किसी तरीके से इस क्रांति से जुड़ें।
चिप्स सचमुच जादुई हैं क्योंकि ये मनुष्य के दिमाग से भी तेज गणना करने में सक्षम हैं। इंजीनियरिंग सोच वाले युवा इन सस्ती चिप्स से अनेकों इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बना कर हमारे घर व कार्यालय को स्मार्ट बना रहे हैं। इसी तरह C-MET पर मैंने भारत में पाई जाने वाली क्रांतिक धातु हाफनियम देखी। इसका एक बहुत छोटा सा टुकड़ा कई लाख का था। इलेक्ट्रॉनिक तकनीक में उपयोग होने वाले पदार्थों की शुद्धता बढ़ाने व हाफनियम जैसे अति महत्व के पदार्थों पर C-MET शोध करता है। महानिदेशक आर रतीश ने बताया कि प्रदर्शनी में कई उद्यमियों ने हाफनियम में रुचि दिखाई। हाफनियम के ऑक्साइड चिप्स में एक अचालक की तरह काम करते हैं। मेमोरी चिप्स में इनका उपयोग होता है। भारत में ही इनके पाए जाने व विकसित होने से वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक जगत में हम आत्मनिर्भर होंगे।
इस प्रकार प्रदर्शनी में भावी पीढ़ियों के लिए उद्यमिता की दृष्टि से बहुत कुछ था। एक चिप ऐसी भी थी जो बिना महँगी मोटर के हर वो काम कर सकती है जो पहले मोटर करती थी। यानि युवा इंजीनियर को रसोई के हल्के मिक्सर, ग्राइंडर या अंडे फेंटने वाली डिवाइस बनानी हो तो अब मोटर के बिना एक सस्ती चिप से ही वह यह कर सकता है। सेहत से लेकर आरामदायक जीवन जीने के लिए सभी क्षेत्रों में उपयोग होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में अनेकों अद्वितीय चिप्स लगती हैं। फिलहाल बाजार में अभी भी विदेशों से, खास तौर पर चीन से ये चिप्स आती हैं। पर आज चिप क्रांति की बदौलत हम रोजमर्रा की जीवनशैली को स्मार्ट बनाने के लिए ऐसी कई चिप्स की मदद ले रहे हैं जो हम भारतीय बना रहे हैं।
Internet of Things की तकनीक पर आधारित कई चिप्स भी प्रदर्शनी में थीं। घर के पर्दों को मोबाइल से खोल-बंद करने वाले उत्पाद की यह मुख्य चिप थी। मैंने एक हजार रुपये मूल्य की एक चिप भी देखी जो सोसाइटी को स्मार्ट बनाती है। नेत्रसेमी नामक भारतीय कंपनी के स्टाल पर यह चिप AI कैमरे से निगरानी रखती है व नियमों का उल्लंघन होने पर कंट्रोल रूम को सूचित करती है। यही कंपनी ऐसी चिप भी बनाती है जो बस या कार के चालक को ऊंघ आते ही सचेत करती है। कार के भीतर लगे AI कैमरों से लगातार चालक पर निगरानी रख कर अलार्म बजाती है ताकि यात्रा सुरक्षित हो। इस चिप के कई अन्य उपयोग भी संभव हैं।
देश के शोध संस्थान और उच्च शिक्षा से जुड़े छात्र कई किस्मों की Made in India चिप्स बनाने के लिए स्वदेशी Supercomputing सुविधा का भी लाभ ले रहे हैं। कुछ उद्यमी अलग-अलग काम करने वाली चिप्स डिजाइन करते हैं। यानि यदि कोई उद्यमी किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद को सोचता है तो उसे मूर्त रूप देने के लिए जो चिप चाहिए, उसे बनवाने वाली भारतीय कंपनियाँ भी मैंने देखीं। सचमुच लगा कि देश में चिप क्रांति हो रही है। अगले कुछ वर्ष भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। अब भारत में बनी चिप्स इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की मदर चिप बन कर लोकप्रिय डिजिटल उपकरणों का समझदार दिमाग बन रही हैं। यह स्थिति युवा व भावी पीढ़ियों के लिए वरदान है। यदि वे उद्यम दिखाएँ तो भारत इलेक्ट्रॉनिक जगत की बड़ी बाजार में धूम मचा देगा।
हम अपनी जरूरतें पूरी करने में तो समर्थ होंगे ही। साथ ही Made in India चिप्स और उनसे बने उत्पाद निर्यात करने की स्थिति में भी होंगे। यह इसलिए भी संभव लगता है क्योंकि एक लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत की विश्वसनीय छवि है। दुनिया का कोई भी देश नहीं चाहेगा कि कंप्यूटर, लैपटॉप, स्मार्टफोन में लगने वाली अति आवश्यक चिप की उसके देश में कमी हो। यहीं भारत के पास मौका है। वह दुनिया, खासकर तृतीय विश्व के देशों को आश्वस्त करता है कि रोजमर्रा के इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की चिप उन्हें मिलती रहेगी। इस दिशा में इंडिया सेमीकन्डक्टर मिशन 2 इस स्वप्न को साकार कर रहा है।
मोबाइल को ही लें। इसका AI सहायक हमारे कहने मात्र से कोई भी कार्य त्वरित गति से कर देता है। पर इसके लिए हमें स्वदेशी भाषाओं पर बना प्रभावी AI Model चाहिए। साथ ही वो महाचिप भी जो आधुनिक तकनीक के साथ सटीक Supercomputing करने में समर्थ हो।
मैं GenX पीढ़ी का हूँ। इसलिए भलीभांति समझता हूँ कि हमारी पीढ़ी के वैज्ञानिकों व उद्यमियों ने पहला सुपर कंप्यूटर परम तब बनाया था जब हमें विदेश से तकनीक देने से मना कर दिया गया था। तकनीक देने से इनकार की चुनौती व तकनीक की आवश्यकता, दोनों ने ट्रांजिस्टर युग में हमारी पीढ़ी से “परम” बनवाया। आज AI युग में चिप क्रांति के माध्यम से हम परम विद्या जैसा सशक्त आधार भावी पीढ़ियों के लिए बना रहे हैं जिस पर हम सभी मिलकर एक समृद्ध भारत बना सकेंगे जो सचमुच जिम्मेदार डिजिटल राष्ट्र होगा।
भविष्य ही बताएगा कि उद्यमिता के पुरुषार्थ से नए भारत की आधारशिला हमारे युवा कैसे रखेंगे। भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स में आत्मनिर्भर तो बनना ही है, साथ में AI युग में सटीक गणना की महारत भी हासिल करनी है ताकि हम विज्ञान को मानवता के कल्याण की दिशा में मोड़ सकें। विनाशकारी हथियारों के लिए भी तकनीक उपयोग में ली जाती रही है। इसीलिए जरूरी है कि भारत जैसा शांतिप्रिय देश तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाए।
दुनिया भर में आम आदमी की कठिनाइयों को नवाचार से दूर करने के लिए जो वैज्ञानिक समझ चाहिए, वह भारत के धनी सांस्कृतिक साहित्य, जीवनशैली, प्रथाओं, चुनौतियों और पुरुषार्थ में आज भी मौजूद है। उसे सिर्फ उस सही माहौल की जरूरत है जिसमें एक जिम्मेदार तकनीक से लैस देश के रूप में भारत की अति विश्वसनीय वैश्विक छवि हो। निस्संदेह चिप क्रांति व भारत के लोगों के पुरुषार्थ से कई सुनहरे अवसरों के द्वार खुलेंगे। नौकरियाँ भी बनेंगी और कठिन जीवन जी रहे लोगों की रोजमर्रा की परेशानियाँ भी सस्ते में कम होंगी। यह तभी होगा जब भारत चिप क्रान्ति को “सन्तुलित विकास” की पारंपरिक व सामूहिक महासमझ देगा।
धर्मेन्द्र तिवारी, IIS
लेखक PIB अधिकारी हैं।
|
व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें |
[responsive-slider id=1466]
