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केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री और जर्मन संघीय संसद की पर्यावरण समिति के बीच बैठक संपन्न हुई।

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 केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव नेआज इंदिरा पर्यावरण भवन, नई दिल्ली में माननीय संसद सदस्य (एमडीबी) श्री हेराल्ड एबनेर की अध्यक्षता में जर्मन संघीय संसदकी पर्यावरण समिति के साथ उपयोगी बैठक की। बैठक में, उन्होंनेवैश्विक पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और अन्य संबंधित चुनौतियोंके साथ-साथ इन चुनौतियों का स्थायी समाधान खोजने के लिएजर्मनी और भारत द्वारा मिलकर काम करने के उपायों के बारे मेंचर्चा की।

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केंद्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव के साथ जर्मन संघीय संसद कीपर्यावरण समिति

बैठक में स्थायी जीवन शैली, सर्कुलर इकोनॉमी, ई-कचरा, जलाशयों का संरक्षण, पेयजल, उर्वरकों की समस्या, शहरी प्रवास, क्षेत्रीय जलवायु कार्ययोजनाओं और उपलब्धियों से संबंधित मुद्दोंपर चर्चा की गई। जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने विशाल आकार औरअधिक जनसंख्या के बावजूद भारत द्वारा किए गए पर्यावरण एवंजलवायु से संबंधित ठोस कार्यों की सराहना की। जर्मनप्रतिनिधिमंडल ने बताया किया कि जर्मनी भारत की जी-20 प्रेसीडेंसी का पूरा समर्थन करता है।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन सेसंबंधित चुनौतियों से निपटने के लिए जर्मनी द्वारा भारत को दिएगए समर्थन की सराहना की। उन्होंने गंगा संरक्षण में जर्मनी केसमर्थन की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत और जर्मनी कोवैश्विक पर्यावरण चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करनाचाहिए।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारतप्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में घरेलू और वैश्विक स्तर परजलवायु को लेकर कई ठोस कार्रवाई कर रहा है। इनमें एनसीएपी, जैव ईंधन, कल्याण योजना, अमृत सरोवर, आरई का 500 गीगावाट लक्ष्य, बीएस-VI, आदि शामिल हैं। श्री यादव ने कहा किभारत हमेशा समाधान का हिस्सा बनने का प्रयास करता है, न किसमस्या का हिस्सा।

श्री यादव ने आईएसए, सीडीआरआई और लीडआईटी जैसीवैश्विक पहलों का नेतृत्व करके जलवायु परिवर्तन से जुड़ीसमस्याओं का समाधान करने के लिए भारत की वैश्विकप्रतिबद्धता के बारे में विस्तार से बताया और उन्होंने आईएसए मेंशामिल होने के लिए जर्मनी को विशेष रूप से धन्यवाद दिया।उन्होंने सचेत खपत और सर्कुलर इकोनॉमी की आवश्यकता परजोर देते हुए कहा कि भारत तीन पहलुओं-कानूनी, क्षमता औरबाजार अर्थव्यवस्था से सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा दे रहा है।

जर्मन प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए, केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि जलवायु संबंधी समस्याओं कोलेकर भारत की कार्रवाई सीबीडीआर-आरसी के सिद्धांत परआधारित है। उन्होंने कहा कि भारत ने अक्षय ऊर्जा और ऊर्जा कीतीव्रता पर देशों के लिए निर्धारित (एनडीसी) में उल्लिखित लक्ष्योंके पहले चरण को समय से पहले हासिल कर लिया। इसकेअलावा, भारत ने मिशन लाइफ के लॉन्च के साथ इन लक्ष्यों कोआगे बढ़ाया है।

बैठक का समापन करते हुए, दोनों पक्षों ने पर्यावरण और जलवायुपर भारत-जर्मन द्विपक्षीय सहयोग के योगदान को महत्वपूर्णबताया, और इसे और मजबूत करने के लिए सहमति व्यक्त की।साथ ही, दोनों देशों – भारत और जर्मनी द्वारा जलाशयों के संरक्षण, सर्कुलर इकोनामी तथा इलेक्ट्रॉनिक कचरे से जुड़ी समस्याओं केसमाधान की दिशा में मिलकर काम करने के बारे में चर्चा की।

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