देश की अलख जगाती मंजू लोढ़ा की पुस्तक – भारत भाग्य निर्माता, अनकही कहानियां।
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आजादी का अमृत महोत्सव में देश की सुप्रसिद्ध समाजसेविका, लेखिका तथा कवयित्री श्रीमती मंजू मंगलप्रभात लोढ़ा की 11 वीं पुस्तक भारत भाग्य निर्माता, अनकही कहानियां, अपने आप में भारत की गौरवशाली तथा अनंत विरासत की जीती जागती तस्वीर है। आर्यावर्त से भारत तक की अमिट ऐतिहासिक लक्ष्मण रेखा के रूप में सजी हुई पुस्तक कई मामलों में अपनी एक विशिष्ट पहचान छोड़ती नजर आ रही है। राष्ट्रप्रेम और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना से दूर जा रहे युवाओं के लिए यह पुस्तक किसी अनमोल तोहफे से कम नहीं है। अतीत के ज्ञान के बिना प्रगति संभव नहीं है। पुस्तक के माध्यम से विश्व धर्मगुरु की तरफ एक बार फिर उन्मुख भारत की युवा पीढ़ी को अतीत की सुनहरी खिड़की से, सरल और सुबोध भाषा में देश के गौरवशाली और प्रेरणादायक महापुरुषों को जानने का स्वर्णिम अवसर है।
मीडिया प्रभारी माणकमल भंडारी ने बताया कि गागर में सागर को चरितार्थ करने वाली इस पुस्तक में 2500 वर्षों की महान विभूतियों की, फोटोग्राफ के साथ दी गई जानकारी विभिन्न पहलुओं से गुजरते हुए देश प्रेम की अलख जगाते नजर आती है। वैदिक सभ्यता से प्रारंभ पुस्तक में आर्यावर्त से लेकर भारत तक के उन तमाम महापुरुषों की भी जानकारी दी गई है, जिनके बारे में आज की पीढ़ी वाकिफ नहीं है। पुस्तक अपने आप में देश के महापुरुषों के एक संग्रहालय की तरह है। 2500 वर्षों की लंबी ऐतिहासिक यात्रा को एक पुस्तक में कलमबद्ध करना किसी अजूबे से कम नहीं है। देश का भविष्य कहे जाने वाले बच्चों को अपने देश की महान विभूतियों, संतो और महापुरुषों की जानकारी अत्यावश्यक है।
श्रीमती मंजू मंगलप्रभात लोढ़ा की इस पुस्तक को पाठ्यक्रम में शामिल कर भारत सरकार आसानी से बच्चों को देश की स्वर्णिम अतीत से जोड़ सकती है। पॉपुलर पब्लिशर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक के प्रकाशक एवं संपादक सुधीर गोकर्ण, स्नेहा गोकर्ण तथा डॉ सोनाली गोकर्ण के अनुसार यह पुस्तक पावन भारत भूमि के अनन्य महापुरुषों, योद्धाओं, वैज्ञानिकों, क्रांतिकारियों, स्वतंत्रता सेनानियों एवं अन्य सामाजिक सुधारकों के बारे में कुछ अनकहे या अनछुए प्रसंगो, घटनाओं पर प्रकाश डालती है।
पुस्तक की लेखिका श्रीमती मंजू मंगल प्रभात लोढ़ा के अनुसार असंभव सा लगने वाला यह काम उनके पारिवारिक सहयोग तथा सहयोगी आत्मीय जनों के आशीर्वाद से संभव हुआ है। पुस्तक की कीमत 1499 रुपए रखी गई है।
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