गुरु राजेंद्रसूरीश्वर जन-जन की आस्था के प्रतीक हैं : मंगलविजय म. सा.।
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भीनमाल। स्थानीय महावीर स्वामी जैन मंदिर प्रांगण में गुरुवार को गुरु सप्तमी के उपलक्ष में विभिन्न धार्मिक आयोजन के साथ गुरुदेव राजेन्द्र सूरि की 196 वीं जन्म एवं 116 वीं स्वर्गारोहण पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया । मीडिया प्रभारी माणकमल भंडारी ने बताया कि दादा गुरुदेव राजेन्द्र सूरीश्वर म.सा. का जन्म एवं स्वर्गारोहण गुरु सप्तमी का आयोजन भीनमाल सकल संघ के तत्वावधान में किया गया । स्थानीय महावीर स्वामी जैन मंदिर परिसर में आयोजित धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए मंगलविजय म सा ने गुरु राजेन्द्र के गुण गाण करते हुए कहा कि आज ही के दिन विक्रम संवत 1883 की पौष सुदी सप्तमी गुरुवार के दिन भरतपुर नगर में ॠषभदास पारेख के घर रत्नराज नामक एक बालक का जन्म हुआ । जिसने आगे चलकर अपने जप, तप, त्याग और संयम के बलबूते पर जिन शासन की महानतम विभूतियों में स्थान प्राप्त कर अपना नाम सदा के लिए अमर कर दिया । उसी महापुरुष को हम आज दादा गुरु राजेंद्र सूरीश्वर के नाम से याद कर रहे हैं। दादा गुरुदेव की माता का नाम केसरबाई था। उस समय उनके छोटे-छोटे राज्यों में बंटे भारत के राजस्थान, गुजरात, मारवाड़, मेवाड़, मालवा आदि कई प्रांतों के राजा महाराजा बादशाह व नवाबों को अपने तपोबल से प्रभावित कर जन उपयोगी कार्य करने में राजेंद्र सूरीश्वर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इन्होंने जन चेतना जगाते हुए भारतीय जीवन की प्रद्धति व संस्कृति को अजर अमर बनाने के लिए तपोबल का शंखनाद किया। उन्होंने बाल्यावस्था में अपने सांसारिक के नाम रत्नराज नाम से शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अपने जीवन में कुल 64 ग्रंथों की रचना करते हुए अपने सबसे विलक्षण व अनोखी रचना अभियान राजेंद्र कोष को पूरे विश्व में प्रशंसनीय सिद्ध कर दिया। लगभग दस हजार पत्रों वाले इस सप्तकोशी ग्रथ में संस्कृत प्राकृत भाषा में संपूर्ण अर्थ के साथ रचे गए। जिनके लिए विश्वभर के विद्वानों ने इस ग्रंथ की प्रशंसा कर इसे विश्वकोष की उपमा से अलंकृत किया।
इस अवसर पर करडा चौराहे पर स्थित दादावाडी से गुरूदेव की भव्य शोभा निकाली गई जो शहर के मुख्य मार्ग से खारी रोड़, गणेश चौक, वाराहश्याम मंदिर, भंडारी स्ट्रीट, पीपली चौक होते हुए महावीर स्वामी जैन मंदिर परिसर में पंहुच । वहां पर धर्म सभा का आयोजन किया गया । दोपहर में गुरु पद महापूजन के आयोजन में बड़ी संख्या में महिलाओं एवं बालिकाओं ने भाग लिया । गुरु राजेंद्रसूरि जन्म जयंती के उपलक्ष में सभी जैन समाज के लिए स्वामीवात्सल्य का आयोजन भी किया गया । शाम को महावीर स्वामी एवं गुरु राजेंद्रसूरि की 108 दीपक की आरती भी की गई । जिसमें बड़ी संख्या में जैन समाज के लोगों ने भाग लिया ।
गुरु सप्तमी के कार्य क्रम के दौरान राजेन्द्र जैन जागृति भक्त मंडल के सदस्यों सहित पृथ्वीराज कावेडी, मदनलाल जैन, भंवरलाल कोमता, देवीचंद सालेचा, माणकमल भंडारी, भंवरलाल कांनूगो, मुकेश बाफना, हेमराज मेहता, ललित संघवी, हुकमराज, सुरेश दोसी, देवीचंद वर्धन, पप्पु जाणीकार, सुखराज भीमाणी, मनोहरमल, नितेश गुरुजी, राकेश बोहरा, पृथ्वीराज नाहर, कांतिलाल, दिनेश जैन, रमेश बोहरा, धनराज जैन, मीठालाल, प्रकाशचंद, दिलीप, महावीरकुमार, सुरेन्द्र मेहता, मोहनलाल, मदनलाल, शैलेष कोठारी सहित कई लोग उपस्थित थे ।
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