राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली में आज (7 जनवरी, 2023) डिजिटल इंडिया पुरस्कारों के सातवां संस्करण केविजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए।
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राष्ट्रपति ने कहा कि सामाजिक न्याय डिजिटल नवाचारों का प्रमुखउद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत एक ज्ञान अर्थव्यवस्थाके रूप में तभी विकसित होगा जब प्रौद्योगिकी के उपयोग केमाध्यम से डिजिटल असमानता को काफी हद तक पाट दियाजाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत डिजिटल अंत्योदयकी हमारी यात्रा में समाज के कमजोर और हाशिए पर रह रहे वर्गोंको शामिल करने, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारोंको मजबूत करने का सही उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
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राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के डिजिटल परिवर्तन की कहानीनवाचार, कार्यान्वयन और समावेश की कहानी है। उन्होंने दुनियाको अधिक सुलभ और न्यायसंगत स्थान बनाने के लिए अभिनवसमाधान खोजने के लिए सहयोगी मंच बनाने की आवश्यकता परबल दिया।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों ने दुनियाको भारतीय प्रतिभा के मूल्य का एहसास कराने में उल्लेखनीयकाम किया है। उन्होंने कहा कि हमें प्रचलित नीतियों का लाभउठाना चाहिए और नई मेड-इन-इंडिया तकनीकों का निर्माण करकेदेश को सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर उत्पादों के लिए वैश्विकमहाशक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए ईकोसिस्टम को सक्षमबनाना चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि नया ज्ञान, अंतर्दृष्टि और इस प्रकार समाधानबनाने के लिए डेटा एक आधारशिला है और आवेदन के पूरे नएक्षेत्रों की ओर ले जाता है।
हमें सरकारी डेटा के उपयोग कोलोकतांत्रित बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि उत्साहीयुवा इस प्रौद्योगिकी का उपयोग स्थानीयकृत डिजिटल समाधानबनाने के लिए कर सकें।
राष्ट्रपति ने सरकारी संस्थाओं द्वारा जमीनी स्तर पर औरसार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप्स केसहयोग से की गई अभिनव पहलों को देखकर प्रसन्न व्यक्त की।उन्होंने कहा कि हमें सभी नागरिकों के जीवन को आसान बनाने केलिए अभिनव समाधान प्रस्तुत करने के लिए स्वयं के लिए चुनौतीप्रस्तुत करनी होगी, चाहे वह न्यायपालिका हो, भूमि पंजीकरण हो,उर्वरक हो या सार्वजनिक वितरण प्रणाली हो।
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