राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु आज लखनऊ में बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह में सम्मिलित हुईं।
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राष्ट्रपति ने कहा कि बाबासाहेब डॉ. भीवराव अम्बेडकर मानते थे कि गरीब और जरूरतमंद लोगों को शिक्षा प्रदान करना विश्वविद्यालयों का बुनियादी कर्तव्य है। बाबासाहेब का कहना था कि शैक्षिक संस्थानों को बिना किसी भेदभाव के सबको बेहतर शिक्षा प्रदान करनी चाहिये। राष्ट्रपति ने कहा कि बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय 50 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करके अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के शिक्षार्थियों की उन्नति के लिये सराहनीय काम कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह विश्वविद्यालय देश और प्रदेश में बाबासाहेब के आदर्शों के अनुरूप शिक्षा का प्रसार करता रहेगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षार्थियों के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण अवसर होता है। आज के दिन उन्हें अपने अनेक वर्ष के कठिन परिश्रम का फल प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर वे शिक्षार्थियों को यह सलाह देंगी कि वे अपने जीवन में जो भी बनना चाहते हैं, उसके लिये वे आज से काम शुरू कर दें तथा अपने लक्ष्य को हमेशा अपने ध्यान में रखें। उन्होंने इच्छा व्यक्त की कि कुछ शिक्षार्थियों को शिक्षक/प्रोफेसर बनना चाहिये। राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा और शिक्षण, दोनों एक-दूसरे से जुड़े हैं। सर्वश्रेष्ठ शिक्षा प्रणाली के लिये, सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों की जरूरत होती है। हमारे प्रतिभावान शिक्षार्थियों को शिक्षा का व्यवसाय अपनाकर देश के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिये अमूल्य योगदान करना चाहिये।
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि आज यहां जो शिक्षार्थी एकत्र हुये हैं, वे शिक्षा व ज्ञान के बल पर अपने जीवन में खूब प्रगति करेंगे।
लेकिन इसके साथ ही, उन्हें हमारे मूल्यों और संस्कृति से भी जुड़ा रहना होगा; तभी वे एक सार्थक और संतोषी जीवन जी पायेंगे। राष्ट्रपति ने शिक्षार्थियों को सलाह दी कि वे हमेशा उत्कृष्टता प्राप्त करने का प्रयास करते रहें। उन्होंने कहा कि जब भी संकट की घड़ी आये, तो समाधान खोजने पर विचार करें और उसे अवसर की तरह समझें। इससे उनके व्यक्तित्व का विकास होगा।
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