केंद्रीय कृषि मंत्री श्री तोमर ने किया वृहद पूसा कृषि विज्ञान मेले का शुभारंभ।
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श्री तोमर ने कहा कि किसानों के परिश्रम, वैज्ञानिकों की कुशलता व सरकार की किसान हितैषी नीतियों के कारण हमारी कृषि दुनिया में अव्वल है। देश में खाद्यान्न व बागवानी एवं सम्बद्ध क्षेत्रों में भरपूर उत्पादन हो रहा है और भारत हर क्षेत्र में अग्रणी अवस्था में आ रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हमारे देश की खेती और उन्नत हो, इस दिशा में आगे भी सभी मिलकर काम करेंगे। कृषि क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों का सामना व समाधान करना सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कृषि क्षेत्र की प्रगति के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), इसके संस्थान व कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के वैज्ञानिकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि किसानों ने इनके अनुसंधान को खेती में अपनाया, जिसके कारण कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ी है और इसका फायदा देश की अर्थव्यवस्था को भी मिल रहा है। दुनिया के राजनीतिक मंच पर भारत की साख बढ़ रही है, हमसे अपेक्षा भी बढ़ी है, ऐसे में हम सबकी जवाबदारी और बढ़ जाती है। आज भारत का परिदृष्य बदल गया है, अब भारत मांगने वाला देश नहीं है, बल्कि दुनिया हमसे सहयोग की अपेक्षा करती है।
केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने कहा कि खेती को उन्नत बनाने एवं किसानों के कल्याण के लिए मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, 10 हजार नए कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन, 1 लाख करोड़ रु. का कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड जैसी अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं प्रारंभ की है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का भी मिलकर सामना व समाधान करने पर जोर दिया।
श्री तोमर ने प्रगतिशील समर्पित किसानों को पुरस्कार प्रदान किए व प्रकाशनों का विमोचन किया। मेले में प्रमुख तकनीकों की विषयगत प्रदर्शनियां लगाई गई है, वहीं शोध संस्थानों, स्टार्टअप व उद्यमियों के स्टॉल भी लगे है, जिनका श्री तोमर ने अवलोकन किया व पूसा संस्थान के खेत भी देंखे। मेले में गेहूं, सरसों, चना, सब्जियों, फूलों, फलों की महत्वपूर्ण किस्मों का जीवंत प्रदर्शन किया गया है। किसानों, उद्यमियों, इनपुट एजेंसियों के स्टॉल भी है, वहीं किसान परामर्श स्टॉल किसानों की समस्याओं के समाधान में मदद कर रहे हैं। कार्यक्रम में आईसीएआर के महानिदेशक व डेयर के सचिव डा. हिमांशु पाठक, आईएआरआई के निदेशक डा. ए.के. सिंह, डा. रवींद्र पड़ारिया सहित अन्य अधिकारी, वैज्ञानिक एवं बड़ी संख्या में किसानबंधु उपस्थित थे।
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