नमस्कार हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 97826 56423 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय अभिलेखागार में “महिलाएं और राष्ट्र निर्माण: 1857 से गणतंत्र तक” प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। – Raj News Live

Raj News Live

Latest Online Breaking News

श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय अभिलेखागार में “महिलाएं और राष्ट्र निर्माण: 1857 से गणतंत्र तक” प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।

😊 Please Share This News 😊
राष्ट्रीय अभिलेखागार के 133वें स्थापना दिवस के अवसर पर श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय अभिलेखागार में “महिलाएं और राष्ट्र निर्माण: 1857 से गणतंत्र तक” प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।  इस अवसर पर श्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम, जिसमें महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, के गुमनाम नायकों के योगदानों को सामने लाने का विचार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का था। उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शनी में राष्ट्र निर्माण और 1857 से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक में महिलाओं के योगदान को रोचक तरीके से दर्शाया गया है। दुर्गावती देवी और कस्तूरबा गांधी का उदाहरण देते हुए, श्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि यह प्रदर्शनी उनके योगदान के महत्वपूर्ण एवं अज्ञात पहलुओं पर प्रकाश डालती है।

यह प्रदर्शनी राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में महिलाओं के योगदान को प्रदर्शित करने का एक प्रयास है। चाहे वह दमनकारी औपनिवेशिक शासन से आजादी के लिए भारत का संघर्ष हो, बाल-विवाह एवं अस्पृश्यता जैसी सामाजिक बुराइयों का उन्मूलन हो, महिलाओं की शिक्षा को सुविधाजनक बनाना हो या स्वतंत्र भारत के लिए संविधान का निर्माण हो – महिलाएं हमेशा सबसे आगे रहीं और उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता की पहली लड़ाई से लेकर भारतीय गणतंत्र की घोषणा तक की राह में अपनी अमिट छाप छोड़ी।

यह प्रदर्शनी अभिलेखीय भंडार के पिटारे यानी सरकार की आधिकारिक फाइलों, प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों के निजी कागजातों और साथ ही एनएआई पुस्तकालय में रखी दुर्लभ पुस्तकों के समृद्ध संग्रह से निकाले गए मूल दस्तावेजों का एक संग्रह प्रस्तुत करती है।

इस प्रदर्शनी में भारत के राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में जानी-मानी, अपेक्षाकृत कम ज्ञात के साथ-साथ अनजान एवं गुमनाम महिलाओं के योगदान शामिल हैं। इसमें 1857 से लेकर 1950 तक की 93 से अधिक वर्षों की यात्रा शामिल है। इन महिला हस्तियों का संबंध विविध पृष्ठभूमि से था और वे विविध पेशे से जुड़ी हुई थीं। उनकी पहचान स्वतंत्रता सेनानी, सैनिक (आईएनए), समाज सुधारक, शिक्षाविद और साहित्यकार के रूप में की गई थी।

यह प्रदर्शनी 30 अप्रैल 2023 तक शनिवार, रविवार और राष्ट्रीय अवकाश सहित प्रत्येक दिन सुबह 10:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक जनता के देखने के लिए खुली रहेगी।

राष्ट्रीय अभिलेखागार संस्कृति मंत्रालय के अधीन एक संबद्ध कार्यालय है। वर्तमान में राष्ट्रीय अभिलेखागार में सार्वजनिक अभिलेखों के 18.00 करोड़ से अधिक पृष्ठों का संग्रह उपलब्ध है जिनमें फाइलें, खंड, मानचित्र, भारत के राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृत विधेयक, संधियां, दुर्लभ पांडुलिपियां, प्राच्य अभिलेख, निजी कागजात, मानचित्र अभिलेख (कार्टोग्राफिक रिकॉर्ड), राजपत्रों एवं विवरणिकाओं का महत्वपूर्ण संग्रह, जनगणना के रिकॉर्ड, विधानसभा एवं संसद की बहसें, निषिद्ध साहित्य, यात्रा वृत्तांत आदि शामिल हैं। प्राच्य अभिलेखों का एक बड़ा हिस्सा संस्कृत, फारसी, ओडिया आदि भाषाओँ में है।

व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें 

स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे

Donate Now

[responsive-slider id=1466]
error: Content is protected !!