मन सभी समस्याओं का समाधान जानता है, पर करता नहीं : परम आलय ।
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जीवन को विकसित करने के सूत्र समझाने वाले सन टू ह्यूमन के तत्वावधान में चल रहे नए दृष्टिकोण वाले शिविर में परम आलय ने कहा कि मन सभी समस्याओं का समाधान जानता है, लेकिन उसका उपयोग करना नही आता। हमने मन और चेतना को भी शरीर मान लिया, जबकि इसके फीचर्स अलग अलग होते है। परम आलय ने कहा कि हम मन के केवल एक ही आयाम को जानते है । मेरा मकान, मेरी दुकान, मेरी गाड़ी वाला भाव जब तक रहेगा अर्थात केवल पदार्थ की तरफ दौड़ रहेगी । तब तक जीवन की यात्रा एक टांग पर चलने जैसी होती है और एक टांग पर चलने वाला व्यक्ति आखिर कब तक अपनी मंजिल पा सकेगा।
उस मंजिल का अर्थ है, मनुष्य जन्म लेने का एक मात्र लक्ष्य, जहां से हम आए है, उस पते को जानना। परम आलय ने कहा कि मन का नियंत्रण नहीं करना है बल्कि अपनी समझ बढ़ाकर मन की शक्तियों को विकसित करना है। यह यात्रा शरीर शुद्धि से आरंभ होती है। शिविर के दौरान साधकों को नृत्य, ध्यान और व्यायाम के छोटे छोटे प्रयोग भी करवाए गए। साथ ही शिविर में सभी लोगों के लिए ऊर्जावान नाश्ता का प्रबंधन भी किया गया । शिविर संयोजक कन्हैयालाल खंडेलवाल ने सभी का आभार व्यक्त किया।
मीडिया प्रभारी माणकमल भंडारी ने बताया कि मां मैत्रयी, पूर्ण, तारिणी और उनके साथ आए प्रशिक्षित परम मित्रों ने लोगो की नाश्ते, भोजन, बीमारी, शरीर सम्बन्धी समस्याओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
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