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ऊर्जा एवं जलवायु पर मेजर इकोनॉमीज फोरम (एमईएफ) के नेताओं ने संयुक्त कार्रवाई बढ़ाने की जरूरत के साथ जलवायु परिवर्तन को सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक के रूप में मान्यता दी।

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अमेरिका द्वारा 20 अप्रैल को ऊर्जा एवं जलवायु परिवर्तन पर मेजर इकोनॉमीज फोरम (एमईएफ) के नेताओं की एक वर्चुअल बैठक बुलाई गई। इस बैठक की अध्यक्षता अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने की और इसमें दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों एवं मंत्रियों ने हिस्सा लिया। ये समूह दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, मिस्र, यूरोपीय आयोग, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, सऊदी अरब, तुर्किए, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन शामिल हैं।इस बैठक का विषय अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के कार्यकारी निदेशक डॉ. फतह बिरोल द्वारा निर्धारित किया गया था। उन्होंने वैश्विक तापमान में हो रही बढ़ोतरी को सीमित करने के लिए जलवायु परिवर्तन के खिलाफ कदम उठाने पर जोर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के एलआईएफई यानी पर्यावरण के लिए जीवन शैली के वैश्विक आह्वान का उल्लेख किया। साथ ही इसकी प्रासंगिकता पर भी प्रकाश डाला।

एमईएफ के सभी नेताओं ने जलवायु परिवर्तन को सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया और इससे निपटने के लिए संयुक्त कार्रवाई को बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। सभी नेताओं ने मंच को उनके देशों द्वारा वित्रिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग जलवायु कार्रवाई की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन और श्रम एंव रोजगार मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे भारत वैश्विक औसत के करीब एक-तिहाई प्रति व्यक्ति उत्सर्जन के साथ जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों में सबसे आगे खड़ा है।

उन्होंने ऊर्जा, परिवहन, शिपिंग, हाइड्रोफ्लोरोकार्बन जैसे क्षेत्रों से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए भारत की पहलों और कॉर्बन को नियंत्रित करने वाले उपयोग एवं भंडारण पर प्रकाश डाला। जलवायु पूंजी के महत्व को स्वीकार करते हुए उन्होंने गरीबी घटाने और एसडीजी पर ध्यान केंद्रित करने जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए बैलेंस शीट आप्टमाइजेशन यानी अनुकूलन और अतिरिक्त पूंजी प्रवाह के माध्यम से एमडीबी की वित्तीय क्षमता को मजबूत करने के प्रस्तावित प्रयासों का भी समर्थन किया।

अपने भाषण के अंत में केंद्रीय मंत्री ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए व्यक्तिगत व्यवहार परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित करते हुए एलआईएफई यानी पर्यावरण के लिए जीवन शैली के महत्व को दोहराया।

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