108 कुण्डीय महायज्ञ, भोजन प्रसादी व भजन संध्या का हुआ भव्य आयोजन ।
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भीनमाल । स्थानीय नीलकंठ महादेव मंदिर प्रांगण में 108 कुण्डीय महायज्ञ, भव्य भजन संध्या व भोजन प्रसादी का आयोजन समस्त हिन्दु समाज के सानिध्य में सनातन संस्कृति जागरण संघ द्वारा किया गया। सनातन संस्कृति जागरण संघ ने जातिवाद व जातिगत भेदभाव मुक्त हिंदू समाज की स्थापना, व्यसन मुक्ति, लोगों में सनातन धर्म व संस्कृति के प्रति श्रद्धा व निष्ठा का भाव जागृत करना तथा अपने पिछड़े व अक्षम बंधुओं की स्थिति में सुधार हेतु शिक्षा व संस्कारों का प्रसार करना आदि लक्ष्यों को आगे रख कर इस वृहद यज्ञ कार्यक्रम का आयोजन किया । जिसमें समस्त हिंदू समाज के लगभग 1000 लोगों ने भाग लिया । करीब इतने ही लोगों ने इस कार्यक्रम में श्रोता के रूप में उपस्थिति दी।
यज्ञ कार्यक्रम ब्रह्मा माऊन्ट आबू स्थित आर्ष गुरुकुल महाविधालय के अध्यक्ष आचार्य ओमप्रकाश महाराज व पंडित केशवदेव ने यज्ञ संपन्न करवाया । यज्ञ संपन्न होने के बाद अतिथियों का साफा, माला आदि के द्वारा स्वागत सम्मान किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आर्य समाज के प्रदेश अध्यक्ष आर्य किशनलाल गहलोत ने अपने वक्तव्य में सर्व हिंदू समाज को जोड़ने की महती आवश्यकता पर जोर दिया तथा भारत भर में ऐसे आयोजनों की आवश्यकता बताई । कार्यक्रम के अध्यक्ष मुफतसिंह ने अपने अध्यक्षीय भाषण में महाराणा प्रताप द्वारा सर्व समाज को साथ लेकर युद्ध जितने की घटना पर बात कहते हुए भील समाज को महाराणा द्वारा राणा की उपाधी देने की बात कही ।
उन्होंनें समरस समाज की स्थापना पर जोर दिया। विशिष्ठ अतिथि आर्य प्रतिनिधि सभा जयपुर के कोषाध्यक्ष आर्य जयसिंह पालडी ने समरस समाज की स्थापना में महर्षि दयानंद सरस्वती व उनके द्वारा स्थापित आर्य समाज की भूमिका पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत सह संयोजक देवेन्द्र जसोल ने हिंदू समाज के इतिहास से अनगिनत सामाजिक समरसता के उदाहरण देकर समाज को एक करने पर जोर दिया एवं ऐसे जन अभियानों को पूरे भारत में फैलाने की बात रखी। यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य ओमप्रकाश महाराज ने समाज के विघटन को ही भारत की दुर्गति का कारण बताते हुए महाभारत से उदाहरण देते हुए सामाजिक एकता व सद्भाव को जरूरी बताया । उन्होंनें महर्षि दयानंद के विचारों का अनुकरण करने की बात कही। संगठन के मीडिया प्रभारी माणकमल भंडारी ने बताया कि यज्ञ के बाद प्रवचन, भोजन प्रसादी का कार्यक्रम रहा । जिसमें याज्ञिकों व श्रोताओं के अलावा दर्शनार्थियों व संगठन के सभी सदस्यों ने भाग लिया । भोजन प्रसादी के पश्चात भजनोपदेशक केशवदेव व आर्ष गुरुकुल महाविद्यालय के ब्रह्मचारियों द्वारा राष्ट्र भक्ति व ईश्वर भक्ति के भजनों की सुन्दर प्रस्तुति दी गई, जिससे श्रोता मंत्र मुग्ध हो गए। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को लेकर नगर में चर्चा थी कि इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने से समाज में भाईचारा के भावों में वृद्धि होगी तथा समरसता का माहौल बनेगा ।
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