नमस्कार हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 97826 56423 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , 22वें विधि आयोग ने रिपोर्ट सौंपी। – Raj News Live

Raj News Live

Latest Online Breaking News

22वें विधि आयोग ने रिपोर्ट सौंपी।

😊 Please Share This News 😊
कर्नाटक उच्च न्यायालय (धारवाड़ पीठ) ने 9 नवंबर, 2022 को विधि आयोग को लिखे एक पत्र में आयोग से यौन संबंधों के लिए सहमति की आयु मानदंड पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है। 16 साल से अधिक उम्र की नाबालिग लड़कियों के प्यार में पड़ने, भागने और किसी लड़के के साथ यौन संबंध बनाने के मामलों की संख्या बढ़ रही है, जिससे यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (‘पोक्सो अधिनियम‘) और/या भारतीय दंड संहिता, 1860 के प्रावधान लागू होते हैं, की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए सहमति के लिए आयोग से आयु मानदंड पर पुनर्विचार करने के लिए कहा गया था। आयोग को माननीय मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (ग्वालियर पीठ) से भी 19 अप्रैल, 2023 के पत्र के माध्यम से एक संदर्भ प्राप्त हुआ जिसमें न्यायालय ने आयोग का ध्यान आकर्षित किया है की किस प्रकार अपने वर्तमान रूप में, पोक्सो अधिनियम को लागू करने के तरीके से वैधानिक बलात्कार के मामलों में, जहां वास्तविक सहमति दी जाती है, घोर अन्याय की स्थिति उत्पन्न होती है। न्यायालय ने आयोग से पोक्सो अधिनियम में संशोधन का सुझाव देने का भी आग्रह किया, जिसमें विशेष न्यायाधीश को उन मामलों में वैधानिक न्यूनतम दंड न देने की विवेकाधीन शक्ति प्रदान की जाए जहां लड़की की ओर से वास्तविक सहमति स्पष्ट हो या जहां इस तरह के रिश्तों की परिणति विवाह, बच्चों के साथ या बिना बच्चों के, के रूप में हुई हो।विद्यमान बाल संरक्षण कानूनों, अलग अलग निर्णयों की सावधानीपूर्वक समीक्षा करने एवं हमारे समाज को प्रभावित करने वाली बाल शोषण, बच्चों की तस्करी और बाल वेश्यावृत्ति के अपराधों पर विचार करने के बाद, आयोग का स्पष्ट रूप से मानना है कि पोक्सो अधिनियम के तहत सहमति की विद्यमान उम्र के साथ बदलाव करना उचित नहीं है। बहरहाल, इस संबंध में, प्रस्तुत किए गए सभी विचारों और सुझावों पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद, आयोग यह आवश्यक समझता है कि उन मामलों में स्थिति को सुधारने के लिए पोक्सो अधिनियम में कुछ संशोधन लाने की आवश्यकता है जिनमें 16 से 18 वर्ष की उम्र के बच्चों की तरफ से वास्तव में मौन स्वीकृति है, हालांकि कानून में सहमति नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारी सुविचारित राय में, ऐसे मामलों को उतनी सख्ती से निपटाए जाने की आवश्यकता नहीं है जितनी उन मामलों की, जिन्हें आदर्श रूप से पोक्सो अधिनियम के तहत आने वाले मामलों के रूप में कल्पना की गई थी। इसलिए, आयोग ऐसे मामलों में दंड के मामलों में निर्देशित न्यायिक विवेक को लागू करना उचित समझता है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कानून संतुलित है और इस प्रकार बच्चों के सर्वश्रेष्ठ हितों की रक्षा होगी। तदनुसार, रिपोर्ट संख्या 283 शीर्षक ‘‘यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा अधिनियम, 2012 के तहत सहमति की आयु‘‘ 27.09.2023 को कानून एवं न्याय मंत्रालय के कानूनी मामले विभाग को प्रस्तुत की गई।

व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें 

स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे

Donate Now

[responsive-slider id=1466]
error: Content is protected !!