सिणधरा बांध प्रभावित किसान संघर्ष समिति का अनोखा धरना-प्रदर्शन ।
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भीनमाल । सिणधरा बांध से बांडी नदी में पानी छोड़ने, जल वितरण कमेटी का पुनर्गठन करने और मछलियों के ठेके पर रोक लगाने की मांग को लेकर सिणधरा बांध प्रभावित किसान संघर्ष समिति का अनोखा धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम रखा गया ।सामाजिक कार्यकर्ता श्रवणसिंह राठौड़ ने बताया कि इस बार भरपूर बारिश हुई है। इस वजह से सिणधरा बांध पूरी तरह भर चुका है। बारिश होने से बाँध गत 26 जुलाई को ओवरफ्लो हुआ था । इस वजह से बांडी नदी में पानी आया है। नदी में पानी होने की वजह से अब बांध से पानी छोड़े जाने पर पर ज्यादा गांवों को फायदा मिल सकेगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और तत्कालीन अधिकारियों के व्यक्तिगत स्वार्थ और दूरदर्शिता की कमी के चलते 1998 से 2008 के बीच बांडी नदी पर बिना जरूरत के ये सिणधरा बांध बना दिया गया। बांध की वजह से नदी का प्राकृतिक बहाव बन्द हो गया। सिर्फ चार गांवों में बांध के पानी से सिंचाई करने के झूठे सपने दिखाकर 120 गांवों के लाखों किसानों को उनके हक का पानी छीनकर सरकार ने बर्बाद कर दिया। जल संसाधन विभाग के अधिकारी अब भी जन भावना को नहीं समझ रहे हैं। पिछले 16 वर्षों में एक- दो साल अपवाद को छोड़कर नदी के बहाव क्षेत्र में आने वाले 120 गांवों में भूमिगत जल रिचार्ज होना बंद हो गया है। उसकी असली वजह बिना गेट वाला ये बांध है। नहर क्षतिग्रस्त होने की वजह इस बांध के पानी का आज तक कोई उपयोग नहीं हुआ है। पिछली बार नहर के निर्माण में भ्रष्टाचार करके करोड़ों रुपये जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने हड़प लिए। विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद भी अफसरों की सेटिंग की वजह से कार्मिक विभाग ने दोषियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की है।
इस बार नहरों की मरम्मत के नाम पर पुनः साढ़े 8 करोड़ का बजट स्वीकृत करवा दिया है। जबकि ज्यादा जरूरी होने और किसानों की ओर से लगातार मांग किये जाने के बावजूद भी बांध के गेट निर्माण के लिए विभाग के अधिकारियों ने बजट आवंटित नहीं होने दिया। नहर की मरम्मत के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। मैंने विशेषज्ञों से जानकारी ली, तो सामने आया कि नहर तैयार होने में कम से कम एक साल का समय लगना तय है। इस बार रबी के सीजन में नहर से सिंचाई होना असम्भव है। ऐसे में पिछली बार की तरह नदी के हिस्से का 33 प्रतिशत पानी नदी में छोड़ने की बजाय इस बार 66 प्रतिशत पानी नदी में छोड़ने के निर्देश जारी करवाये। क्योंकि बांध का स्टोरेज पानी वाष्पीकरण होकर हर साल की तरह उड़ जाएगा। नदी का प्राकृतिक बहाव रोककर बांध में भरा ये पानी 120 गांव में रहने वाले लाखों किसानों के हक का है। इस अनमोल पानी से बहाव क्षेत्र के किसानों को वंचित रखना अमानवीयता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विपरीत है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों में व्यवहारिक एवं मानवीय दृष्टिकोण का अभाव नज़र आ रहा है। पिछली बार बांध में 440 एमसीएफटी फ़ीट ही पानी था, उसमें से 33 प्रतिशत पानी नदी के हक का छोड़ा गया था। इस बार बांध में एक हज़ार एमसीएफटी फीट पानी भरा हुआ है। ऐसे में इस बार 650 एमसीएफटी फीट पानी नदी में छोड़ने के आदेश जारी करवाये। बारिश की वजह से नदी की बजरी गीली होने से अभी पानी छोड़ने पर नदी में ज्यादा दूरी तक जा सकेगा और भूमिगत ज्यादा रिचार्ज सम्भव होगा।धरना स्थल पर अहिंसक रूप से आन्दोलन में राम धुन बजाई जा रही है । इस अवसर पर न तो किसी नेता का भाषण हुआ तथा न ही किसी भी प्रकार के नारे लगाये गये । इस 48 घंटे का मौन सत्याग्रह आंदोलन में क्षेत्र के नागरिकों का सहयोग भी मिल रहा है । साभार -श्री माणकमल भंडारी, भीनमाल।
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