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स्प्रिंग बोर्ड के स्थापना दिवस पर हुक्म राठौड ने भंडारी द्वारा रचित कविता का किया पाठ

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जयपुर- राज्य की बड़ी एकेडमी स्प्रिंग बोर्ड का 17 वॉ स्थापना दिवस मनाया गया। इसकी स्थापना 24 दिसंबर 2006 को हुईं थीं । जिसमें शुरुआत में बहुत कम विधार्थी थे । पर जब धीरे धीरे एक-एक युवा ने इसमें पढते हुए मेहनत करनी शुरू की तो लोग जुड़ते गए और काफिला बढ़ता गया। राजधानी जयपुर में हर्षोल्लास से स्थापना दिवस मनाया गया। जिसमें कई युवा जो पहले स्प्रिंग बोर्ड से कॉसिग कर चुके है और आज सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं, उन्होंने ने भी भाग लिया। जिसमें जालोर-भीनमाल के गांव वाड़ा भाडवी निवासी हुक्मसिंह राठौड़ ने अपनी एक कविता को सभी के सामने जालोरी भाषा में प्रस्तुत किया । जिससे सभी में खुशी का माहौल छा गया। जिसमें वहां पर उपस्थित गुरुदेव राजवीरसिंह चलकोई ने हुक्म राठौड़ की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह देखो यह .. जालोरी है, जालोरी.. ।यह कविता जालोर-भीनमाल निवासी नागरिक कल्याण मंच के अध्यक्ष एवं जालोर जिले के वरिष्ठ पत्रकार माणकमल भंडारी द्वारा रचित है। जो आज हर एक युवा को पसंद आ रही है। जब हुक्म राठौड ने इसका वाचन जयपुर स्थित स्प्रिंग बोर्ड में किया तो यह और प्रसिद्ध हो गई । पहले भी यह कविता लाखों युवाओं की पसंद बनी हुई थी । इस कविता को जगह-जगह पसंद कर मारवाड़ क्षेत्र के करीब बीस-तीस स्थानों पर सामाजिक सम्मेलन आयोजित किये गये । इस प्रकार के आयोजन से सामाजिक बदलाव के साथ -साथ पुरानी संस्कृति के रहन-सहन से भी युवाओं को रूबरू कराया गया ।इस कार्यक्रम में स्प्रिंग बोर्ड एकेडमी के डायरेक्टर दिलीपसिंह महेसा, राजवीरसिंह चलकोई, विजयसिंह शेखावत, विकास गुप्ता, नरेन्द्र राणावत सहित सम्पूर्ण स्प्रिंग बोर्ड परिवार की उपस्थिति रही ।

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