यदि जल स्रोत है, तो जल है और यदि जल है,तो कल है-डॉ समित शर्मा।
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जयपुर-राजस्थान के शहरों व कस्बों में जो पुराने तालाब, झीलें और बांध है, लगभग उन सभी की स्थिति दिन प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है। अनियंत्रित अनसस्टेनेबल मानवीय गतिविधियों के फल स्वरुप इनके अस्तित्व के ऊपर गंभीर संकट आ गया है। सभी मनुष्यों और प्राणियों को जीवन देने वाले ये पारंपरिक जल स्रोत अनियंत्रित शहरीकरण एवं कुछ लोगों के लालच का शिकार होकर बड़ी तेजी से स्वयं अपने अंत की ओर बढ़ रहे हैं।(1) मुख्य समस्या है कैचमेंट एरिया में मिलीभगत से या अनदेखी से बेरोकटोक किये जा रहे अतिक्रमण और अवैध निर्माण जिससे पानी की आवक कम होती जा रही है। भूमाफिया सक्रिय है और निज स्वार्थ के लिए दूरगामी सार्वजनिक हित को तिलांजलि दी जा रही है।(2) इससे भी गंभीर दिक्कत है बड़े शहरों में जमीन की कीमतें बढ़ने के कारण झीलों की सीमा में मिट्टी डालकर उसे पाट देना और फिर वहां पर कॉलोनी काट देना। यह तो अक्षम्य है, इससे दोहरी समस्या उत्पन्न होती है। अनेक वर्षों पहले निर्मित झीलें भी समाप्त होती जा रही है और जो व्यक्ति वहां पर आकर रहेंगे वे थोड़ी से बरसात होते ही डूब क्षेत्र में आ जाते हैं और अनेक बार जन हानि भी होती है।(3) तीसरी समस्या है शहरों में सीवरेज सिस्टम तो बन गए पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बने अथवा अकार्यशील है, जिससे इन झीलों में अनट्रीटेड सीवरेज बहाया जा रहा है।
यूट्रॉफिकेशन की वजह से इनमें जलकुंभी उग आती है और ऑक्सीजन की कमी से मछलियां और जल के अन्य जीव मर जाते हैं, धीरे-धीरे पानी में बदबू आने लगती है। वॉटर क्वालिटी भी पूरी तरह खराब हो जाती है जिससे पानी पर्यटन, सिंचाई या अन्य किसी कार्य के योग्य भी नहीं रहता।(4) अनप्लांड अर्बनाइजेशन के साथ-साथ गैर जिम्मेदाराना औद्योगिकरण भी एक बहुत बड़ा कारण है जो हमारी अनेक नदियों और सतही जल स्रोतों को खराब कर रहा है। अनेक स्थानों पर (पैसे बचाने के लिए) औद्योगिक अपशिष्ट को बिना समुचित उपचार किये पानी में छोड़ दिया जाता है। सीईटीपी निष्क्रिय है, इससे जल दूषित हो जाता है और जो इसे पीता है उसे कैंसर जैसे घातक रोग भी हो सकते हैं।
इनमें से अनेक तालाब और झीलें कुछ वर्ष पूर्व तक मानव और पशु पक्षियों के लिए जल का स्रोत हुआ करते थे। किंतु दुर्भाग्य से यह स्थिति तेजी से खराब होती जा रही है। बहुत सी झीलें और तालाब अब एसेट की जगह अनुपयोगी होकर लायबिलिटी बन गए हैं, हम लोगों की लापरवाही की वजह से। आवश्यकता है नेगेटिव दिशा में हो रहे इस बदलाव को तत्काल रोका जाए और पॉजिटिव दिशा की ओर कदम बढ़ाते हुए इन्हें संरक्षित और सुरक्षित करने के समुचित व पर्याप्त प्रयास किए जाएं।ये झीलें , बांध, तालाब, नदियां, कम्युनिटी एसेट है, राजस्थान के नागरिकों की साझा संपत्ति है, जल का अमूल्य स्रोत है।
यदि कल को बचाना है तो जल और जल स्रोतों को बचाना ही होगा। नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब केप टाउन और बेंगलुरु की तरह राजस्थान के प्रमुख शहरों में भी संभवतः जीरो वाटर डे की स्थिति आ जाएगी।आशा है हम सभी इसके लिए कुछ न कुछ सकारात्मक योगदान देंगे।
डॉ समित शर्मा, शासन सचिव,जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग।
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