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अवैध जल कनेक्शनों, पानी के अनाधिकृत उपयोग और इसके चोरी होने की पहचान होने पर होगी सख्त कार्यवाही,गाइडलाइन जारी।

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जयपुर-22 जुलाई। राज्य के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा जारी परिपत्र तथा राजस्थान जल आपूर्ति नियम, सीवरेज अधिनियम, राजस्थान जल आपूर्ति एवं सीवरेज प्रबंधन बोर्ड द्वारा जारी अधिसूचना और समय-समय पर जारी विभिन्न अधिसूचनाओं और अधिनियमों के अनुसार लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) द्वारा व्यापक पाइप नेटवर्क के माध्यम से अपने सभी उपभोक्ताओं को पर्याप्त बदबाव और समान वितरण के साथ सुरक्षित, पीने योग्य पेयजल की आपूर्ति लक्ष्य को सुनिश्चित किये जाने को लेकर परिपत्र जारी किया गया है।
जारी परिपत्र में जल के अनाधिकृत उपयोग यथा अवैध कनेक्शन, बड़े आकार के पाइप का उपयोग (पानी के कनेक्शन में निर्धारित पाइप के अलावा), बड़े आकार के फेरूल को हटाना या उपयोग (पानी के कनेक्शन में निर्धारित के अलावा), अधिकृत कनेक्शन के अलावा अतिरिक्त अवैध कनेक्शन, बिना मीटर के पानी के उपयोग, मीटर में छेड़छाड़/हटाने/प्रतिस्थापन, पीएचईडी पाइल लाइनों, पंप हाउसों, जलाशयों आदि से पानी की चोरी, निर्धारित श्रेणी के कनेक्शन का वाणिज्यिक और औद्योगिक उपयोग, व्यवसाय के लिए पानी का उपयोग जैसे टैंकर भरना, पानी बेचना आदि तथा किसी अन्य माध्यम से जो राजस्थान जल आपूर्ति नियम 1967, राजस्थान जल आपूर्ति एवं सीवरेज निगम अधिनियम 1979 एवं विभागीय अधिसूचनाओं, परिपत्रों एवं आदेशों का उल्लंघन है। जारी परिपत्र में अवैध जल कनेक्शन, बूस्टर, चोरी आदि की समस्या के कारण शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों मंे पहचान प्रबंधन के लिए व्यापक दिशा-निर्देशों की आवश्यकता को देखते हुए उपाय सुनिश्चित किये गये हैं। पीएचईडी सचिव डाॅ. समित शर्मा द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार यह देखा गया है कि कुछ असामाजिक तत्व निजी उपयोग के लिए अवैध जल कनेक्शन लेकर/राइजिंग मेन, ट्रांसमिशन मेन या डिस्ट्रीब्यूशन मेन से चोरी करके जल आपूर्ति योजनाओं को बाधित करते हैं। इसके अतिरिक्त व्यक्तियों द्वारा सर्विस कनेक्शन में सीधे बूस्टर पम्प जैसे यांत्रिक/विद्युत उपकरण लगाने से भी कम दबाव पैदा होता है और अंतिम छोर के उपभोक्ताओं को जल आपूर्ति से वंचित होना पड़ता है। यह अवैध गतिविधि न केवल कानून का पालन करने वाले नागरिकों को पानी सुचारू आपूर्ति को बाधित करती है, बल्कि रिसाव और उसके परिणामस्वरूप जल संदूषण के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा पैदा करती है; इससे आपसी प्रतिद्वंद्विता बढ़ती है और अक्सर कानून व्यवस्था के मुद्दे पैदा होते हैं, जिससे समुदाय के भीतर स्थानीय सार्वजनिक शांति और सौहार्द भंग होता है। पानी की इस चोरी से राज्य के खजाने को राजस्व की हानि भी होती है।
अवैध कनेक्शन/अनाधिकृत उपयोग/चोरी का सर्वेक्षण
          अवैध जल कनक्शनों की पहचान करने के लिए सभी क्षेत्रों यथा राइजिंग मेन, ट्रांसमिशन मेन, वितरा पाइपलाइन आदि में गहन सर्वेक्षण किये जाने को लेकर एसई से अपेक्षा की गई है कि वे अवैध करनेक्शनों को बंद करने के सर्वेक्षण के उद्देश्य से किराए पर वाहन उपलब्ध कराकर विशेष सतर्कता दस्ते का गठन करें। ऐसे अवेध कनेक्शनों का विस्तृत रिकाॅर्ड प्रत्येक डिजीजन द्वारा उब्ल्यूआईआर में दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही राइजिंग/ट्रांसमिशन मेन में अवैध कनेक्शन की पहचान होने पर इन कनेक्शनों को डिस्कनेस्ट करने और हटाने के लिए तत्काल कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त पुलिस में शिकायत दर्ज की जाएगी और सार्वजनिक सम्पत्ति क्षेति निवारण अधिनियम, 1984,धारा 3 उपधारा (2) के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी। शिकायत में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 379 (चोरी) और धारा 430 (सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली शरारत) ओर भारत न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 के नए संस्करणों की धारा 303 (2) और 326 (ए) का भी हवाला दिया जाना चाहिए।
परिसर का निरीक्षण
          इसी प्रकार प्राधिकृत पीएचईडी अधिकारी किसी भी परिसर का निरीक्षण स्वप्रेरणा से या सूचना प्राप्त होने पर सकते हैं। (प्राधिकृत अधिकारीः पीएचईडी का कोई भी अधिकारी जिसमें क्षेत्रीय अधिकारी, जेईएन, एई आदि शामिल हैं, जो क्षेत्र का प्रादेशिक अधिकार रखते हैं या अधिकारिक आदेश द्वारा ऐसा करने के लिए प्रतिनियुक्त हैं)। इसके लिए उनसे अपेक्षा की गई है कि वे अपना फोटो पहचान पत्र के साथ निभाएं जिसमें उनका पदनाम स्परूट रूप से दर्शाया गया हो। परिसर में निरीक्षण के दौरान पीएचईडी अधिकारी कार्यवाही की फोटोग्राफी या वीडियाग्राफी करा सकते हैं। इसी के साथ उनके निष्कर्ष को स्पष्ट रूप से ’’ साइट विजिट रिपोर्ट ’’ के रूप में दर्ज किये जाने के निर्देश हैं, जिस पर उपभोक्ता या मकान मालिक से हस्ताक्षरकरने के लिए कहा जा सकता है।परिपत्र में नोटिस जारी करने, नियमितीकरण का अवसर, अवैध कनेक्शन हटाने, दंड के अधिरोपण के तहत दंड के लिए कनेक्ट बूस्टर/मोटर सीधे में सेवा संबंध, अवैध जल कनेक्शन के दंड, पानी की आपूर्ति बंद करने की शक्ति, बकाया राशि की वसूली, पीएचईडी की भूमिका, जिला प्रशासन की भूमिका, पुलिस विभाग की भूमिका, स्थानीय प्रतिनिधियों की भागीदारी सहित नारे/साइन बोर्ड के प्रदर्शन के प्रावधान सुनिश्चित किये गये हैं।

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