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शिक्षा मंत्रालय ने शैक्षणिक संस्थानों को तंबाकू और नशीले पदार्थों से मुक्त बनाने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरूआत की।

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नई दिल्ली-शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) ने विद्यार्थियों और युवाओं को तंबाकू और नशीले पदार्थों के सेवन के हानिकारक प्रभावों से बचाने की दिशा में अहम कदम के अंतर्गत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) से सख्त कार्रवाई करने का आह्वान किया है। जिससे शैक्षणिक संस्थानों के आसपास के क्षेत्रों को तंबाकू, शराब और नशीले पदार्थों से मुक्त रखने के लिए नियमों और दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू किया जा सके।राष्ट्रव्यापी प्रवर्तन अभियान, 15 मई, 2025 को नार्को-समन्वय केंद्र (एनसीओआरडी) की 8वीं शीर्ष समिति की बैठक के बाद डीओएसईएल के सचिव श्री संजय कुमार द्वारा जारी किया गया। गृह मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में युवाओं को नशीले पदार्थों से बचाने की तत्काल आवश्यकता का उल्‍लेख किया गया और शिक्षा तथा कानून प्रवर्तन विभागों के बीच समन्वित प्रयासों का आह्वान किया गया।

अभियान का महत्‍व

भारत दुनिया की सबसे युवा जनसंख्‍या वाले देशों में से एक है, जिसके अधिकांश नागरिक 29 वर्ष से कम आयु के हैं। यह युवा जनसंख्‍या देश के भविष्य के लिए एक शक्तिशाली ताकत का प्रतिनिधित्व करती है और उनकी सुरक्षा – जो एक प्रमुख जनसांख्यिकीय ताकत का प्रतिनिधित्व करती है – विकसित भारत के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है।अध्ययनों से पता चलता है कि युवाओं में तम्बाकू का सेवन तेज़ी से बढ़ रहा है, जिसके कारण स्कूल/कॉलेज परिसर में अन्य प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे (जीवाईटीएस-2), 2019 के अनुसार 13 से 15 वर्ष की आयु के 8.5 प्रतिशत विद्यार्थी किसी न किसी रूप में तम्बाकू का सेवन कर रहे थे। इससे भी ज़्यादा चिंताजनक बात यह है कि भारत में हर दिन 5,500 से ज़्यादा बच्चे तम्बाकू का सेवन शुरू करते हैंतम्बाकू का सेवन अक्सर अधिक खतरनाक पदार्थों का प्रवेश द्वार होता है। अधिकांश वयस्क उपयोगकर्ता किशोरावस्था के दौरान इसका सेवन शुरू करते हैं और कई युवा मौजूदा कानूनों के बावजूद स्कूलों के पास की दुकानों से आसानी से इन उत्पादों को खरीदते हैं।

सरकार द्वारा उठाए गए कदम

शिक्षा मंत्रालय इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए सक्रिय रूप से तम्बाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान (टीओएफईआई) दिशा-निर्देशों को लागू कर रहा है। यह स्कूलों और कॉलेजों को तम्बाकू के उपयोग और बिक्री से पूरी तरह मुक्त बनाने के लिए एक संरचित दिशानिर्देश प्रदान करता है। डीओएसईएल ने 31 मई 2024 को टीओएफईआई के कार्यान्वयन नियमावली का शुभारंभ किया था। इसका उद्देश्य स्कूलों को टीओएफईआई दिशा-निर्देशों का पालन करने में सहायता करना है, जिससे विद्यार्थियों के लिए एक स्वस्थ, तम्बाकू मुक्त वातावरण बने। यह नियमावली सभी हितधारकों को उन दिशा-निर्देशों को अपनाने और लागू करने का अधिकार देती है जो विद्यार्थियों को तम्बाकू से होने वाले नुकसान से बचाते हैं।टीओएफईआई के दिशा-निर्देशों में निम्नलिखित नौ गतिविधियों की सूची दी गई है, जिन्हें स्कूलों और कॉलेजों को अपने परिसर को तंबाकू मुक्त रखने के लिए इनका अनुपालन करना होगा।

  1. परिसर के अंदर ‘तम्बाकू मुक्त क्षेत्र’ का संकेत प्रदर्शित करना
  2. प्रवेश/सीमा पर ‘तम्बाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान’ का बोर्ड प्रदर्शित करना
  3. परिसर में तम्बाकू के उपयोग का कोई प्रमाण नहीं
  4. तम्बाकू के नुकसान पर जागरूकता सामग्री का प्रदर्शन
  5. हर छह महीने में कम से कम एक तम्बाकू नियंत्रण गतिविधि का आयोजन करना
  6. तम्बाकू मॉनिटरों को नामांकित करना
  7. स्कूल आचार संहिता में तम्बाकू मुक्त नीति को शामिल करना
  8. शैक्षिक संस्थानों के चारों ओर 100 गज की दूरी पर पीली रेखा बनाकर तम्बाकू मुक्त क्षेत्र घोषित करना
  9. किसी भी दुकान या विक्रेता द्वारा 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पाद न बेचने को सुनिश्चित करना

इनमें से दो प्रमुख कार्यों के लिए स्थानीय प्राधिकरणों से तत्काल सहयोग की आवश्यकता है:

  1. गतिविधि 8 – शैक्षिक संस्थानों के चारों ओर 100 गज की दूरी पर तम्बाकू मुक्त क्षेत्र चिह्नित करने के लिए पीली रेखा चिह्नित करना।
  2. गतिविधि 9 – किसी भी दुकान या विक्रेता द्वारा 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पाद न बेचने को सुनिश्चित करना।

मंत्रालय ने शिक्षा अधिकारियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से इन उपायों को सही रूप से लागू करने को सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का आह्वान किया है। गृह मंत्रालय ने नवंबर 2024 में जारी एक सलाह में पहले ही इन प्रावधानों को सख्ती से लागू करने का अनुरोध किया था।

एक महीने तक संचालित होने वाला प्रवर्तन अभियान

31 मई, 2025 – विश्व तंबाकू निषेध दिवस – से शुरू होकर 26 जून, 2025 तक चलने वाला – नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस – राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (सीओटीपीए), 2003 की धारा 6 (बी) को लागू करने के लिए एक महीने का प्रवर्तन अभियान शुरू करने का आग्रह करता है, जो निम्नलिखित पर प्रतिबंध लगाता है:

  • शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में तम्बाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक
  • नाबालिगों को या उनके द्वारा तम्बाकू की बिक्री

राज्यों को स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) विकसित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है, जो स्कूल और कॉलेज के कर्मचारियों को स्थानीय पुलिस को भयभीत हुए बिना सीधे उल्लंघन की रिपोर्ट करने की अनुमति देता है।

सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता का महत्व

मंत्रालय ने इस अभियान का समर्थन करने में स्कूल प्रबंधन समितियों (एसएमसी) , शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका पर जोर दिया है। समुदाय जागरूकता फैलाने और उल्लंघनों की रिपोर्ट करने से विद्यार्थियों के सीखने और बढ़ने के लिए सुरक्षित स्थान बनाने में सहायता कर सकते हैं। विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम जनता को मनोरंजक रूप से तंबाकू के हानिकारक प्रभावों के बारे में शिक्षित करने के लिए मंत्रालय ने माईगॉव प्लेटफॉर्म पर ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस जागरूकता प्रश्नोत्तरी-2025’ की शुरूआत की है। प्रश्नोत्तरी का आयोजन 22 मई 2025 से 21 जुलाई 2025 तक किया जाएगा। यह युवाओं को तंबाकू से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी देकर तंबाकू के उपयोग के खिलाफ मजबूत सामाजिक मानदंडों को स्वरुप देने की दिशा में एक महत्‍वपूर्ण कदम है।सभी नागरिकों से इस महत्वपूर्ण अभियान का सहयोग करने का आग्रह किया जाता है। मंत्रालय के अनुसार निरंतर प्रयासों और जन समर्थन से भारत अपने स्कूलों और कॉलेजों को सुरक्षित, स्वस्थ और नशीले पदार्थों के प्रभाव से मुक्त बना सकता है।स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इस अवधि के दौरान शैक्षिक परिसरों को सुरक्षित और स्वस्थ बनाने के लिए इस अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।*

 

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