जैव ईंधन मिश्रण में भारत की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए, श्री पुरी ने कहा कि देश 2006 के 5% के लक्ष्य से आगे बढ़कर 2022 में निर्धारित समय से पाँच महीने पहले ही 10% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य प्राप्त कर चुका है। इस सफलता के आधार पर, सरकार ने 20% मिश्रण के लक्ष्य को 2030 से कम करके 2025-26 कर दिया है। मंत्री महोदय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सुनियोजित नीतियों और मज़बूत समर्थन प्रणालियों ने ऐसी त्वरित उपलब्धियाँ हासिल की हैं, जो महत्वाकांक्षी ऊर्जा लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें पूरा करने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित करती हैं।
श्री पुरी ने यह भी कहा कि भारत के परिशोधन संयंत्र विश्वस्तरीय, वैश्विक रूप से एकीकृत और निर्यात के लिए तैयार हैं। भारत पहले से ही चौथा सबसे बड़ा परिशोधन क्षमता वाला देश है और पेट्रोलियम उत्पादों के शीर्ष सात निर्यातकों में से एक है, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 50 से अधिक देशों को 45 बिलियन डॉलर से अधिक मूल्य का निर्यात करेगा। उन्होंने कहा कि परिशोधन क्षेत्र देश के राजस्व में लगभग पाँचवें हिस्से का योगदान देता है, जिसमें सार्वजनिक और निजी दोनों संस्थाएँ मज़बूत वित्तीय और परिचालन स्थिति का प्रदर्शन कर रही हैं। घरेलू पेट्रोलियम खपत 2021 के लगभग 5 मिलियन बैरल प्रति दिन से बढ़कर वर्तमान में लगभग 5.6 मिलियन बैरल प्रति दिन हो गई है। भारत के मजबूत आर्थिक विकास और बढ़ती प्रति व्यक्ति आय के कारण उम्मीद है कि यह खपत जल्द ही 6 मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुँच जायेगी। परिशोधन के साथ पेट्रो-रसायन के बढ़ते एकीकरण का उल्लेख करते हुए, श्री पुरी ने कहा कि भारत का पेट्रो-रसायन उपयोग अभी भी वैश्विक औसत का लगभग एक-तिहाई ही है, जो विकास की महत्वपूर्ण संभावना प्रदान करता है। पेट्रो-रसायन तीव्रता सूचकांक पहले ही 7.7% से बढ़कर 13% हो गया है, जो इस क्षेत्र की बढ़ती प्रगति को दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि दक्षता, मूल्यवर्धन और निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए एकीकृत पेट्रो-रसायन परिसरों के रूप में नये परिशोधन विस्तार की योजना बनाई जा रही है।मंत्री ने ऊर्जा इकोसिस्टम में नवाचार और स्वदेशीकरण के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत ने ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में लगभग 80% आयात प्रतिस्थापन हासिल कर लिया है। यह स्वीकार करते हुए कि उत्प्रेरक और विशेष उपकरण जैसे कुछ महत्वपूर्ण घटकों का आयात जारी है, उन्होंने आत्मनिर्भरता के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया, जिसमें पूर्ण आत्म-नियंत्रण के बजाय दक्षता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना शुरू की है और प्रमुख ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान एवं विकास और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय उत्प्रेरक अनुसंधान केंद्र की स्थापना की है।हरित ऊर्जा के बारे में श्री पुरी ने कहा कि हरित हाइड्रोजन क्षेत्र में भारत की प्रगति विशेष रूप से आशाजनक रही है। आईओसीएल और एचपीसीएल द्वारा हाल ही में जारी निविदाओं ने हरित हाइड्रोजन की कीमत लगभग 5.5 डॉलर प्रति किलोग्राम से घटाकर लगभग 4 डॉलर प्रति किलोग्राम कर दी है, जो व्यावसायिक व्यवहारिकता की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि हरित हाइड्रोजन, प्राकृतिक गैस और जैव ईंधन; भारत के ऊर्जा स्रोतों में बदलाव के केंद्र में होंगे, और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और सतत विमानन ईंधन (एसएएफ) सहित जैव ईंधनों को अपनाने में तेजी लाने की उम्मीद है।श्री पुरी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत की ऊर्जा रणनीति में ईंधन और पेट्रो-रसायन विकास दोनों शामिल हैं, जो स्थायित्व की ओर एक सुनियोजित बदलाव का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ईंधनों की हिस्सेदारी धीरे-धीरे कम होगी, लेकिन भारत के 2047 के लक्ष्यों की ओर बढ़ने में ये दशकों तक एक प्रमुख भूमिका निभाते रहेंगे। साथ ही, ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 6% से बढ़ाकर 15% की जा रही है, हरित हाइड्रोजन का पैमाना बढ़ाया जा रहा है, और नवीकरणीय ऊर्जा का तेज़ी से विस्तार हो रहा है—ये सभी ऊर्जा सुरक्षा से समझौता किए बिना अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने की भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं।1901 में डिगबोई में पहले परिशोधन संयंत्र से लेकर आज की वैश्विक स्तर की सुविधाओं तक, भारत के ऐतिहासिक परिशोधन विरासत को याद करते हुए, मंत्री महोदय ने कहा कि 2014 के बाद के सुधारों और इकोसिस्टम की मजबूती ने विकास और नवाचार के एक नए युग का सूत्रपात किया है। उन्होंने बाड़मेर रिफाइनरी और आंध्र रिफाइनरी जैसी चल रही परियोजनाओं को इस क्षेत्र की प्रगति का प्रमुख उदाहरण बताया। 100 से अधिक बायोगैस संयंत्रों के चालू होने और 70 और निर्माणाधीन होने के साथ, उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा इकोसिस्टम बना रहा है जो प्रौद्योगिकी, निवेश और स्थिरता को आपस में जोड़ता है।श्री पुरी ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि जैसे-जैसे भारत 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर होगा, उसका ऊर्जा क्षेत्र न केवल घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक बाजारों को भी सेवा प्रदान करेगा। मंत्री महोदय ने विश्वास व्यक्त किया कि 2035 तक, भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी परिशोधन शक्ति से संभवतः दूसरी सबसे बड़ी परिशोधन शक्ति बन जाएगा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत की युवा जनसांख्यिकी, बढ़ती ऊर्जा मांग और सक्रिय नीतिगत वातावरण से सुनिश्चित होगा कि देश न केवल वैश्विक ऊर्जा भविष्य में भाग लेगा, बल्कि उसे सक्रिय रूप से आकार भी देगा।