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इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का मुख्य विषय होगा, ‘एआई का लोकतंत्रीकरण और एआई की असमानता को दूर करना’

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नई दिल्ली-इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के इंडियाएआई मिशन ने आज नई दिल्ली में मीडिया को इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के द़ष्टिकोण, विषयगत संरचना और प्रगति के बारे में जानकारी दी। प्रेस कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता एमईआईटीवाई के सचिव श्री एस. कृष्णन ने की और इसमें एमईआईटीवाई के अतिरिक्त सचिव, इंडियाएआई के सीईओ और एनआईसी के महानिदेशक श्री अभिषेक सिंह, डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के एमडी और सीईओ श्री अखिल कुमार, एमईआईटीवाई के अतिरिक्त सचिव और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के सीईओ श्री अमितेश कुमार सिन्हा, एमईआईटीवाई के संयुक्त सचिव श्री कृष्ण कुमार सिंह, एमईआईटीवाई के संयुक्त सचिव श्री सुदीप श्रीवास्तव, एनईजी़डी के अध्यक्ष और सीईओ श्री नंद कुमारम, सीईआरटी-इन के महानिदेशक डॉ. संजय बहल, एमईआईटीवाई के वैज्ञानिक जी और समूह समन्वयक श्री मनोज कुमार जैन, इंडियाएआई के निदेशक श्री के मोहम्मद वाई. सफिरुल्ला और इंडियाएआई की संयुक्त निदेशक सुश्री शिखा दहिया सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए एमईआईटीवाई के सचिव श्री एस. कृष्णन ने कहा, “हमारा मकसद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का लोकतंत्रीकरण सुनिश्चित करना और एआई के क्षेत्र में उभर रहे अंतर को खत्म करना है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय में एक प्रमुख चिंता यह रही है कि एआई कुछ सीमित भौगोलिक क्षेत्रों में केंद्रित हो सकता है और कुछ ही कंपनियों द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है। इस समस्या से निपटने के लिए, एआई को एक व्यापक, समतावादी तकनीक के रूप में उपलब्ध कराया जाना चाहिए, जो समग्र रूप से मानवता के विकास में सहायक हो। इसका अर्थ है कि विश्व भर के देशों को एआई के सभी अहम तत्वों, जैसे कंप्यूटिंग, मॉडल और डेटा तक पहुंच सुनिश्चित होनी चाहिए। व्यापक पहुंच से उन देशों, समाजों और समुदायों के अनुरूप एआई समाधानों का विकास मुमकिन हो पाएगा। ऐसे संदर्भ-विशिष्ट समाधानों को फिर अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों में लागू किया जा सकता है, जिनमें स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शासन, शिक्षा, विनिर्माण और अन्य शामिल हैं, जिससे उत्पादकता और दक्षता में वृद्धि व्यापक स्तर पर हो सकेगी।”यह शिखर सम्मेलन तीन मार्गदर्शक सिद्धांतों पर आधारित है: लोग, ग्रह और प्रगति, जो यह परिभाषित करते हैं कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मानवता की सेवा कैसे करनी चाहिए, पर्यावरण की रक्षा कैसे करनी चाहिए और समावेशी आर्थिक और सामाजिक विकास को किस तरह बढ़ावा देना चाहिए। इन सिद्धांतों को सात विषयगत चक्रों या कार्य समूहों के ज़रिए क्रियान्वित किया जाता है, जो शिखर सम्मेलन की चर्चाओं और परिणामों को संरचना देते हैं।

मानव पूंजी चक्र का मकसद एआई-संचालित भविष्य के लिए ज़रुरी कौशल और साक्षरता से लोगों को तैयार करना है, जिसमें कौशल विकास और समावेशी कार्यबल परिवर्तन पर जोर दिया गया है। सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समावेशन एआई प्रणालियों में भाषाई, सांस्कृतिक और प्रासंगिक प्रतिनिधित्व को संबोधित करता है, ताकि यह देखा जा सके कि वे डिजाइन में समावेशी और स्थानीय रूप से प्रासंगिक हों। सुरक्षित और विश्वसनीय एआई चक्र पारदर्शी, जवाबदेह और प्रौद्योगिकी-सक्षम शासन ढांचे को बढ़ावा देता है जिसे सभी क्षेत्रों में अपनाया जा सकता है। मज़बूत, नवाचार और दक्षता की मदद से सीमित संसाधनों वाले वातावरण के लिए उपयुक्त किफायती, ऊर्जा-कुशल और टिकाऊ एआई समाधानों को प्राथमिकता मिलती है। विज्ञान चक्र का मकसद समावेशी एआई अनुसंधान व्यवस्था तंत्र और वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग का विस्तार करना है,खास तौर पर वैश्विक दक्षिण में। एआई संसाधनों का लोकतंत्रीकरण डेटासेट, कंप्यूटिंग और मूलभूत मॉडलों तक समान पहुंच पर केंद्रित है, जबकि आर्थिक विकास और सामाजिक भलाई के लिए एआई का मकसद स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में सिद्ध एआई अनुप्रयोगों का विस्तार करना है।कार्य समूह के विषय कई महीनों के व्यापक परामर्शों के बाद तय किए गए हैं, जिनमें मायगॉव प्लेटफॉर्म के ज़रिए सार्वजनिक भागीदारी शामिल है, जिस पर 600 से अधिक नागरिकों की प्रतिक्रियाएँ मिलीं, 500 से ज्यादा संगठनों के साथ हितधारक परामर्श और ओस्लो, टोक्यो, न्यूयॉर्क और पेरिस जैसे शहरों में आयोजित कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विचार-विमर्श सत्र शामिल हैं।श्री कृष्णन ने यह भी बताया कि सूत्र-चक्र ढांचा, शिखर सम्मेलन के एजेंडा और परिणामों का मार्गदर्शन किस तरह करेगा, ताकि ये सुनिश्चित हो सके कि चर्चाएँ केवल आकांक्षाओं तक सीमित न रहकर, मापने योग्य और वास्तविक प्रभाव में तब्दील हो सकें।इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की रणनीतिक तैयारी के तहत, विविध दृष्टिकोणों को शामिल करने और शिखर सम्मेलन से पहले रफ्तार देने के लिए करीब 300 पूर्व-शिखर सम्मेलन आयोजित किए गए, जिनमें से 57 पूर्व-शिखर सम्मेलन 25 से अधिक देशों में आयोजित किए जा चुके हैं। इसके अलावा, क्षेत्रीय एआई इम्पैक्ट सम्मेलनों की भी एक श्रृंखला आयोजित की जा रही है, ताकि यह देखा जा सके कि भारत का एआई रोडमैप समावेशी हो और विकसित भारत की आकांक्षाओं से जुड़ा हो।इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 कई प्रमुख वैश्विक पहलों पर आधारित है, जिनका मकसद एआई को लगातार रफ्तार देना और लोगों, ग्रह और प्रगति के क्षेत्र में इसके वास्तविक प्रभाव को प्रदर्शित करना है। इनमें तीन बड़े वैश्विक चुनौतियाँ शामिल हैं, युवा एआई, एआई बाय हर और एआई फॉर ऑल, जिन्होंने मिलकर 135 देशों से 15,000 से अधिक पंजीकरण और करीब 4,700 प्रस्तुतियाँ हासिल की हैं, जिनमें ग्लोबल साउथ की मजबूत भागीदारी रही है। अन्य प्रमुख आयोजनों में इंडिया एआई टिंकरप्रेन्योर चैलेंज शामिल है, जिसमें स्कूली छात्रों (कक्षा 6 से 12) की शीर्ष 50 परियोजनाओं का प्रदर्शन किया जाएगा,  उड़ान, एक वैश्विक एआई पिच फेस्ट जो उच्च क्षमता वाले स्टार्टअप्स को निवेशकों और नीति निर्माताओं से जोड़ता है, स्वास्थ्य, ऊर्जा, लिंग, कृषि, शिक्षा और दिव्यांगता में एआई पर छह अंतर्राष्ट्रीय संकलन, जो उच्च प्रभाव वाले सार्वजनिक हित के उपयोग के मामलों को प्रदर्शित करते हैं, भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट एक्सपो, जो वैश्विक, राज्य, उद्यम और स्टार्टअप नवाचारों को प्रदर्शित करता है और एक अनुसंधान संगोष्ठी, जिसमें अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के अग्रणी एआई अनुसंधान को प्रदर्शित किया जाता है। ये सभी मिलकर शिखर सम्मेलन को एक समावेशी, व्यावहारिक और प्रभाव-संचालित एआई सहयोग के लिए एक वैश्विक मंच के रूप में स्थापित करते हैं।

 

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