डॉ. पी.के. मिश्रा ने दक्ष नेतृत्व कार्यक्रम के दूसरे बैच का शुभारंभ किया 4 days ago 😊 Please Share This News 😊 Lalit Kumar(Raju) Editor-in-chief(lalit.space10@gmail.com)91+9782656423 नई दिल्ली-केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए एक प्रमुख नेतृत्व विकास कार्यक्रम, दक्ष (आकांक्षा, ज्ञान, उत्तराधिकार और सद्भाव का विकास) के दूसरे बैच का शुभारंभ सत्र आज नई दिल्ली के स्कोप कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) और सार्वजनिक उद्यमों के स्थायी सम्मेलन (स्कोप) द्वारा मिशन कर्मयोगी ढांचे के अंतर्गत संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता है।उद्घाटन समारोह में सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के वरिष्ठ प्रमुख शामिल हुए। उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा; लोक उद्यम विभाग के सचिव श्री के. मोसेस चलाई; कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग की सचिव श्रीमती रचना शाह; क्षमता विकास आयोग की अध्यक्ष श्रीमती एस. राधा चौहान; स्कोप अध्यक्ष श्री के.पी. महादेवस्वामी; स्कोप के महानिदेशक श्री अतुल सोबती और क्षमता विकास आयोग की सदस्य (प्रशासन) श्रीमती अलका मित्तल शामिल थीं।प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए स्कोप के महानिदेशक श्री अतुल सोबती ने कहा कि दक्ष कार्यक्रम प्रमुखों को आत्मचिंतन, तैयारी और रूपांतरण में सहायता करेगा। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम नेतृत्व क्षमता के विकास, रणनीतिक विकास और अंतर्राष्ट्रीय अनुभव प्राप्त करने का अवसर प्रदान करेगा।कार्यक्रम के संदर्भ को स्पष्ट करते हुए क्षमता विकास आयोग की सदस्य श्रीमती अलका मित्तल ने दक्ष के स्वरूप और उद्देश्यों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम 12 महीने की परिवर्तनकारी नेतृत्व यात्रा के रूप में संरचित है। इसमें डिजिटल शिक्षा, प्रमुख संस्थानों में कक्षा शिक्षण, कार्यकारी कोचिंग, व्यावहारिक शिक्षण परियोजनाएं और अंतर्राष्ट्रीय अनुभव शामिल हैं। उन्होंने बताया कि दक्ष के पहले बैच में सीपीएसई के 73 वरिष्ठ अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया, जबकि दूसरे बैच में ऊर्जा, अंतरिक्ष और रक्षा, परिवहन और रसद, खनन और खनिज, विनिर्माण और निर्माण सहित विभिन्न क्षेत्रों से 72 प्रतिभागी शामिल हैं।उन्होंने मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत हासिल की गई प्रमुख उपलब्धियों को रेखांकित किया। इनमें आईजीओटी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अधिकारियों की व्यापक भागीदारी, कर्मयोगी सप्ताह जैसी पहलों के माध्यम से आजीवन शिक्षा का संस्थागतकरण, कर्मयोगी योग्यता मॉडल का विकास, प्रशिक्षण संस्थानों का प्रत्यायन और भारत केंद्रित केस स्टडीज़ के राष्ट्रीय संग्रह अमृत ज्ञान कोष का निर्माण शामिल है। सीपीएसई के लिए प्राथमिकता वाले सुधार क्षेत्रों के रूप में नेतृत्व विकास, योग्यता-आधारित विकास, प्रतिभा गतिशीलता और प्रौद्योगिकी-आधारित शिक्षा पर बल दिया गया।प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने अपने संबोधन में देश के विकास पथ में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की बदलती भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने याद दिलाया कि स्वतंत्रता के बाद देश के औद्योगिक और अवसंरचनात्मक आधार के निर्माण में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों ने मूलभूत भूमिका निभाई। इससे आर्थिक विकास, वित्तीय स्थिरता और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता की नींव रखी गई। उन्होंने कहा कि कई दशकों तक सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम भारत की विकास रणनीति की रीढ़ रहे हैं।डॉ. पी.के. मिश्रा ने कहा कि समय के साथ, वैश्वीकरण, तकनीकी परिवर्तन और आर्थिक सुधारों ने वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिदृश्य को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक बनाम निजी क्षेत्र के प्रभुत्व को लेकर चल रही बहसें अब एक अधिक एकीकृत दृष्टिकोण में तब्दील हो गई हैं। यहाँ प्रतिस्पर्धा, दक्षता और नवाचार केंद्रीय महत्व रखते हैं। इस बदलते परिवेश में, सीपीएसई से अपेक्षाएँ भी विकसित हुई हैं। इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को पूरा करते हुए अधिक चुस्त-दुरुस्त होकर काम करने की आवश्यकता है।डॉ. मिश्रा ने कहा कि भारत मुक्त व्यापार समझौतों और रणनीतिक साझेदारियों के माध्यम से वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ अपने जुड़ाव को मजबूत कर रहा है, ऐसे में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को न केवल घरेलू स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम आर्थिक विकास में, विशेष रूप से अनिश्चितता के दौर में, एक रणनीतिक भूमिका निभाते रहते हैं।डॉ. मिश्रा ने 2021 की सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम नीति का भी उल्लेख किया। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को रणनीतिक और गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है। उन्होंने कहा कि जहां निजी उद्यमों की भूमिका बढ़ रही है। वहीं ऊर्जा, रक्षा, अवसंरचना और वित्त जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम आवश्यक बने हुए हैं, जहां दीर्घकालिक राष्ट्रीय हित, स्थिरता और लचीलापन महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम उन बाजारों में भी संतुलनकारी भूमिका निभाते हैं जो हमेशा परिपूर्ण नहीं होते और जहां सार्वजनिक हित और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी विचार शामिल होते हैं।प्रौद्योगिकी और नवाचार के बढ़ते महत्व पर डॉ. पी.के. मिश्रा ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) को प्रौद्योगिकी उन्मुख और नवाचार-संचालित बने रहना चाहिए। उन्होंने भारत के विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) और यूपीआई, सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग में प्रौद्योगिकी को बेहतर ढंग से अपनाने और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम साइबर सुरक्षा, डेटा प्रबंधन और ऊर्जा परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में नेतृत्व करने के लिए अच्छी स्थिति में हैं, जहां राष्ट्रीय विश्वास और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।नेतृत्व और मानव संसाधन पर डॉ. मिश्रा ने कहा कि संस्थाएँ अंततः अपने नेतृत्व की गुणवत्ता पर निर्भर करती हैं। उन्होंने विशेष रूप से तीव्र तकनीकी परिवर्तन के युग में निरंतर सीखने, अनुकूलनशीलता और रणनीतिक सोच के महत्व पर बल दिया। उन्होंने प्रतिभागियों को दक्ष कार्यक्रम का उपयोग करके संगठनात्मक सीमाओं से परे अपने दृष्टिकोण को व्यापक बनाने, निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने, सहयोगात्मक रूप से कार्य करने और साझा राष्ट्रीय उद्देश्यों के अनुरूप टीमें बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।इससे पहले, लोक उद्यम विभाग के सचिव श्री के. मूसा चलाई ने केंद्रीय उद्यम इकाइयों (सीपीएसई) के आकार और आर्थिक योगदान के बारे में संक्षेप में बताया और जीडीपी सृजन तथा केंद्रीय खजाने में उनके योगदान की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक और घरेलू परिवर्तनों के बीच इस योगदान को बनाए रखने के लिए भविष्य के लिए तैयार नेतृत्व का निर्माण आवश्यक है और उन्होंने दक्ष को इस दिशा में एक सामयिक पहल बताया। क्षमता विकास आयोग के सचिव श्री जगदीप गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। उन्होंने मिशन कर्मयोगी के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए आयोग की प्रतिबद्धता को दोहराया। दक्ष नेतृत्व कार्यक्रम की परिकल्पना वरिष्ठ अधिकारियों को उच्च नेतृत्व भूमिकाओं के लिए तैयार करने के साथ-साथ उन्हें राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से जवाब देने में सक्षम बनाने के लिए की गई है। व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे Donate Now More Stories केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जेपी नड्डा ने 12 प्रभावित राज्यों में लिम्फैटिक फ़ाइलेरिया उन्मूलन के लिए वार्षिक राष्ट्रव्यापी एमडीए अभियान का शुभारंभ किया 4 mins ago कृषि विज्ञान केंद्र केशवना में 15 दिवसीय खुदरा विक्रय प्रशिक्षण का हुआ समापन 13 hours ago Joint Statement by the Saudi Finance Minister and IMF Managing Director on the Conclusion of the Second Annual AlUla Conference for Emerging Market Economies 19 hours ago 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