नमस्कार हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 97826 56423 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , “मानव-केंद्रित एआई: प्रतिभा, विश्वास और प्रौद्योगिकी के माध्यम से भारत दुनिया को कैसे सशक्त बना सकता है” के विषय पर की चर्चा – Raj News Live

Raj News Live

Latest Online Breaking News

“मानव-केंद्रित एआई: प्रतिभा, विश्वास और प्रौद्योगिकी के माध्यम से भारत दुनिया को कैसे सशक्त बना सकता है” के विषय पर की चर्चा

😊 Please Share This News 😊
नई दिल्ली-कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने ग्लोबल साउथ में एआई के सबसे बड़े सम्मेलन इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान, एक उच्च-स्तरीय संवादात्मक सत्र का आयोजन किया। यह चर्चा “मानव-केंद्रित एआई: प्रतिभा, विश्वास और प्रौद्योगिकी के माध्यम से भारत दुनिया को कैसे सशक्त बना सकता है” विषय पर आधारित थी। एक्सपर्ट एंगेजमेंट ग्रुप (ईईजी) के तहत आयोजित इस संवाद में वैश्विक एवं राष्ट्रीय स्तर की अग्रणी हस्तियों ने भाग लिया और भारत के जिम्मेदार, समावेशी व प्रतिभा-संचालित एआई भविष्य को आकार देने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर व्यापक विचार-विमर्श किया।टफ्ट्स विश्वविद्यालय के फ्लेचर स्कूल में ग्लोबल बिजनेस के डीन प्रोफेसर भास्कर चक्रवर्ती ने मुख्य भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने “एआई के युग में मानव उत्कर्ष”और परिवर्तनकारी अवसंरचना के लिए ग्लोबल साउथ गठबंधन की परिकल्पना पर प्रकाश डाला। पैनल चर्चा का संचालन बीसीजी के पार्टनर एवं मैनेजिंग डायरेक्टर सिद्धार्थ मदान ने किया। इस चर्चा में गूगल क्लाउड इंडिया की डायरेक्टर और ग्लोबल अफेयर्स एंड पब्लिक पॉलिसी प्रमुख योलिंड लोबो, एनएसडीसी के सीईओ अरुणकुमार पिल्लई, ईवाई के टेक्नोलॉजी कंसल्टिंग पार्टनर राकेश कौल तथा एनसीवीईटी की पूर्व कार्यकारी सदस्य डॉ. नीना पाहुजा ने भाग लिया। पैनलिस्टों ने प्रतिभा, विश्वास और प्रौद्योगिकी पर आधारित एआई क्षमताओं के निर्माण पर अपने विचार साझा किए।सत्र का समापन गूगल के मशीन लर्निंग लीड इंजीनियर सुनील कुमार द्वारा “स्केलिंग क्रिएटिव विद जीसीपी जेनमीडिया” विषय पर एक प्रभावशाली सजीव प्रदर्शन के साथ हुआ। इस प्रस्तुति में प्रदर्शित किया गया कि जेनमीडिया मॉडल किस प्रकार प्रोडक्शन के लिए तैयार एसेट्स उत्पन्न कर सकते हैं, इमर्सिव एआई-संचालित क्रिएटिव वर्कफ्लो को सक्षम कर सकते हैं और वैचारिक विचारों को स्केलेबल, वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों में बदल सकते हैं।इस सत्र में भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी भी उपस्थित रहीं। उन्होंने प्रतिभागियों के साथ संवाद किया, राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप एआई कौशल के संरेखण पर अपने विचार साझा किए और विश्वास, समावेशिता एवं उद्योग-प्रासंगिकता पर आधारित प्रतिभा पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के महत्व पर बल दिया। देबाश्री मुखर्जी ने स्किल इंडिया पवेलियन का भी दौरा किया, जहां उन्होंने कौशल विकास, डिजिटल लर्निंग और एआई-आधारित प्रशिक्षण समाधानों में अत्याधुनिक नवाचारों का प्रदर्शन करने वाले प्रदर्शकों से संवाद किया। उन्होंने उद्योग भागीदारों और प्रशिक्षण प्रदाताओं के साथ विस्तृत चर्चा की तथा उभरती प्रौद्योगिकियों को समावेशी एवं परिणामोन्मुखी कौशल विकास से जोड़ने के उनके प्रयासों की सराहना की।टफ्ट्स विश्वविद्यालय में फ्लेचर स्कूल के प्रोफेसर भास्कर चक्रवर्ती ने अपने मुख्य भाषण में रेखांकित किया कि एआई नेतृत्व का भविष्य केवल तकनीकी क्षमता से नहीं, बल्कि विश्वास की रूपरेखा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और राष्ट्रीय प्रतिभा की उपलब्धता से भी तय होगा। उन्होंने कहा कि समावेशी और व्यापक जनभागीदारी वाले डिजिटल सिस्टम विकसित करने में भारत के अनुभव से उसे ऐसा एआई डिजाइन करने में विशिष्ट बढ़त मिलती है, जो न्यायसंगत, सुलभ व भरोसेमंद हो।बीसीजी के श्री सिद्धार्थ मदान द्वारा संचालित पैनल चर्चा में गूगल क्लाउड इंडिया की सुश्री योलिंड लोबो, एनएसडीसी के श्री अरुणकुमार पिल्लई, ईवाई के श्री राकेश कौल और एनसीवीईटी की डॉ. नीना पाहुजा ने भाग लिया। चर्चा का केंद्र बिंदु यह था कि एआई किस प्रकार कौशल विकास प्रणालियों, संस्थागत तैयारियों और कार्यबल के विकास पथों को नया आकार दे रहा है।राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के सीईओ अरुणकुमार पिल्लई ने इस बात पर जोर दिया कि एआई केवल अध्ययन का विषय नहीं, बल्कि प्रशिक्षण को सक्षम बनाने वाला एक प्रभावी माध्यम है, जो प्रशिक्षक, मूल्यांकनकर्ता और कैरियर मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि एआई जागरूकता कार्यक्रमों, एसओएआर पहल और स्किल इंडिया डिजिटल हब (एसआईडीएच) में एआई-सक्षम क्षमताओं के माध्यम से शिक्षार्थी अब व्यक्तिगत सीखने के मार्ग, श्रम बाजार की वास्तविक समय जानकारी तथा परिणाम-आधारित मूल्यांकन से लाभान्वित हो रहे हैं।डॉ. नीना पाहुजा ने बुनियादी साक्षरता से लेकर उन्नत विशेषज्ञता तक क्षमताओं के विकास के उद्देश्य से एक संरचित त्रिस्तरीय ढांचा प्रस्तुत किया— “सभी को एआई”, “अनेक हेतु एआई” और “कुछ के लिए एआई”। उन्होंने जानकारी दी है कि एसओएआर पहल के तहत अब तक दो लाख से अधिक शिक्षार्थी पंजीकृत हो चुके हैं और राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क के अनुरूप नैनो-क्रेडेंशियल, स्टैकेबल लर्निंग पाथवे तथा मॉड्यूलर योग्यताओं के कार्यान्वयन पर प्रकाश डाला। नीना पाहुजा ने यह भी बताया कि देशभर के आईटीआई पारंपरिक व्यवसायों में उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से कम अवधि के एआई मॉड्यूल को अपने पाठ्यक्रम में एकीकृत कर रहे हैं।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image001U01C.jpgश्री राकेश कौल ने इस बात पर बल दिया कि एआई कार्य-पद्धतियों को बदलेगा या नहीं, यह मुख्य प्रश्न यह नहीं है, बल्कि यह बड़ा

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image0028DDM.jpgसवाल है कि संस्थान जिम्मेदार नवाचार और जोखिम-तैयारी के माध्यम से इस परिवर्तन का पूर्वानुमान कैसे लगाते हैं और उसका प्रभावी प्रबंधन किस तरह से करते हैं।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image003Q88P.jpgसुश्री योलिंड लोबो ने घरेलू कंप्यूटिंग क्षमता को बढ़ाने, रणनीतिक साझेदारियों को सुदृढ़ करने और कृषि से लेकर रचनात्मक उद्योगों तक सभी मूल्य श्रृंखलाओं में एआई समाधानों के एकीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक समावेशन सुनिश्चित किया जा सके।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image0047DOS.jpg

सत्र का समापन सरकार, शिक्षा एवं उद्योग जगत के बीच सहयोगात्मक कार्रवाई की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत की एआई यात्रा मानव-केंद्रित, समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनी रहे।

व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें 

स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे

Donate Now

[responsive-slider id=1466]
error: Content is protected !!