मेवाड़ राजपरिवार के दिवंगत अरविंद सिंह मेवाड़ की अंतिम वसीयत को चुनौती देने वाली उन्हीं की बेटी पद्मजा कुमारी को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, याचिका खारिज की
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उदयपुर. मेवाड़ राजपरिवार के दिवंगत सदस्य अरविंद सिंह मेवाड़ की अंतिम वसीयत को मुंबई हाईकोर्ट में चुनौती देने वाली उन्हीं की बेटी पद्मजा कुमारी परमार को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने पद्मजा कुमारी की अपने पिता अरविंद सिंह मेवाड़ की अंतिम वसीयत को चुनौती देने वाली याचिका को नॉन मेंटेनेबल मानते हुए खारिज कर दिया है। पद्मजा कुमारी ने दिवंगत पिता अरविंद सिंह मेवाड़ की संपत्ति के लिए लेटर्स ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (प्रशासन पत्र) की मांग की थी। पद्मजा ने कोर्ट में दावा पेश किया था कि बिना वसीयत बनाए उनके पिता स्व. अरविंद सिंह की मृत्यु हो गई थी। हाईकोर्ट ने पद्मजा कुमारी की इस मांग को खारिज कर दिया। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद ने कहा कि लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ द्वारा पेश की गई वसीयत की वैधता को लेकर विवाद उत्पन्न हो चुका है इसलिए इस मुद्दे का फैसला उसी कार्यवाही में होगा, जो सिविल मुकदमे की तरह चलेगी। अदालत ने कहा कि समान मुद्दे पर अलग से कार्यवाही चलाने से कानून की मंशा के विपरीत स्थिति बन सकती है। विरोधाभासी फैसले भी आ सकते हैं। इसलिए जब तक भाई लक्ष्यराज सिंह द्वारा पेश किए गए वसीयतनामे से संबंधित दावा कोर्ट में लंबित है। तब तक कानूनी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, पद्मजा को भाई लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के केस के जवाब के तौर पर संदिग्ध परिस्थितियों से जुड़ी अपनी दलीलें पेश करने की अनुमति दी गई है। अब मामले की अगली सुनवाई 4 मई को होगी। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद सिटी पैलेस के जगदीश चौक तक शहरवासियों ने आतिशबाजी कर खुशी मनाई। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ पत्नी निवृत्ति कुमारी मेवाड़, पुत्र हरितराज सिंह मेवाड़ सहित सपरिवार सिटी पैलेस से पैदल जगदीश मंदिर पहुंचे, जहां भगवान जगन्नाथरायजी के दर्शन किए।
रास्ते में शहरवासियों और व्यापारियों ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। दर्शन के बाद डॉ. लक्ष्यराज ने कहा कि हाईकोर्ट के इस फैसले से सच सामने आया है। यह खुशी का मौका है। पूरे परिवार को परेशानियों से गुजरना पड़ा। पिताजी को देवलोक में भी अवश्य सुकून मिला होगा। बहन ने पिता के लिए गलत शब्दों का चयन किया, जिससे मैं बहुत आहत हुआ और मुझे सदमा लगा।
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