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वित्तमंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अनुसूचित जातियों के लिए ऋण और अन्य कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।

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केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामले मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के सीएमडी के साथ अनुसूचित जातियों के लिए ऋण और अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के प्रदर्शन पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। समीक्षा बैठक में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) के अध्यक्ष श्री विजय सांपला, एनसीएससी सदस्य, श्री सुभाष रामनाथ पारधी और डॉ अंजू बाला; केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री डॉ भागवत किशनराव कराड; वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव, श्री संजय मल्होत्रा, और डीएफएस एवं एनसीएससी के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

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श्रीमती सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित व्यक्तियों को ऋण देने और आरक्षण,बैकलॉग रिक्तियों, कल्याण कार्यों और शिकायत निवारण तंत्र आदि के संदर्भ में उनके कल्याण के लिए किए गए विभिन्न उपायों की समीक्षा की।

समीक्षा बैठक के दौरान, वित्त मंत्री ने निम्नलिखित निर्देश भी दिए:

• बैंक कम संख्या में शेष बैकलॉग रिक्तियों को समयबद्ध तरीके से भरें।

• अनुसूचित जाति के लिए वित्तीय सहायता देते हुए विभिन्न सरकारी विभागों की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से इन्हें आगे बढ़ाऐं।

• बैंकों को सभी योजनाओं में अनुसूचित जातियों के कवरेज को बढ़ाने के लिए और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों को क्षमता निर्माण, उद्यमिता विकास के लिए उनकी जरूरतों पर भी ध्यान की जरूरत है क्योंकि अनुसूचित जाति बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के कुल कार्यबल का लगभग 18 प्रतिशत है।

• आउटसोर्स की जा रही नौकरियों के लिए बैंक उचित डिजिटल रिकॉर्ड बनाएं, विशेष रूप से 1 अक्टूबर से सफाई कर्मचारी जैसे पदों के लिए।

• अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित सभी लंबित शिकायतों का निवारण भी 2 अक्टूबर से डीएफएस द्वारा विशेष अभियान में किया जा सकता है।

• सीईजीएसएससी, वीसीएफ आदि जैसी सभी योजनाओं में किए जाने वाले आवश्यक सुधारों को डीएफएस द्वारा दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (डीआईसीसीआई) जैसी एजेंसियों के साथ चर्चा के बाद अपनाया जा सकता है जो जमीनी स्तर पर अनुसूचित जातियों के साथ कार्य कर रही हैं।

वित्त मंत्री ने यह भी इच्छा व्यक्त की कि पीएसबी प्रत्येक वर्ष दो बार एनसीएससी को अनूसूचित जातियों की भर्ती में हुई प्रगति और ऋण के बारे में अवगत कराए- पहला बार 14 अप्रैल (बाबासाहेब अम्बेडकर का जन्मदिन) से 30 अप्रैल तक किसी भी समय वार्तालाप के माध्यम से और दूसरी बार अक्टूबर में जानकारी साझा करने के माध्यम से।

वित्त मंत्री ने कहा कि बैठक का उद्देश्य अनुसूचित जाति के लोगों के उत्थान और बेहतरी के लिए संविधान में निहित अधिकारों की पूर्ति के लिए सभी हितधारकों को एक साथ काम करने के लिए एक साझा मंच पर लाना है। श्रीमती सीतारमण ने इस बात की भी जानकारी ली कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) जैसी योजनाओं में प्रदर्शन संतोषजनक है, जहां क्रेडिट लिंक्ड सेल्फ-हेल्प ग्रुप (एसएचजी) में 21 प्रतिशत अनुसूचित जाति से थे और स्वानिधि में, 19 प्रतिशत लाभार्थी अनुसूचित जाति से हैं।

अपने संबोधन में, एनसीएससी के अध्यक्ष श्री विजय सांपला ने बैंकरों से अनुसूचित जाति को सभी देय बैंक ऋण देने का आग्रह किया। उन्होंने उल्लेख किया कि सरकार ने अनुसूचित जाति के लाभ के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। बैंकरों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि राष्ट्रीय आजीविका मिशन, अनुसूचित जातियों के लिए ऋण वृद्धि गारंटी योजना, अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी निधि, हाथ से मैला उठाने वालों के पुनर्वास के लिए स्व-रोजगार योजना आदि जैसी योजनाओं का लाभ लक्षित आबादी तक पहुंचना चाहिए।

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