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यमुना जल समझौता राजस्थान के लिए ऐतिहासिक क्षण,शेखावाटी क्षेत्र को अब मिल सकेगा यमुना का पानी

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में यमुना जल परियोजना का एमओए
केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री और राजस्थान, हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने किए हस्ताक्षर
जयपुर, 29 जून। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में सोमवार को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में यमुना जल परियोजना को लेकर राजस्थान और हरियाणा के बीच मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) किया गया। इस एमओए पर केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हस्ताक्षर किए।
राजस्थान को मिलेगा अपने हिस्से का पानी, हथिनीकुंड बैराज से लगभग 295 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछेगी—
लगभग 34,102 करोड़ रुपये की इस परियोजना से राजस्थान की जल सुरक्षा सुदृढ़ होगी। इसके अंतर्गत राजस्थान के हिस्से का पानी हथिनीकुंड बैराज से लगभग 295.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन प्रणाली के माध्यम से चूरू जिले के हंसियावास (चूरू) जलाशय तक पहुंचाया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत तीन भूमिगत पाइपलाइनें, निरीक्षण सड़क, कृत्रिम जलाशय तथा आधुनिक जल प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी। राजस्थान सरकार द्वारा परियोजना की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कर केंद्रीय जल आयोग को भेजी जा चुकी है। वहीं, हरियाणा द्वारा पाइपलाइन अलाइनमेंट को सैद्धांतिक स्वीकृति भी प्रदान की जा चुकी है। परियोजना के निर्माण एवं संचालन के लिए राजस्थान हरियाणा यमुना वाटर एसपीवी का गठन किया जाएगा।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि यमुना जल समझौते से हरियाणा और राजस्थान के लोगों की पानी से जुड़ी लगभग 3 दशक पुरानी समस्या का आज समाधान हो गया है। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए सहकारी संघवाद के मंत्र का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से विशेषकर राजस्थान में पीने के पानी की समस्या के निवारण में बहुत सहायता मिलेगी। जिससे धरती की प्यास बुझेगी और कंठों की भी।
श्री शाह ने कहा कि समझौते में वित्तीय जिम्मेदारी, लागत साझीकरण, जल आवंटन और जल छोड़ने के प्रोटोकॉल और रखरखाव का बारीकी से ध्यान रखा गया है। इस वैज्ञानिक रूप से परिपूर्ण समझौते में बुनियादी ढांचे का संचालन, रखरखाव, निगरानी तंत्र, पारदर्शिता के उपायों और विवाद समाधान की प्रक्रिया को भी बहुत बढ़िया तरीके से समाहित किया गया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा, राजस्थान और विशेषकर केन्द्रीय जल आयोग ने इस समझौते का जो प्रारूप बनाया है वह आने वाले कई दशकों तक विवादहीन समझौते के रूप में स्थापित रहेगा।
केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी मार्गदर्शन में जल सुरक्षा, जल संरक्षण और राज्यों के बीच समन्वय को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसी क्रम में राजस्थान और हरियाणा के बीच हुआ यमुना जल समझौता ना केवल आमजन को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा, बल्कि भविष्य में अंतरराज्यीय जल संसाधन प्रबंधन के लिए भी एक आदर्श मॉडल बनेगा।

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