भारत की राष्ट्रपति ने वर्ष 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान किए 3 hours ago 😊 Please Share This News 😊 Lalit Kumar(Raju) Editor-in-chief(lalit.space10@gmail.com)91+9782656423 नई दिल्ली-भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (13 अगस्त, 2026) नई दिल्ली में प्रतिष्ठित कलाकारों को वर्ष 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान किए।इस अवसर पर अपने संबोधन में, राष्ट्रपति ने कहा कि आज सम्मानित किए गए कलाकार मिलकर भारत का एक ऐसा सांस्कृतिक मानचित्र प्रस्तुत करते हैं—जिसमें इस देश की मिट्टी की कथाएं और गीत जुड़े हैं; ऐसा मानचित्र जिसमें विविधता से भरी इस धरती के नृत्य और उत्सव समाए हैं और सदियों से विकसित हुई इसकी भाषाओं और बोलियों की यादें समाई हैं।राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की संस्कृति जड़ों से जुड़ी हुई है। अलग-अलग खान-पान, वेषभूषा, नृत्य और संगीत, प्रकृति से प्रेरित हैं। चहकते हुए चिड़ियों से, कल-कल बहते झरनों से, पेड़-पत्तों से, बादलों से, नदियों से प्रेरणा लेकर कलाकार अपने नृत्य और संगीत को प्रदर्शित करते हैं। विविधता और एकता का यह संगम हमारी कलाओं की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक है। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की सभी विभिन्न कला शैलियों में गुरु-शिष्य परंपरा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हमारी कलाओं की सबसे महत्वपूर्ण पुस्तक जीवंत गुरु ही होते हैं। आज के तेजी से बदलते दौर में हमारी बहुत सी लोक-कलाओं पर विलुप्त होने का संकट मंडरा रहा है। ऐसी कला विधाओं का न केवल साक्ष्य और प्रमाण रखना जरूरी है बल्कि उन्हें जीवंत रखने के लिए विशेष प्रयास जरूरी हो जाते हैं। उन्होंने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि संगीत नाटक अकादमी इसी उद्देश्य से ‘कला-दीक्षा’ कार्यक्रम का आयोजन कर रही है। उन्होंने वरिष्ठ कलाकारों से कहा कि अगली पीढ़ी को तैयार करने के लिए योजनापूर्वक प्रयास करें। राष्ट्रपति ने कहा कि कला के संस्कार और समझ से जीवन को समृद्ध करने के लिए प्रकृति को सबसे सहज प्रशिक्षण संस्थान माना जाता है। लोक और जनजातीय कलाओं में जीवन का स्वाभाविक उल्लास और प्रकृति के साथ गहरा संवाद दिखाई देता है। इन कला रूपों में समुदाय की स्मृति और सामूहिक चेतना सहज रूप से व्यक्त होती है। यही कारण है कि लोक कलाएं भारत की सांस्कृतिक पहचान का अत्यंत महत्त्वपूर्ण आधार हैं। राष्ट्रपति ने संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त करने वाले कलाकारों को बधाई दी और कहा कि भारतीय परंपरा के वाहक हमारे कलाकार देश की सामूहिक स्मृति के संरक्षक और भविष्य की कल्पना के सृजक हैं।राष्ट्रपति ने कहा कि संगीत नाटक अकादमी को भारत की सॉफ्ट पावर का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अकादमी आने वाले समय में भी भारत की सांस्कृतिक ऊर्जा से समूचे विश्व को लाभान्वित करती रहेगी। व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे Donate Now More Stories केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने राजस्थान और तेलंगाना को RKVY व KY मद में दी बड़ी स्वीकृति 3 hours ago पारंपरिक दवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए “वन हर्ब, वन स्टैंडर्ड”: केंद्रीय मंत्री श्री प्रतापराव जाधव 4 hours ago बद्रीनाथ एवं केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के नवनियुक्त उप वन संरक्षकों ने पुलिस अधीक्षक से की शिष्टाचार भेंट 4 hours ago [responsive-slider id=1466] You may have missed भारत की राष्ट्रपति ने वर्ष 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान किए 3 hours ago केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने राजस्थान और तेलंगाना को RKVY व KY मद में दी बड़ी स्वीकृति 3 hours ago पारंपरिक दवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए “वन हर्ब, वन स्टैंडर्ड”: केंद्रीय मंत्री श्री प्रतापराव जाधव 4 hours ago बद्रीनाथ एवं केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के नवनियुक्त उप वन संरक्षकों ने पुलिस अधीक्षक से की शिष्टाचार भेंट 4 hours ago