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प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग द्वारा डिजिटल बदलाव के लिए सरकारी प्रक्रिया पुनर्गठन पर 20वां राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस वेबिनार आयोजित

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नई दिल्ली-प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग-डीएआरपीजी ने डिजिटल बदलाव के लिए प्रौद्योगिकी के इस्‍तेमाल द्वारा केंद्रीय स्तर पर सरकारी प्रक्रिया पुनर्गठन विषय पर 20वां राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस वेबिनार आयोजित किया। डीएआरपीजी संयुक्त सचिव श्री अवनीश कुमार मिश्रा ने वेबिनार की अध्यक्षता की।वेबिनार में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 की केंद्र स्तरीय श्रेणी में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की एग्रीस्टैक और उपभोक्ता मंत्रालय की ई-जागृति के दो राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता पहल प्रदर्शित किए गए। इनमें दर्शाया गया कि प्रौद्योगिकी-आधारित प्रक्रिया पुनर्गठन से दक्षता, पारदर्शिता, सुलभता और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण में किस प्रकार सुधार लाया जा सकता है।

प्रस्‍तुत पुरस्कार विजेता पहल:

 

  • एग्रीस्टैक: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में अपर सचिव डॉ. प्रमोद कुमार मेहरदा ने एग्रीस्टैक की स्वर्ण पुरस्कार विजेता पहल प्रस्तुत की। एग्रीस्टैक देश भर में कृषि शासन और सेवा वितरण आधुनिक बनाने की डिजिटल सार्वजनिक अधोसंरचना पहल है जो पारंपरिक कागजी प्रक्रियाओं को पारदर्शी और किसान-केंद्रित डिजिटल पारितंत्र में बदलता है।

एग्रीस्टैक तीन प्रमुख रजिस्टरों – किसान रजिस्टर, बुवाई की गई फसल का रजिस्टर और भौगोलिक संदर्भ युक्‍त ग्राम मानचित्र पर आधारित है। यह सत्यापित कृषक पहचान, भू-स्वामित्व और बोई गई फसल का डिजिटल आधार प्रदान करता है। संघीय संरचना अनुसरण संबंधी इस पहल में रजिस्टर स्‍थापन, स्वामित्व और प्रबंधन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किया जाता है। इससे राष्ट्रीय कृषि पारितंत्र में अंतर-संचालनीयता सुनिश्चित होती है।

डिजिटल फसल सर्वेक्षण 648 जिलों के 31.36 करोड़ भूखंडों में संचालित है, जबकि 10 करोड़ से अधिक विशिष्ट किसान पहचान-पत्र बनाए गए हैं और 5.52 लाख भौगोलिक संदर्भ युक्‍त ग्राम मानचित्र तैयार किए गए हैं। किसान आईडी (डिजिटल पहचान संख्या जो किसानों के आधार कार्ड और भूमि रिकॉर्ड को जोड़ती है) को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना-पीएमएफबीवाई, प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा), महाराष्ट्र डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और न्यूनतम समर्थन मूल्य खरीद सहित प्रमुख कार्यक्रमों के साथ एकीकृत किया जा रहा है।

एग्रीस्टैक दर्शाता है कि प्रौद्योगिकी-संचालित प्रक्रिया पुनर्संरचना किस प्रकार पारदर्शिता सुदृढ़ीकरण तथा सरकारी योजनाओं का सत्यापित वितरण सक्षम बना सकती है। साथ ही यह अलग-अलग भागों में फैले और कागजी कार्रवाई पर निर्भरता कम कर सकती है।

  • ई-जागृति: राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के उप महानिदेशक श्री जी. मयिल मुथु कुमारन ने रजत पुरस्कार विजेता ई-जागृति पहल प्रस्तुत किया, जो दर्शाता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म उपभोक्ता विवाद समाधान को कैसे बदल सकते हैं।

ई-जागृति राष्ट्रीय, राज्य और जिला उपभोक्ता आयोगों में उपभोक्ता विवाद समाधान हेतु एकीकृत राष्ट्रीय डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र है। इसके जरिए उपभोक्ता धोखाधड़ी या खराब सेवा के खिलाफ जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर के उपभोक्ता आयोगों में घर बैठे ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इस प्लेटफॉर्म ने अलग-अलग स्‍थापित पुरानी प्रणालियों को मानकीकृत, संपूर्ण डिजिटल कार्यप्रणाली में बदल दिया है, जिसमें ऑनलाइन फाइलिंग, डिजिटल जांच, भुगतान प्रसंस्करण, सुनवाई, आदेश और मामलों का निपटारा शामिल है।

यह प्लेटफॉर्म आभासी और मि‍ले-जुले तौर पर सुनवाई, कॉज लिस्‍ट (मामले के विवरण संबंधी स्वचालित सूची), वास्तविक समय सूचनाएं, एनालिटिक्स डैशबोर्ड और मोबाइल एप्लिकेशन को भी एकीकृत करता है। इससे उपभोक्ताओं और अन्य हितधारकों को उपभोक्ता विवाद समाधान प्रक्रिया डिजिटल तौर पर उपयोग करने और प्रबंधित करने की सुविधा मिलती है।

इस पहल ने परंपरागत तौर पर कागजी और समय लेने वाली प्रक्रिया को डिजिटल तौर पर सुगम बना दिया है। इससे काम कराने के लिए कार्यालय जाने और कागजी कार्रवाई में कमी आई है  तथा उपभोक्ता विवाद निवारण में पारदर्शिता, पहुंच और दक्षता में सुधार हुआ है।

वेबिनार में केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, जिला और स्थानीय निकायों, देश भर के प्रशासनों और प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग के अधिकारियों सहित लगभग 1200 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

वेबिनार के समापन पर, डीएआरपीजी उप सचिव श्री हरि के भट्ट ने धन्यवाद ज्ञापन किया। वक्ताओं और प्रतिभागियों को धन्यवाद देते हुए उन्‍होंने राज्यों, जिलों, स्थानीय निकायों और केंद्रीय मंत्रालयों को अपने शासन क्षेत्रों में प्रदर्शित पहल को अपनाने और उनका अनुकरण करने को प्रेरित किया।

इस वेबिनार से सार्वजनिक सेवा वितरण बेहतर और कुशल, पारदर्शी, सुलभ और नागरिक-केंद्रित बनाने में प्रौद्योगिकी-सक्षम सरकारी प्रक्रिया पुनर्गठन के महत्व को बल मिला।

 

 

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