जैन साहित्य संगम का ऐतिहासिक तृतीय राष्ट्रीय अधिवेशन-2026 संपन्न
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कवि व साहित्यकार जैन सिद्धान्तों व आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाएँ..-कटारिया (राज्यपाल-पंजाब)
उदयपुर-अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के हुक्म संघ के नवम पट्टधर आचार्यश्री रामलालजी महाराज, बहुश्रुत उपाध्याय प्रवर श्री राजेश मुनिजी के शुभाशीर्वाद-सान्निध्य में जैन साहित्य संगम द्वारा आयोजित त्रि-दिवसीय (27-28-29 सितम्बर 2026) तृतीय राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन समारोह पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाबचंद कटारिया के मुख्य आतिथ्य में आदिनाथ भवन, बीकानेर में मंगल शुभारंभ हुआ।
इस अवसर पर बीकानेर पश्चिम के विधायक जेठानंद व्यास, डूंगरगढ़ के विधायक ताराचंद सारस्वत, अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेन्द्र गाँधी, जैन साहित्य संगम संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीप जैन ’’हर्षदर्शी’, राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र कांठेड़, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विजय सिंह नाहटा, मुख्य संयोजक अशोक नागोरी, वरिष्ठ संरक्षक व राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष कैलाश जैन तरल, साधुमार्गी जैन सेवा समिति बीकानेर के अध्यक्ष कन्हैयालाल बैद, सुश्राविका श्रीमती अनीता-गुलाबचंद जी कटारिया, अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ के मंत्री सुरेश बच्छावत, अहिंसा प्रचारक महेश नाहटा, अखिल भारतीय साधुमार्गी महिला संघ की महामंत्री प्रीति डागा, जैन महासभा अध्यक्ष कन्हैयालाल बोथरा, पार्श्वचन्द्र गच्छ के अध्यक्ष रविन्द्र रामपुरिया, मंत्री प्रताप रामपुरिया सहित देश के विभिन्न प्रदेशों से आए जैन साहित्यकार व कवि तथा बीकानेर जैन समाज की विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों सहित गणमान्य श्रावक-श्राविकाएँ मौजूद थे।
काव्य-संकलन-स्मरणिका का विमोचन
पंजाब के राज्यपाल कटारिया और समारोह में उपस्थित विशेष अतिथियों ने जैन साहित्य संगम के द्वितीय राष्ट्रीय अधिवेशन की स्मारिका-2025 व काव्य-संकलन “अनुभूतियों का आकाश” का लोकार्पण किया ।
ॐ पारदर्शी पुरस्कार की घोषणा-
पारदर्शी फाउंडेशन के जगदीप जैन “हर्षदर्शी” ने वरिष्ठ साहित्यकार व कवि विजय सिंह नाहटा-जयपुर के साहित्य के क्षेत्र में किए गए बहुआयामी अवदानों की अनुमोदनार्थ कालजयी कीर्तिमान कवि छंदराज ॐ पारदर्शी जी की स्मृति में ’’पारदर्शी पुरस्कार-2026’’ से सम्मानित करने की घोषणा की, जिसका तालियों की गड़गड़ाहट के साथ अनुमोदना की गई । पंजाब के राज्यपाल श्री कटारिया व समारोह में उपस्थित अतिथियों ने प्रशस्ति-पत्र, शॉल, प्रतिकचिह्न आदि प्रदान कर साहित्यकार नाहटा को सम्मानित किया ।
समारोह में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंदजी कटारिया ने कहा कवि व साहित्यकार जैन दर्शन व धर्म के आदर्शों, विशिष्टताओं को सकारात्मक सोच के साथ जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास करें । आपने युवा पीढ़ी के लिए भगवान महावीर , तीर्थंकरों व चारित्र आत्माओं के द्वारा बताए पाँच महाव्रतों – सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, अचौर्य व ब्रह्मचर्य तथा नवकार महामंत्र की विशिष्टताओं को सरल भाषा में छोटी-छोटी पुस्तकों के रूप में तैयार करने की बात कही। युवा पीढ़ी को काम, क्रोध, लोभ व मोह आदि कषायों से बचने के लिए साहित्य का सृजन करने की अपील की ।
कटारिया ने कहा कि बीकानेर ज्ञान, साहित्य, कला व संस्कृति, धर्म-आध्यात्म की धरती है। मरु नगर के विद्वानों, चारित्र आत्माओं ने अपने कार्य से जीवन को नई दिशा देने की प्रेरणा दी है। उन्होंने कहा कि कलमकार की ताकत से ही देश में साम्प्रदायिक सौहार्द, आपसी भाईचारा तथा धर्म व संस्कृति के आदर्श अक्षुण्ण हैं। कलमकार वर्तमान के साथ भविष्य को आदर्श बनाने के लिए अपनी कलम से दिशा देकर, सच्चा धर्मनिष्ठ, राष्ट्रभक्त इंसान बनाने के लिए प्रेरणा दें।
उन्होंने कहा कि भगवान महावीर के पांच महाव्रतों का सिद्धान्त, जैनदर्शन केवल जैन समाज की बपौती नहीं है, यह सृष्टि के जीवमात्र के कल्याण के लिए है। भगवान महावीर ने लोगों की जीवनचर्या को बदलने के लिए तपस्या,साधना तथा कषायों पर विजय प्राप्त की। जैन दर्शन अमन चैन व शांति तथा जीव मात्र के कल्याण तथा जीओं और जीने दो का संदेश देने वाला है। जैन धर्म के पाँच महाव्रतों का पालन करने वाले का जीवन श्रेष्ठ बन जाता है । परिवार, समाज में किसी तरह का राग-द्वेष व अहंकार नहीं रहता । उन्होंने कहा कि किसी दूसरे को अच्छा बनाने से पहले खुद अच्छा इंसान बनें। जैन दर्शन के सिद्धान्त ’’कम खाओ, गम खाओ और नम जाओ’’ तथा ’क्षमापना’’ आदि अनेक सिद्धान्त जीवन को परिवर्तन करने वाले हैं ।
राज्यपाल कटारिया ने कहा कि व्यक्ति की पहचान गुणों से होती है। सर्व कल्याणकारी नवकार महामंत्र में किसी व्यक्ति विशेष की स्तुति वंदना की बजाए अरिहंत, सिद्ध, उपाध्याय, आचार्य व सर्व साधु की वंदना की है। 
साहित्यकार व कवि सर्व समाज को विशेष कर युवा पीढ़ी को नवकार महामंत्र की विशिष्टताओं से अवगत करवाएं। उन्होंने कहा कि जैनाचार्य रामलालजी व उपाध्याय प्रवर राजेश मुनिजी ने भावी पीढ़ी को जैन धर्म व संस्कार से जोड़ने तथा व्यसन एवं नशे की प्रवृति के खिलाफ जन चेतना जगाने की अनुकरणीय प्रेरणा दी है। चारित्र आत्माओं की प्रेरणा व सकारात्मक सोच के साथ सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए कार्य करें। उन्होंने कहा कि कोई कानून किसी के व्यसन व नशे की प्रवृति को रोक नहीं सकता, चारित्र आत्माओं की प्रेरणा, परिजनों का सार्थक प्रयास व जन चेतना से ही देश नशा मुक्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि नशेड़ी की बजाए नशे से नफरत करें। सामाजिक व आम जन में चेतना जगाने से ही नौजवान पीढ़ी नशा मुक्त बन सकती है। कवि व साहित्यकार आने वाली पीढ़ी को नशे की प्रवृति से रोकने के लिए अपनी रचनाओं से जगाने का प्रयास करें। 
भगवान महावीर के अपरिग्रह के सिद्धान्त को धारण करते हुए विवाह व अन्य कार्यों में दिखावे व फिजुल खर्चे से बचें तथा प्राप्त संसाधनों को जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा व संस्कार देने में लगाएँ।
विधायक जेठानंद व्यास ने कहा कि जैन शब्द शुद्धता, सात्विकता व अहिंसा व पांच महाव्रतों की प्रेरणा देने वाला है। जैन समाज के रचनाकार व प्रबुद्धजन नशा मुक्त समाज की संरचना में सहभागी बनें। प्रत्येक व्यक्ति नशेड़ी का नशा छुडाने का संकल्प लें । समाज को जुआ, सट्टा, नशा आदि व्यसन से मुक्त कराने का सर्वजन सामूहिक प्रयास करें।
श्रीडूंगरगढ़ विधायक ताराचंद ने कहा कि जैनधर्म के सिद्धान्त व दर्शन से सात्विक विचार धारा व देश भक्ति के साथ आत्म चिंतन,आत्म निरीक्षण करते हुए अपने में व्याप्त बुराइयों को दूर करने की प्रेरणा मिलती है।
श्री अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नरेन्द्र गाँधी ने बताया कि साधुमार्गी जैन संघ के आचार्य नानालालजी व आचार्य रामलालजी म.सा.की प्रेरणा से 63 वर्षों पूर्व बलाई अनुसूचित जाति के अनेक लोग नशा व व्यसन की प्रवृति को त्यागकर शिक्षा एवं अन्य क्षेत्रों में प्रगति कर रहे है। जैनदर्शन व चारित्र आत्माओं की प्रेरणा से बलाई जाति के 469 गाँवों के लोगों के जीवन स्तर में काफी परिवर्तन आया है। उन्होंने बताया कि धर्मपाल का सम्मान देते हुए युवा पीढ़ी को प्रेरणा देने के लिए 150 जैन संस्कार पाठशालाओं का संचालन किया जा रहा है।
साधुमार्गी जैन सेवा समिति के अध्यक्ष कन्हैयालाल बैद ने चातुर्मास ’’समर्पण-2026’ की गतिविधियों से अवगत करवाया।
जैन साहित्य संगम संस्थान के उपाध्यक्ष विजयसिंह नाहटा ने पधारे हुए अतिथियों का परिचय देते हुए स्वागत भाषण दिया।।
’’जैनम जयति शासनम्’’, ’’हर्ष-हर्ष, जय-जय’’ के उद्घोष के साथ हुए उद्घाटन समारोह में संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीप जैन हर्षदर्शी ने बताया कि संस्था जिनवाणी को साहित्य एवं काव्य के माध्यम से जन जन तक पहुँचाने, जैन दर्शन और साहित्य में जैन कवि साहित्यकारों के योगदान को उजागर कर जन जागरण को संकल्पित होकर कार्य कर रही है। संस्था साहित्य सृजन की गुणवता व पवित्रता को बनाए रखते हुए जैन संस्कृति के प्रचार प्रसार, राष्ट्र धर्म के प्रति संकल्पिक होकर जैन सिद्धान्तों का प्रचार प्रसार कर रही है। आपने जैन साहित्य संगम की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए आगामी साहित्यिक आयोजनों के बारे में बताया । कवि हर्षदर्शी ने जैन साहित्य संगम के ध्येय व उद्देश्यों पर मनहरण कवित्त सुनाया ।
राज्यपाल कटारिया – स्मरणिका विमोचन सुखद संयोग
राष्ट्रीय अध्यक्ष हर्षदर्शी ने बताया कि श्री कटारिया ने संस्था की स्मरणिका-2024 का विमोचन गुडगाँव-दिल्ली में विश्व शांति केन्द्र के उद्घाटन समारोह में किया था । आज सुखद संयोग है कि स्मरणिका-2025 का विमोचन भी राज्यपाल कटारियाजी के द्वारा आज होने जा रहा है ।
अंत में राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र कांठेड़ ने सभी के प्रति आभार प्रकट किया ।, अधिवेशन के राष्ट्रीय संयोजक अशोक नागौरी ने समारोह का सुन्दर संचालन किया । वीरेन्द्र अभाणी ने सामूहिक नवकार वंदना करवाई।
श्री साधुमार्गी जैन सेवा समिति के मीडिया प्रभारी अमित गोलछा ने मीडिया कवरेज करने में सहयोग दिया ।
उल्लेखनीय है कि अधिवेशन उद्घाटन समारोह का प्रारंभ राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् से तथा समापन राष्ट्रगान जन गण मन…से किया गया ।
कविता प्रतियोगिता-
अधिवेशन में “कर्म – जैसा बोओगे, वैसा काटोगे” विषयक कविता प्रतियोगिता आयोजित की गई । जिसमें प्रथम को 5100, द्वितीय को 3100 व तृतीय को 2100 रुपए का नकद पुरस्कार प्रदान किए गए। इसमें प्रथम वीना नाहर-ब्यावर, द्वितीय सुधा जैन चौधरी-विदिशा व तृतीय विमल भंडारी-भोपाल रहे । विजेताओं को पुरस्कार बोहरा बन्धु, पीपलीनगर/चेन्नई के सौजन्य से दिए गए। विजेताओं को मुख्य अतिथि अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ के अध्यक्ष नरेन्द्र गांधी, मंत्री सुरेश बच्छावत तथा जैन साहित्य संगम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीप हर्षदर्शी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विजय सिंह नाहटा-उज्जैन, राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र कांठेड, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष कैलाश जैन ‘तरल’, उज्जैन के श्रेष्ठीवर्य विजय सुराणा, जावरा के डॉ.सी.एम. मेहता ने प्रदान किए। कार्यक्रम में जैन पाठशाला सभा के अध्यक्ष विजय कोचर, अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन महिला समिति की राष्ट्रीय मंत्री प्रीति डागा श्री साधुमार्गी सेवा समिति के कार्याध्यक्ष सुरेन्द्र दस्साणी, उपाध्यक्ष राजेन्द्र गोलछा, आवास व्यवस्था प्रभारी सिद्धार्थ सेठिया, अहिंसा प्रचारक महेश नाहटा सहित बीकानेर, गंगाशहर व भीनासर आदि गणमान्य सुधि श्रोता मौजूद थे।
जैन जादू व कवि सम्मेलन-1
अधिवेशन में तीसरे सत्र में जैन जादूगर की लाजवाब प्रस्तुतियाँ हुई । जैन जादूगर श्री चन्द्रकुमार भामावत ने जैन संस्कृति पर आधारित रोचक जादू कला दिखाकर मंत्रमुग्ध कर दिया ।
विराट कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें कवियों ने एक से बढ़कर एक कविताएँ सुनाकर खूब तालियाँ बजवाई । कवि सम्मेलन में सर्वश्री कैलाश जैन ‘तरल’-उज्जैन, अशोक दोशी-हैदराबाद, कमल रांका-पूना, गुलाब बोथरा, सम्पत बोथरा-जयपुर, गौरव गुलेच्छा-उदयपुर, उत्सव जैन-बांसवाडा, विमल भंडारी-भोपाल, चंचल जैन, कुसुम सुराणा-मुम्बई, नरेश जारोली-साँवलियाजी, कमलेश जैन-जोधपुर आदि ने विभिन्न रसों में काव्यपाठ कर उपस्थित श्रोताओं का भरपूर स्वस्थ मनोरंजन किया । कवि सम्मेलन का कुशल संचालन जयंतीलाल जैन-मुम्बई ने करके श्रोताओं को बाँधे रखा ।
अधिवेशन में पधारे हुए समस्त कवि-साहित्यकारों को श्रेष्ठीवर्य श्रीमती कल्पना- विजयजी सुराणा-उज्जैन ने प्रतीचिह्न प्रदान कर सम्मानित किया ।
महिला सांस्कृतिक कार्यक्रम-
अधिवेशन में महिला सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन चंदा-अजय डाँगी-मंदसौर के निर्देशन व श्रीमती सुधा चौधरी-विदिशा के संचालन में किया गया । जिसमें विचार उद्गम दिशाबोध विषयक नाटक, गीत आदि की आकर्षक प्रस्तुतियाँ हुई, जिसका अनुमोदन तालियाँ बजाकर किया गया । महिला सांस्कृतिक कार्यक्रम में मंगलाचरण-गीत में कुसुम सुराणा, चंचल जैन, चंदा डाँगी, इन्दुबाला हर्षदर्शी, गुलाब बोथरा, कुमुद जैन, प्रतिभा सहलोत ने हाथों में जैन ध्वज लहराकर किया । गुलाब बोथरा, खुशबू जैन, राजरानी जैन ने मारवाड़ी भाषा में नाटिका प्रस्तुत कर खूब हँसाया । श्रीमती सरोज दुग्गड व कल्पना जैन ने पर्यावरण विषय पर प्रेरक संवाद प्रस्तुत किया । प्रतिभा सहलोत व चंचल जैन ने व्यसन मुक्ति नाटिका करके सबको प्रभावित किया । हर्षलता दूधोरिया व खुशबू जैन ने सामायिक क्या है ? विषय पर सुन्दर नाटिका मंचन किया । महिला सांस्कृतिक कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वीना नाहर-ब्यावर व विशेष अतिथि कुमुद जैन-हैदराबाद थी।
राज्यपाल ने चारित्र आत्माओं व प्राचीन जिनालयों के दर्शन किए-
अधिवेशन में पधारे पंजाब के राज्यपाल तथा चंड़ीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद जी कटारिया ने सपत्नीक छबीली घाटी के सेवा सदन में साधुमार्गी जैन संघ के आचार्य रामलालजी, उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि सहित अनेक चारित्र आत्माओं के दर्शन-वंदन कर आशीर्वाद लिया।
आपने गंगाशहर मार्ग के आदिनाथ भवन परिसर की पार्श्वचन्द्र दादाबाड़ी के 200 वर्ष प्राचीन भगवान आदिनाथ, पार्श्वचन्द्र गच्छ के संस्थापक आचार्य पार्श्वचन्द्र सूरीश्वरजी व बटुक भैरव जी के मंदिर में दर्शन किए । श्री जैन श्वेताम्बर पार्श्वचन्द्र गच्छ के अध्यक्ष रविन्द्र रामपुरिया तथा मंत्री प्रताप रामपुरिया ने मंदिर के इतिहास व विशिष्टताओं से अवगत कराते हुए कटारिया का अभिनंदन किया।
विद्वद् संगोष्ठी-
अधिवेशन में प्रातः के सत्र में विद्वद् संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें सर्वश्री पदमचंद गाँधी-भोपाल, विजयसिंह नाहटा-जयपुर, अरुणकुमार जैन-फरीदाबाद, डाॅ. सुभाष जैन-उज्जैन, खुशबू जैन-हाँसी, गौरव गोलच्छा-उदयपुर, अजय डाँगी-मंदसौर, सरोज दुग्गड-खारूपेटिया (असम) आदि ने सामाजिक सरोकार, तीर्थ संरक्षण, कर्मसत्ता विषयक प्रेरक उद्बोधन दिए । संगोष्ठी का संचालन डाॅ.सीएम मेहता-जावरा ने किया ।
प्रायोजक-सौजन्यदाता का अभिनंदन
जैन साहित्य संगम की ओर से अ. भा. साधुमार्गी जैन संघ व साधुमार्गी जैन सेवा समिति के पदाधिकारियों का नवकार उपरणा, शाल, प्रशस्ति-पत्र आदि प्रदान कर भावभीना अभिनंदन किया गया । कवि सम्मेलन-2 व सम्मान समारोह-
जैन साहित्य संगम संस्थान के अधिवेशन में रात को कवि सम्मेलन-2 व पुरस्कार वितरण के साथ संपन्न हुआ।
देश के विभिन्न प्रदेशों से आए कवि-साहित्यकारों ने कविता, गीत व गजल की सुन्दर प्रस्तुतियों से देर रात तक हजारों श्रोताओं को बाँधे रखा।
राजस्थान प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी, कवि व साहित्यकार तथा जैन साहित्य संगम के उपाध्यक्ष विजय सिंह नाहटा ने ’’सदा मुस्कराती रहे जिन्दगानी, सदा गीत गाते चले जिन्दगानी’’,, ब्यावर की श्रीमती वीना नाहर ने ’’महिला सशक्तिकरण पर स्वर मुखर करते कहा ’’कोमलांगी नहीं, शिवांगी हूं मैं, अबला नहीं सबला हूं मैं” सुनाकर करतल ध्वनि बटोरी। 
बैंगलुरू के अशोक नागोरी ’’धर्मप्रेमी” ने ’’प्यार की खुशबू’’, तेलंगाना सिकन्दराबाद के अशोक दोशी ’’दिवाकर’’ ने महावीर स्वामी की आरती ’’ आरती वीर जिनेश्वर की, आरती मेरे परमेश्वर की’’ के साथ चुनिंदा नई कविताओं को सुनाकर सराहना ली। मंदसौर की श्रीमती चंदा डांगी ने वर्तमान समय में युवाओं में खो रहे संस्कारों के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ’’संस्कार ना जाने कहाँ खो गया, वाह क्या गजब हो गया’’ तथा पर्यावरण चेतना के संदेश की कविता ’’ सालों साल सब काट रहे पेड, विकास के नाम,उजाड़ रहे जंगल, बिगाड़ रहे पर्यावरण, अजय डांगी ने वर्षा के पानी को बचाने का संदेश दिया ’’ अमृत बरसा है, इसको यूं ही व्यर्थ न गंवाओं, आ पहुंची है, बरसात मनुष्यों नाचो गाओ’’ सुनाकर दाद ली।
जैन कवि सम्मेलन में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ, साधुमार्गी जैन संघ, खरतरगच्छ, पार्श्वचन्द्र गच्छ, दिगम्बर जैन सहित विभिन्न जैन समुदायों के पदाधिकारियों व श्रोताओं के समक्ष रचनाकारों ने काव्य पाठ किया। इनमें उत्सव जैन-बांसवाडा, असम की सरोज दुग्गड़, हैदराबाद की हर्षलता दूधोरिया, उज्जैन की मीरां जैन, दिल्ली की कल्पना सेठिया, मुंबई के हुकमचंद कोठारी, जयंतीलाल जैन-मुंबई, हांसी हरियाणा की खुशबू जैन, विदिशा की सुधा चौधरी, नागदा जंक्शन के राजेन्द्र कांठेड़, उज्जैन के कैलाश जैन ’’तरल’’ , फरीदाबाद के अरुण कुमार जैन, विमल भंडारी-भोपाल, उमेश रचित-रिंगनोद, सुरेश लुंकड-चेन्नई आदि ने काव्यपाठ कर श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। कवि सम्मेलन का प्रभावक संचालन विमल भंडारी-भोपाल ने किया
उपाध्यायश्री का आशीर्वाद व दिशा-निर्देशन-
सेवा सदन में चल रहे नियमित प्रवचन श्रवण के पश्चात् बहुश्रुत उपाध्यायश्री राजेशमुनिजी म.सा. ने जैन साहित्य संगम के अधिवेशन में पधारे प्रतिभागियों का परिचय प्राप्त किया । उपाध्यायश्री ने कवि-साहित्यकार के मूल कर्तव्य का बोध कराते हुए श्रेष्ठ व उपयोगी सृजन करने पर बल दिया । आपश्री नैतिक शुद्धाचरण की उपादेयता समझाते हुए लेखन करने की सीख दी । उपाध्यायश्री की सम्यक् शिक्षा व आशीर्वाद पाकर जैन साहित्य संगम के सदस्य धन्य हो गए ।
अनुपम आतिथ्य सत्कार
अधिवेशन में पधारने वाले प्रतिभागियों का अ. भा. साधुमार्गी जैन संघ व साधुमार्गी जैन सेवा समिति ने “अतिथि देवोभव” की भावना से सुन्दर आतिथ्य सत्कार किया । अग्रसेन भवन में षटरस सुस्वादु व्यंजनों से सूर्योदय से सूर्यास्त तक सुन्दर साधर्मिक भक्ति की गई। अधिवेशन स्थल (आदिनाथ भवन) से सेवा सदन व अग्रसेन भवन तक यातायात की निःशुल्क व्यवस्था की गई। 
प्रिंट व डिजिटल मिडिया व टीवी चेनल ने त्रि-दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का विशाल स्तर पर कवरेज दिया । जैन हिन्दुस्तान टीवी के श्री वीरेन्द्र अभाणी ने प्रचार-प्रसार व अधिवेशन को सफल बनाने में उल्लेखनीय सेवाएँ प्रदान की ।इस तरह जैन साहित्य संगम का तृतीय राष्ट्रीय अधिवेशन ऐतिहासिक साहित्यिक व सांस्कृतिक आयोजनों के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ ।
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