पीएम किसान एक परिवर्तनकारी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना।
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पीएम किसान के तहत किसी भी किश्त अवधि के लिए लाभ जारीकरने की संख्या अब 10 करोड़ किसानों को पार कर गई है।शुरुआत में यह संख्या 3.16 करोड़ थी, अर्थात 3 वर्षों में 3 गुना सेअधिक की वृद्धि हो चुकी है।
पीएम किसान योजना ने 3 से अधिक वर्षों के दौरान करोड़ोंजरूरतमंद किसानों को सफलतापूर्वक 2 लाख करोड़ रुपये सेअधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की है। इस राशि में से 1.6 करोड़ रुपये से अधिक की राशि कोविड महामारी के कारण हुएलॉकडाउन के बाद से अंतरित की जा चुकी है।
पीएम किसान एक उभरती हुई योजना है और यह योजना प्रत्येककिसान द्वारा स्व-प्रमाणन पर निर्धारित किसानों की पात्रता के साथशुरू की गई थी। राज्यों द्वारा किसानों के पंजीकरण एवं सत्यापनके तरीके में समय के साथ सुधार किए गए हैं।
इस योजना की सफलता किसान विवरण के सत्यापन औरप्रमाणीकरण के लिए समय के साथ शुरू किए गए सुधारों मेंनिहित है। प्राथमिक स्तर की जांच के लिए इसकी स्थापना के बादसे कुछ अनिवार्य क्षेत्र बनाये गए हैं। राज्यों द्वारा पात्र किसानों केडाटा की जांच तथा सत्यापन करने के बाद, इसे पीएम किसानपोर्टल पर अपडेट किया जाता है और इसे वित्तीय विवरणों केसत्यापन के लिए पीएफएमएस को भेजा जाता है; इसके बादआधार के प्रमाणीकरण के लिए यूआईडीएआई सर्वर पर; आयकरदाता का स्टेटस चेक करने के लिए इनकम टैक्स सर्वर को; औरएनपीसीआई को बैंक खातों की आधार सीडिंग को सत्यापितकरने के लिए आगे बढ़ा दिया जाता है। इसने सरकार को मौजूदाऔर नए लाभार्थियों के निरंतर सत्यापन एवं प्रमाणीकरण में सक्षमबनाया है।
पीएम किसान भारत में किसानों को सरकारी सहयोग की प्रकृति मेंएक बड़ा बदलाव है और नागरिकों तक सीधे पहुंचने के लिएसुशासन तथा डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं के उपयोग केबेहतरीन उदाहरणों में से एक है। सरकार ने पीएम किसान केकार्यान्वयन में डिजिटल तकनीकों के व्यापक उपयोग का लाभउठाते हुए कृषि या एग्री स्टैक के लिए एक डिजिटल इकोसिस्टमके निर्माण के लिए भी कदम उठाए हैं। यह कृषि क्षेत्र में एक औरडिजिटल सार्वजनिक सार्थक पहल साबित होगी, जिसमें पीएमकिसान डेटा का उपयोग राज्यों द्वारा बनाए जाने वाले संघबद्धकिसानों के डेटाबेस के आधार के रूप में किया जाएगा।
एग्री स्टैक का निर्माण सरकार को सभी पात्र किसानों के साथपीएम किसान योजना को जोड़ने और योजना के परिचालनदिशानिर्देशों के अनुसार सभी मौजूदा लाभार्थियों को फिर सेसत्यापित करने का अवसर प्रदान करता है। इस प्रकार मौजूदालाभार्थियों के भूमि विवरण को राज्यों के भूमि रिकॉर्ड के अनुसारदेखा तथा परखा जा रहा है, ताकि भविष्य में राज्यों के डिजिटलभूमि रिकॉर्ड के साथ गतिशील जुड़ाव सुचारू रूप से सुनिश्चित होसके। योजना में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए कृषि मंत्रालयद्वारा किसानों का ई-केवाईसी और आधार पेमेंट ब्रिज (एपीबी) काउपयोग कर भुगतान भी शुरू किया गया है। इस पहल से उनकिसानों को बाहर निकालने में भी मदद मिलेगी, जिनकी बीच मेंही मृत्यु हो गई हो या फिर उन्होंने अपनी जमीन बेच दी हो, औरइस बीच योजना के तहत निर्धारित तरीके से बाहर जाने के मानदंडमें प्रवेश कर गए हों।
कई अध्ययन और निष्कर्ष निकल कर सामने आये हैं, जो इशाराकरते हैं कि पीएम किसान योजना ने किसानों को कृषिगतिविधियों में उत्पादक निवेश की दिशा में मदद की है। इसकेबदले में, गुणक प्रभाव के माध्यम से कृषि क्षेत्र के समग्र सुधार मेंयोगदान दिया गया है।
उदाहरण के तौर पर आईसीएआर और अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीतिअनुसंधान संस्थान (आईएफपीआरआई) के सहयोग से किए गएएक अध्ययन में पाया गया कि इस योजना ने कृषि के लिएआवश्यक वस्तुओं को खरीदने के लिए किसानों की तरलता कीकमी को दूर करने में काफी मदद की है। इसके अलावा, छोटे वसीमांत किसानों के लिए इस योजना से उन्हें न केवल कृषि कार्योंके लिए धन की आवश्यकता को पूरा करने में मदद मिली है, बल्किउनके दैनिक उपभोग, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य आकस्मिक खर्चोंके लिए भी सहायता मिली है।
सही मायने में, हर चार महीने में और किसानों की जरूरत के समयदेश में किसानों तक सीधे पहुंचने में पीएम किसान एकपरिवर्तनकारी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना साबित हुई है।
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